विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस आज : देश में एक हजार पर 03 व्यक्ति पीड़ित, जबकि जोधपुर में यह आंकड़ा 0.01
– हनुमान गालवा
जोधपुर. सूर्यनगरी में रोजाना औसतन 31 लोग वहम और शक की बीमारी स्किजोफ्रेनिया के शिकार हो रहे हैं। इनमें से रोजाना दो लोगों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ रहा है।
मथुरादास माथुर अस्पताल में इस साल एक जनवरी से 30 अप्रेल तक स्किजोफ्रेनिया के शिकार 3,763 लोग दिखाने आए। इनमें से 263 मरीजों को गंभीर स्थिति में उपचार के लिए भर्ती करना पड़ा। वर्ष 2015-16 में मानसिक स्वास्थ्य को जांचने के लिए करवाए गए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक देश में प्रति एक हजार में से 03 व्यक्ति इस गंभीर बीमारी से ग्रसित है। गणितीय गणना के लिहाज से हालांकि जोधपुर में स्थिति ज्यादा चिंताजनक नहीं है। शहर में प्रति एक हजार में से केवल 0.01 लोग ही इस गंभीर बीमारी से ग्रसित है।
इस वर्ष 30 अप्रेल तक की स्थिति
3763 मरीजों को परिजन दिखाने लाए।
263 गंभीर स्थिति में उपचार के लिए भर्ती।
31 लोग औसतन रोजाना स्किजोफ्रेनिया के शिकार।
02 लोगों को औसतन रोजाना करना पड़ता भर्ती।
क्या कहता है मेडिकल साइंस
30 प्रतिशत मामलों में स्किजोफ्रेनिया मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
60 प्रतिशत स्किजोफ्रेनिया मरीज किसी न किसी और बीमारी से भी ग्रसित रहते हैं।
10 से 20 वर्ष कम होती है स्किजोफ्रेनिया मरीज की सामान्य से कम औसत आयु।
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भय और भ्रांतियां
स्किजोफ्रेनिया भी अन्य शारीरिक रोगों की तरह ही है, जिसका उपचार दवा से संभव है। इसके संबंध में व्याप्त भय और भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। रोगियों की पर्याप्त सार-संभाल और पुनर्वास पर समुचित ध्यान देने की जरूरत है।
– डॉ. संजय गहलोत, एचओडी, मनोविकार विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर