
कांकेर/लखनपुरी. क्षेत्र के ग्राम अरौद पहाडिय़ों पर वन्य जीव जंतुओं ने अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है। शाम होते ही इन वन्य प्राणियों की धमक गांव के नजदीक लोगों की बाडिय़ों तक होती है। इसके चलते देर रात्रि होते ही लोग अपने अपने आशियाने में दुबक जाते हैं।
यूं तो अरौद की पहाडिय़ों में जंगली भालुओं का मुख्य रहवास है, लेकिन अब तेंदुए भी जोगी गुंडरा सहित रिजर्व फारेस्ट स्थित छोटी पहाडिय़ों के पत्थरों की खोह में रहने लगे हैं। कई बार ये तेंदुए मुर्गे-मुर्गियों को ग्रास बनाते आ रहे हैं, लेकिन इस बार 13 मार्च को जोगी गुंडरा पहाड़ में कोटेला निवासी एक किसान के गाय को ही निवाला बना लिया।
बता दें कि ग्राम अरौद बडेपारा में पुराने कोटेला आवाजाही मार्ग पर मनरेगा कार्य चल रहा है। 13 मार्च को अपरान्ह काम चल रहा था तभी कई कुत्तों के भौंकने की आवाज आयी। नजदीक होने से तेंदुआ भी नजर आने लगा जिसने गाय को अपना शिकार बना लिया। इसे देखने मजदूरों की भींड़ एकत्र हो गयी। देर शाम तेंदुआ इस जगह से दूर चला गया।
इस संबंध में फारेस्ट चारामा के डिप्टी रेंजर गणेश नेताम से बात हुई जहां उन्होंने पत्रिका को बताया कि वन रक्षक समिति के अध्यक्ष द्वारा फोन से जानकारी मिला है। जहां गार्ड को पीडि़त किसान से आवेदन प्राप्त करने कहा है। वहीं फारेस्ट चारामा के रेंजर सीएल.नाग ने बताया कि वे इस समय लोक सुराज शिविर कुर्रुभाट में है तथा इस घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।ख़बरों के मुताबिक यहां पर दो नर एव दो मादा ,दो बच्चे तेंदुए को यहां देखा गया है।
इस घटना के बाद गांव में लोग दहशत में और अब कोई भी ग्रामीण पहाड़ी के आस पास काम करने जाने को तैयार नहीं हो रहा है। ग्रामीण तेंदुए के डर से अपने बच्चों को अब ज्यादा देर तक बाहर खेलने या घूमने नहीं देते।
Published on:
15 Mar 2018 11:17 am
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