
HANDICRAFT----अब एक्सपोर्ट हो रहे लकड़ी के जूते
जोधपुर।
अब लकड़ी के अन्य आयटम्स की तरह लकड़ी के जूते भी इंटरनेशनल मार्केट में टे्रंड में आ गए है। जी हां, लकड़ी के कलात्मक फर्नीचर निर्यात के लिए विश्वविख्यात जोधपुर अब लकड़ी के आकर्षक जूते भी निर्यात कर रहा है। भारत में पहने जाने वाली पारम्परिक खड़ाउ की तर्ज पर आधुनिकता के साथ चप्पल व जूते बनाए गए है। लकड़ी के जूते बनाने वाले निर्यातक मनीष अबानी बताते है कि लकड़ी के जूते स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी उपयोगी है। अब तक जोधपुर से विदेशों में बड़ी संख्या में लकड़ी के जूतों का निर्यात किया जा चुका है। जापान में पारम्परिक लकड़ी के जूतों को पहना जाता है, इसलिए जापान सहित कई देशों में लकड़ी जूतों की ज्यादा मांग है।
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सागवान-आम की लकड़ी से हो रहे तैयार
निर्यातक हैण्डीक्राफ्ट उत्पाद बनाने में काम में ली जाने वाली लकडिय़ों की तरह जूते बनाने के लिए सागवान, आम, शीशम व पाइन की लकड़ी उपयोग में ले रहे है। इन लकडिय़ों को अच्छी तरह प्रोसेस करने के बाद कारीगर हाथों से इन जूतों को तैयार कर रहे है। लकड़ी पर हाथ से आकर्षक खुदाई कर, नक्काशी कर जूतों के ऊपर कढ़ाई कर व कपड़े से लैस लगाकर जूतों तैयार किए गए है। इन जूतों को बनाने में 3 से 4 दिन का समय लगता है और इनकी लागत करीब दो से ढाई हजार रुपए आइ है।
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विदेशों में ग्राहकों से टेस्टिंग कराई
लकड़ी के जूते बनाने व उनके निर्यात से पहले निर्यातक ने पहले इन जूतों को भारत में विशेषज्ञों के अलावा विदेशों में ग्राहकों से इन जूतों की टेस्टिंग कराई। टेस्टिंग के दौरान आई कमियों को दूर करने के बाद दूसरी बार टेस्टिंग कराई गई। जिसमें स्वास्थ्य व उपयोग की दृष्टि से अनुकूल पाए जाने पर इनका निर्यात किया गया।
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कोरोना ने दिलाया नया आइडिया
गुजरे सात माह से वैश्विक कोरोना से जूंझ रहे हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक कुछ नया करने की सोच के साथ आगे बढ़ रहे है। इसीलिए लकड़ी के जूते बनाने का आइडिया काम आया और चल गया। निर्यात के अलावा कई देश के बायर जानकारी ले रहे है।
मनीष अबानी, हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक
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Published on:
19 Oct 2020 05:12 pm
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