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मछली पालन विभाग का कारनामा, 3 भाइयों समेत 4 लोगों को अफसरों ने बांट दिए 1.44 करोड़ रुपए

सूचना के अधिकार प्राप्त दस्तावेज में छत्तीसगढ़ राजपत्र में साफ-साफ प्रकाशित है कि खनिज न्यास निधि प्रभावित और उस क्षेत्र के व्यक्ति को अनुदान में दी जा सकती है। अन्य क्षेत्र में खनिज न्यास निधि का न तो उपयोग हो सकता और न ही अनुदान किसी को मिलेगा। शासन के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद भी कांकेर में नियम कानून को तक पर रख अधिकारियों ने दूसरे जिले के लोगों को लाखों रुपए अनुदान बांट दिया है।

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मछली पालन विभाग का कारनामा, 3 भाइयों समेत 4 लोगों को अफसरों ने बांट दिए 1.44 करोड़ रुपए

मछली पालन विभाग का कारनामा, 3 भाइयों समेत 4 लोगों को अफसरों ने बांट दिए 1.44 करोड़ रुपए

एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों समेत उन्हीं के एक रिश्तेदार को मछली पालन विभाग ने 86 लाख रुपए डीएमएफ और विभागीय मद से 58 लाख का दुधावा डेम में केज कल्चर के लिए अनुदान देने का मामला समाने आ रहा है। जबकि डीएमएफ मद एवं अन्य मद से किसी भी व्यक्ति को अनुदान देने का प्रावधान नहीं बताया जा रहा है। जानकार बता रहे कि अफसरों ने सफेदपोशों के दबाव में इस तरह का खुला खेल खेला है। मछली पालन विभाग ने खनिज न्यास निधि से 86 लाख रुपए गलत ढंग से केज कल्चर के लिए अनुदान एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों और उन्हें के चौथे रिश्तेदार को बांट दिया है। चाराें न तो खनिज प्रभावित और न उस क्षेत्र के निवासी व्यक्ति हैं। तीन सगे भाई नगरी क्षेत्र धमतरी के निवासी तो चौथा व्यक्ति कांकेर शहर का रहने वाला है। विभागीय मद 58 लाख समेत 1.44 करोड़ अनुदान दे दिया।

सूचना के अधिकार प्राप्त दस्तावेज में छत्तीसगढ़ राजपत्र में साफ-साफ प्रकाशित है कि खनिज न्यास निधि प्रभावित और उस क्षेत्र के व्यक्ति को अनुदान में दी जा सकती है। अन्य क्षेत्र में खनिज न्यास निधि का न तो उपयोग हो सकता और न ही अनुदान किसी को मिलेगा। शासन के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद भी कांकेर में नियम कानून को तक पर रख अधिकारियों ने दूसरे जिले के लोगों को लाखों रुपए अनुदान बांट दिया है। मछली पालन विभाग के अधिकारियों ने दुधावा डेम में केज कल्चर के लिए जिन्हें 86 लाख रुपए का अनुदान दिया वह न तो प्रभावित हैं और न ही प्रभावित क्षेत्र के हैं। अनुदान पाने वालों में तीना सगे भाई और तीनों धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के निवासी हैं। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद भी एक ही परिवार के तीनों भाइयों को अनुदान बांट दिया गया है। चौथा व्यक्ति कांकेर शहर का निवासी है और उन्हीं का रिश्तेदार बताया जा रहा है। केज कल्चर के अनुदान से न तो गरीबों को किसी प्रकार का लाभ हो रहा और न ही मछली पालन कांकेर सीमा में हो रहा है। दुधावा डेम पूरा का पूरा धमतरी सीमा में है। दुधावा डेम की देखरेख आज भी धमतरी जल संसाधन विभाग करता है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि जब छग राजपत्र में प्रभावित व्यक्ति और प्रभावित क्षेत्र में खनिज न्यास निधि का उपयोग किया जाना था तो कैसे अनुदान दूसरों को बांट दिया गया? उच्चाधिकारी कुछ नहीं बोल रहे हैं। बस यही बता रहे तत्कालीन कलेक्टरों ने मंजूरी दी थी।

विभागीय मद से भी 58 लाख रु. अनुदान
एक ही मद से नहीं बल्कि तीनों सगे भाइयों को अफसरों ने 86 लाख के अलावा 58 लाख रुपए का अनुदान विभागीय मद से भी दिया है। यानी 1.44 करोड़ रुपए का अनुदान मछली पालन विभाग ने एक ही परिवार के लोगों को बांट दिया है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि समृद्धि लोगों को अनुदान देने में आखिर कौन सा दबाव असफरों पर था। दुधाव डेम में केज कल्चर हो मछली पालन में कौन कौन से किसानों की आय में इजाफा हो रहा है।

अधिकारियों की दलील, नियम अनुसार अनुदान
केज कल्चर के लिए अनुदान देने वाले दलील दे रहे कि नियम का पालन किया गया है। जिस कंडिका का हवाले दे रहे उममें लिखा है कि शासकीय परिषद द्वारा अनुमोदित कार्यों के लिए खनिज न्यास निधि मजूंरी समिति के पदेन अध्यक्ष द्वारा जारी किया जाएगा। पदेन अध्यक्ष प्रभारी मंत्री, कलेक्टर और जिले के विधायक होंगे। विभाग के अधिकारी कह रहे-केज कल्चर में क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल रहा है।

इन चार लोगों को मत्स्य विभाग ने बांटा अनुदान
सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेजों के आधार पर दुधावा डेम धमतरी क्षेत्र में केज कल्चर विधि से मछली पालन किया जा रहा है। नगरी निवासी तीन सगे भाई इमरान खान, आमीर खान, इरशाद खान पिता अब्दुल जब्बार खान और शेख हिदायत उल्ला पिता शेख विलायत उल्ला निवासी कांकेर शहर को अनुदान दिया गया है। दुधावा डेम न तो खनिज प्रभावित क्षेत्र है और न ही अनुदान पाने वाले प्रभावित क्षेत्र के निवासी हैं।

दस्तावेज में दुधावा क्षेत्र के नाम पर चली फाइल
एक कल्चर पर 3-3 लाख रुपए का अनुदान बांटा गया है। अगर तीन-तीन लाख रुपए की दर से 48 परिवारों को मछली पालन विभाग अनुदान जारी करता तो गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो जाता पर ऐसा नहीं किया गया। कहीं न कहीं शासन के नियम कानून को तक पर रखकर चाराें को उपकृत करने के लिए अनुदान जारी किया गया है। यह मामला अब तूल पकड़ सकता है। मछली पालन करने वाले दूसरे जिले के निवासी है।

केज कल्चर में गलत ढंग से खनिज न्यास निधि का अनुदान जारी किया गया है। अनुदान प्राप्त करता न तो प्रभावित क्षेत्र और न ही प्रभावित व्यक्ति हैं, शिकायत होगी।
- सुनील गोस्वामी, वरिष्ट अधिवक्ता कांकेर.