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भोरमदेव महोत्सव में बिखरेगी लोककला की छटा

आज देश-विदेश में भोरमदेव और महोत्सव को पहचान मिल चुकी है

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Chandu Nirmalkar

Apr 04, 2016

Bhoramdev Festival

Bhoramdev Festival

कबीरधाम.
छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से विख्यात और ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व को अपने में समेटे भोरमदेव मंदिर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ही 21 वर्ष पहले भोरमदेव महोत्सव की शुरुआत की गई। आज देश-विदेश में भोरमदेव और महोत्सव को पहचान मिल चुकी है।


भोरमदेव मंदिर व भोरमदेव महोत्सव को अब किसी पहचान की आवश्यकता नहीं। भोरमदेव 22 वां महोत्सव मनाने जा रहा है। दो दिवसीय भोरमदेव महोत्सव 4 व 5 अप्रैल को आयेाजित है। स्थानीय छत्तीसगढ़ी लोककला के साथ बॉलीवुड की भी छवि दिखाई देगी।


भोरमदेव महोत्सव की शुरुआत 21 वर्ष पूर्व 1995 में प्रारंभ किया गया। तत्कालीन जिला प्रशासन द्वारा एकदिवसीय भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया गया। इस समय कवर्धा अविभाजित मध्यप्रदेश के राजनांदगांव जिले का एक तहसील था।


वनांचल की संस्कृति, कला व लोकरंग को दूर-दूर तक प्रचारित करने और वनांचलवासियों के खुशियों के प्रतीक भोरमदेव को पहचान देने के लिए महोत्सव का आयोजन किया गया। धीरे-धीरे महोत्सव के प्रति लोगों की रुचि बढऩे लगी और ख्याति प्राप्त कलाकारों ने इस मंच से प्रस्तुति देकर महोत्सव को नई ऊंचाईयां दी। आज यह महोत्सव राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बना चुका है।



भोरमदेव महोत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। इसमें भजन सम्राट अनूप जलोटा, प्रख्यात पाश्र्व गायिका अनुराधा पौडवाल, सुरेश वाडेकर, विनोद राठौर, मोहम्मद अजीज, पंकज उधास, साधना सरगम, उदित नारायण, अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन, अलका यागनिक, सुमेधा कर्महे, हंसराज हंस, बप्पी लहरी, अभिजीत भट्टाचार्य महोत्सव में अपने रंग बिखेर चुके हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोकनृत्य व अन्य कलाकारों में तीजन बाई, डॉ. मांडवी सिंह, भजन गायक पं. सुरेश दुबे, वासंती वैष्णव, पूर्णाश्री राउत, अनुराधा दुबे, यास्मिन सिंह, कविता वासनिक, अलका चन्द्राकर, दुकालू यादव, लक्ष्मण मस्तुरिया आदि एक से बढ़कर एक कलाकारों ने अब तक अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।


घटा दिया समय

भोरमदेव महोत्सव का आयोजन लोकोत्सव के रूप में किया जाता है, ताकि वनांचल के लोग इसका भरपूर आनंद ले सके। इस बीच आयोजन समिति और जिला प्रशासन द्वारा कुछ ऐसे निर्णय लिए जाते हैं जो लोगों को निराश कर देते हैं। इस बार ही आयोजन को तीन दिन से घटाकर दो दिनों का कर दिया गया, क्योंकि अफसरों का कहना है उन्हें परेशानी होती है। इसका विरोध भी हुआ, लेकिन अफसरों के आगे की किसकी चली। यह स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब आयोजन को ही बंद करने के लिए कह दिया जाए।


ऐसे बनी महोत्सव की योजना

कवर्धा जिस समय राजनांदगांव जिला अंतर्गत तहसील था उस समय तत्कालीन राजनांदगांव कलक्टर अनिल जैन द्वारा भोरमदेव मेला को महोत्सव के रूप में तैयार करने की योजना बनाई गई। महोत्सव को भोरमदेव के नाम से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।


संगीत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मंच के साजो-सज्जा की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही महोत्सव के लिए एक मोनो भी तैयार किया। प्रथम महोत्सव के लाइट, टेंट, माइक आदि की व्यवस्था राजनांदगांव से की ही की गई। क्योंकि कवर्धा में यह सुविधा नहीं थी। यह महोत्सव अब विशाल रुप ले लिया है।


वर्ष 2005 से बदली रूपरेखा

भोरमदेव महोत्सव का प्रथम आयोजन 29 मार्च 1995 को किया गया। इस समय खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति हाफिज अहमद खां, अभयनारायण मलिक, मधुकर आनंद, कथक कलाकार डॉ. मांडवी सिंह, भजन गायक सुरेश दुबे आदि कलाकारों ने नि:शुल्क कार्यक्रम प्रस्तुति किया था।


वर्ष 2004 तक स्थानीय व प्रादेशिक स्तर के कलाकार ही मंच की शोभा बढ़ाते रहे। वर्ष 2005 से भोरमदेव महोत्सव को नया रूप दिया गया। इसी वर्ष से दिन तीन दिवसीय महोत्सव की शुरुआत हुई। लेकिन 2016 में फिर से दो दिवसीय आयोजन कर दिया गया है।


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साधना सरगम की प्रस्तुति आज

4 अप्रैल से प्रारंभ होने वाले महोत्सव के पहले दिन सायं 4.30 बजे से स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुवात होगी। मुम्बई के ख्याति प्राप्त गायिका साधना सरगम अपने सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा पूर्णश्री राउत द्वारा ओडिसी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति होगी।


वहीं छत्तीसगढ़ के भजन सम्राट प्रभंजय चतुर्वेदी द्वारा भक्तिगीतों और भजन की प्रस्तुति देंगे। साथ ही छत्तीसगढ़ी गायिका कविता वासनिक द्वारा लोक संगीत की प्रस्तुति होगी और नृत्यांगना लवली राय द्वारा कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। मदन चौहान तबला वादन के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देंगे। वहीं रूचिता तिवारी कत्थक नृत्य और चरण यादव बांस गीत की आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रगुग्ध करेंगे।