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आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को परोसी जा रही कीड़े लगी दाल, निरीक्षण में खुली पोल… जानें अधिकारी ने क्या कहा?

महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण में अनियमितताएं अब गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं।

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बच्चों को परोसी जा रही कीड़े लगी दाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

बच्चों को परोसी जा रही कीड़े लगी दाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण में अनियमितताएं अब गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। कई केंद्रों में बच्चों को परोसा जा रहा भोजन न केवल गुणवत्ताहीन है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रहा है।

जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों में वर्षों से बच्चों को सोयाबीन की बड़ी, कीड़े लगी दाल, आलू और खराब चावल परोसे जा रहे हैं। ग्राम पंचायत बोंदानार के हवेचूर और हीमोडा के दो केंद्रों में निरीक्षण में यह स्थिति सामने आई। सहायिकाओं का कहना है कि सप्लायर केवल दाल, आलू और थोड़ा तेल ही छोड़कर चला जाता है और सामग्री की शिकायत के बावजूद सुधार नहीं हुआ। मजबूरी में सहायिकाओं को वही खाना बच्चों को परोसना पड़ता है, जिसे वे स्वयं नहीं खातीं।

कुल मिलाकर, अंतागढ़ परियोजना क्षेत्र में वर्षों से बनी यह स्थिति भ्रष्टाचार, उपेक्षा और निगरानी की कमी का परिणाम मानी जा रही है। ग्रामीण अब विभाग से शीघ्र कार्रवाई (CG News) की उम्मीद कर रहे हैं।

अधूरी और जर्जर सुविधाएं

ग्राम पंचायत हीमोडा में आंगनबाड़ी केंद्र पक्का भवन में नहीं है। एक केंद्र सामुदायिक भवन और दूसरा गोटूल में संचालित है। जर्जर भवनों की मरम्मत पर ध्यान देने के बजाय रंगाई-पुताई और चित्रकारी पर लाखों रुपये खर्च किए गए। लगभग 75 प्रतिशत केंद्र बच्चों के बैठने लायक नहीं हैं। कई केंद्रों में बारिश में छत से पानी टपकता है, बाउंड्रीवाल न होने के कारण कुत्ते और सूअर बच्चों के बर्तनों तक पहुंच जाते हैं।

विभाग की प्रतिक्रिया

वहीं इस मामले में बाल विकास अधिकारी जागेश्वर परते ने कहा कि इस विषय में जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि खराब सामग्री कैसे और कौन प्रदान कर रहा है।

गर्भवती महिलाओं की पोषण समस्याएं

पूर्ववर्ती सरकार द्वारा स्वीकृत खाद्य चार्ट के अनुसार गर्भवती महिलाओं को पोषण सामग्री मिलनी चाहिए थी, लेकिन अब उन्हें केवल रेडी-टू-ईट पैकेट ही दिए जा रहे हैं। हरी सब्जी और आवश्यक पोषण सामग्री लंबा समय से उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों में इस कमी को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है।