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आप सुधर जाएं, देश अपने आप सुधर जाएगा : कैप्टन उम्मेदसिंह

जोधपुर.भारतीय थल सेना की ओर से सेना मैडल से सम्मानित अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन उम्मेदसिंह का कहना है कि देशवासियों को अपना कर्तव्य भी समझना चाहिए। अगर आप सुधर जाएंगे तो देश सुधर जाएगा।  

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जोधपुर

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MI Zahir

Aug 19, 2018

जोधपुर. भारतीय थल सेना की ओर से सेना मैडल से सम्मानित अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन उम्मेदसिंह का मानना है कि देश के जिम्मेदार नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्य का भी निर्वाह करना चाहिए। सभी देशवासियों को अपना कर्तव्य भी समझना चाहिए। क्यों कि यह कर्तव्य निभाने की भी आजादी है। अगर आप सुधर जाएंगे तो देश सुधर जाएगा। उन्होंने पत्रिका से एक मुलाकात में यह बात कही।

कथनी और करनी में किसी तरह का कोई भेद न रखें

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि हर नागरिक दूसरे के कर्तव्य की बात करेगा तो जिम्मेदारी कौन निभाएगा, सब अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और कथनी और करनी में किसी तरह का कोई भेद न रखें।

हमारी हजारों किलामीटर जमीन पाकिस्तान के अधीन हो गई

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन उम्मेदसिंह ने कहा कि मैं बचपन से सुनता था कि आजादी से पहले यहां राजतंत्र था। हमें आजादी के नाम पर विभाजित भारत मिला। आजादी के तुरंत बाद सन १९४८ में पाकिस्तान ने हम पर हमला किया। हमारी हजारों किलामीटर जमीन पाकिस्तान के अधीन हो गई और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का जन्म हुआ।

देश ने लगातार युद्ध देखे
कैप्टन उम्मेदसिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि इस देश ने बाद में १९६२,१९६५ और १९७१ के लगातार युद्ध देखे। उसका परिणाम हम सब झेल रहे हैं। यह सब १८३५ से शुरू हुआ। देश निरंतर खंडित होता रहा। सन १८३५ में अंग्रेजों ने संधि कर के अलग राष्ट्र बना दिया। इसी प्रकार नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यान्मार व श्रीलंका भारत से अलग राष्ट्र हो गए।

छोटे-छोटे देश हमें आंख दिखाने लगे

उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो हमारे देश का क्षेत्रफल २३ लाख ९ हजार वर्ग किलोमीटर था, जो सन २०१२ में ३ लाख वर्ग किलोमीटर रह गया। यानी हमने समय समय पर आज तक एक लाख ८७ हजार वर्ग किलोमीटर जमीन दूसरों को दे दी। हमसे अलग हुए छोटे-छोटे देश हमें आंख दिखाने लगे। यह सब हमारी फूट का परिणाम है। इसलिए मेरा देशवासियों से कहना है कि आप सुधर जाएं, देश अपने आप सुधर जाएगा।