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उम्र के आखिरी पड़ाव तक भी इंसान में क्यों रहती है यौन सहवास की ख्वाहिश, पढ़ें यह खबर

-85 से 90 साल उम्र के व्यक्ति भी इम्पु्रव करवा रहे हैं सैक्स लाइफ -एशिया के प्रसिद्ध सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी से विशेष बातचीत

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Why the person desire for sex in the last stage of the life

उम्र के आखिरी पड़ाव तक भी इंसान में क्यों रहती है यौन सहवास की ख्वाहिश, पढ़ें यह खबर

-पदमश्री कोठारी आज मेडिकल कॉलेज में यौन समस्याओं पर करेंगे बात

जोधपुर.
देश में मानसिक रोग, बलात्कार, एचआईवी-एड्स, कुमार मातृत्व, भू्रण हत्या सहित कई बीमारियों व परेशानियों का एकमात्र इलाज है यौन शिक्षा को अनिवार्य कर देना चाहिए। क्योंकि यौन शिक्षा की जागरूकता नहीं होने के कारण ही तमाम तरह की समस्याएं व परेशानियां देश के समक्ष चुनौती के रूप में खड़ी है। यह कहना है कि एशिया के प्रसिद्ध सैक्सोलॉजिस्ट व पद्मश्री डॉ. प्रकाश कोठारी का।

एसएन मेडिकल कॉलेज के चर्म व रति रोग तथा मानसिक रोग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सीएमई में वक्ता के रूप में भाग लेने आए डॉ. कोठारी ने कहा कि जिस भारत देश में ऋषि वात्सायन ने कामसूत्र जैसे ग्रंथ की रचना की, वहीं पर यौन के संंबंध में आज भी खुलकर बात नहीं होती। भ्रांतियों व कुंठा के कारण मानसिक व शारीरिक बीमारियां बढ़ रही है।

डॉ. कोठारी के अनुसार वे अपने 47 साल की प्रेक्टिस के दौरान यौन रोग के 55 हजार मरीजों को परामर्श दे चुके हैं। अधिकतर मरीज यौन संतुष्टि नहीं मिलने लेकर है। हर साल 10 मरीज तो 85 से 90 साल की उम्र के भी आते हैं। क्योंकि स्वस्थ इंसान के मन में यौन संबंध की ख्वाहिश रहती है।

यौन इच्छा कभी मरती नहीं हैं। कुछ लोग अधिक उम्र होने पर यौन की ख्वाहिश मन में दबा लेते है तो वे कुंठा का शिकार होकर मानसिक रोगी भी हो जाते हैं। जबकि यह शरीर के साथ अत्याचार है। क्योंकि इलाज के जरिए उम्र के अन्तिम पड़ाव तक सेक्स लाइफ को इम्प्रुव कर जीवंत रखा जा सकता है।

यह भी भ्रांति है कि अधिक बार यौन संबंध बनाने से शरीर कमजोर हो जाता है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। डॉ. कोठारी ने कहा कि यौन समस्या को गुप्त रोग बताकर बीमारियां और अधिक बढ़ाई जा रही हैं। जबकि यौन अंग भी जीभ, आंख-कानजैसे अंग के समान ही हैं। यदि हमारी जीभ काम कर रही है, बोलने से नहीं थकती और उसमें रक्त संचार रहता है, ऐसे ही यौन अंग भी कभी कमजोर नहीं होते। ऐसी भ्रांतियां केवल दिमागी रूप से पैदा हो रही है।


उन्होंने कहा कि यौन पर चर्चा नहीं होने के कारण ही भारत में सैक्स व ब्रेन टॉनिक बिक्री का बड़ा बाजार बन चुका है। जबकि हृद्य आदि के लिए टॉनिक बाजार में नहीं है। जबकि हकीतत यह है कि यौन शक्ति बढ़ाने के लिए किसी भी टॉनिक की जरूरत ही नहीं है। योग में भी यौन शक्ति बढ़ाने व कई रोगों का इलाज है। यौन रोगी को दवा से ज्यादा सही परामर्श की जरूरत होती है। संकोच व उचित परामर्श नहीं मिलने के कारण ही ऐसी बीमारियां बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि उनके लेक्चर ऐसे होते हैं कि एक दादा व पोता साथ बैठकर सुन सकते हैं। और अब देश में इसकी जरूरत भी है कि बच्चों से कुछ छिपाने की बजाय उन्हें सही समझाया जाएं। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से कुछ साल पहले केन्द्र सरकार को यौन शिक्षा की अनिवार्यता को लेकर ब्ल्यू प्रिन्ट प्लान दिया गया, लेकिन सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।


डॉ. कोठारी परिचय : एक नजर
एशिया के प्रसिद्ध सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी जीएस मेडिकल कॉलेज व केईएम हॉस्पीटल मुम्बई क सीनियर प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। इनकी 'सैक्स एण्ड यू' पुस्तक भारत और कई देशों की भाषाओं में प्रकाशित की हो चुकी है। उन्होंने यौन में चरमोत्कर्ष पर इनके मौलिक शोध एवं ' वात्स्यायन एवं हिज ट्रीटाइज कामसूत्र' से भारत को विश्व मानचित्र पर पहचान दिलाई। यौन विज्ञान में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए इन्हें द सेक्सोलॉजिस्ट ऑफ एशिया का सम्मान भी मिल चुका है। वल्र्ड एसोसिएशन फॉर सेक्सोलॉजी ने 1989 मेंं मैन ऑफ ईयर भी घोषित किया। यौन औषधि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. कोठारी को भारत का पद्म श्री से भी नवाजा जा चुका है।


मेडिकल कॉलेज में कोठारी का लेक्चर आज-
डॉ. दिलीप कच्छवाहा ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज के चर्म व रति रोग तथा मानसिक रोग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सभागार में रविवार अपराह्न 4 बजे डॉ. प्रकाश कोठारी कॉमन सेक्सुअल प्राब्लम्स व सोल्यूशन विषयक सीएमई में विशेष चर्चा करेंगे और चिकित्सकों व आमजन के सवालों का जवाब भी देंगे। कॉलेज प्राचार्य डॉ. एस.एस. राठौड़ ने बताया कि इस तरह की सीएमई लोगों के नॉलिज बढ़ाने में कारगर साबित होगी।

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