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लाखों रुपए की सैलरी को ठुकराया, अब मशरूम की खेती से हासिल किया ये मुकाम

इस युवक के हौंसले से आप भी जरूर प्रभावित होंगे। इस शख्स ने मोटी सैलरी वाली नौकरी को ठुकराकर मशरूम की खेती में करियर बनाना ज्यादा बेहतर समझा।

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Mushroom farming

लाखों रुपए की सैलरी को ठुकराया, अब मशरूम की खेती से हासिल किया ये मुकाम

कांकेर. इस युवक के हौंसले से आप भी जरूर प्रभावित होंगे। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के सोमेश कुमार साहू ने नामी कंपनियों में लाखों रुपए प्रतिमाह की सैलरी वाली नौकरी को ठुकराकर मशरूम की खेती में कॅरियर बनाना ज्यादा बेहतर समझा। दरअसल, सोमेश पिछले दो साल से बड़े पैमाने पर मशरूम की खेती कर रहा है, साथ में गांव के लोगों को रोजगार भी दे रहा है। आइए जानते उनके सफलता की पूरी कहानी -

ये है सफलता की पूरी कहानी
शहर से सटे कोड़ेजुंगा के रहने वाले सोमेश ने एमबीए की पढ़ाई के बाद कई नामी कंपनियों में मैनेजर की नौकरी ठुकरा दिया। खेती में कॅरियर की उड़ान भरने का सपना संयोए दो साल से मशरूम की खेती कर रहा है। पत्रिका को सोमेश ने बताया कि नौकर बनकर कहीं काम करना उसे पंसद नहीं है। एमबीए के बाद नौकरी के बजाय वह खेती को ही कॅरियर के रूप में चयन किया।

दो साल पहले प्रथम चरण में मात्र 50 थैले से पहली बार मशरूम की खेती करना प्रारंभ किया। एक-एक माह में फसल को दो गुना करते चलता गया। अब सैकड़ों थैलों से मशरूम का उत्पादन कर रहा है। लोकल बाजार में भी दो सौ रुपए प्रति किलो मशरूम की मांग है। जबकि बड़े शहरों में 4 सौ रुपए प्रति किलो तक अलग-अलग क्वालिटी में सेल होता है।

सोमेश ने बताया कि मशरूम की खेती करना बहुत ही आसान है। इस खेती में किसान को 75 फीसदी से अधिक का मुनाफा है। झोपड़ी या छप्पर का घर बनाकर मशरूम की खेती से किसान लाखों की बचत कर सकता है। छोटे किसान पेड़ के नीचे भी मशरूम की खेती में हाथ आजमा सकते हैं। कम जगह में अधिक उत्पादन देने वाली मशरूम एक मात्र खेती है।

इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी और एमबीए
सोमेश के पिता हाईस्कूल में प्राचार्य और माता मितानीन हैं। तीन साल पहले धमतरी जिले से इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी एवं एचआर में एमबीए की डिग्री लेने के बाद बड़े शहरों के उसे जॉब मिल रही थी। सोमेश ने घर से बाहर न जाकर कौशल विकास केंद्र से खेती का प्रशिक्षण लेने के साथ-साथ किसानों से मशरूम की खेती के बारे जानकारी ली। कॉपसी में किसानों की खेती से प्रभावित होकर बड़े पैमाने पर खेती करने का बीड़ा उठाया। दो साल में वह सैकड़ों लोगों को रोजगार देकर लाखों की बचत कर चुका है।

एक थैले पर 120 रुपए से अधिक का मुनाफा
सोमेश ने बताया कि पॉलीथिन में एक थैला भूसा, बीज, पानी एवं रखरखाव तक 40 से 45 रुपए खर्च आता है। 25 से 45 दिन के अंदर एक थैले से 750 ग्राम से अधिक मशरूम का उत्पादन होता है। मशरूम का बीज 140 रुपए प्रति किलो की दर से वह रायपुर से क्रय कर लाता है। इसके साथ-साथ सोमेश अब जैविक खेती उत्पाद सामग्री पर जोर दे रहा है। मशरूम उत्पादन के बाद जो कचरा निकल रहा है उससे वर्मीकम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा है, उसकी पैकिंग तैयार कर अब बाजार में बिक्री करेगा।