19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आदिवासी युवाओं में दिखा आक्रोश, कहा- बंद करें नक्सली बताकर गोली मारना

बस्तर संभाग में कथित रूप से पुलिस उत्पीडऩ के खिलाफ आदिवासी समाज के छात्र-छात्राओं ने एकजुटता दिखाते हुए नरहरदेव मैदान से रैली निकाली इस दौरान युवाओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की

2 min read
Google source verification

image

Chandu Nirmalkar

Oct 03, 2016

The tribal youth show anger

The tribal youth show anger

कांकेर.
बस्तर संभाग में कथित रूप से पुलिस उत्पीडऩ के खिलाफ आदिवासी समाज के छात्र-छात्राओं ने एकजुटता दिखाते हुए नरहरदेव मैदान से रैली निकाली इस दौरान युवाओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। युवाओं के आक्रोश देखते हुए पुलिस भी पहले से सतर्क थी और उन्हें नगर पालिका के सामने बैरिकेटिंग लगाकर रोक लिया गया। वहीं पहुंचकर एसडीएम रेणुका श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम संबोधित युवाओं का ज्ञापन लिया। ज्ञापन लेने के बाद उन्होंने बताया कि इसे आज ही राज्यपाल को भेज दिया जाएगा।


रैली के रूप में आगे बढ़ रहे छात्र पुलिस प्रशासन और बस्तर आईजी शिवप्रसाद कल्लुरी के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ ही आदिवासी समाज के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अत्याचार बंद करने की मांग की। वहीं छात्राएं विरोधात्मक नारे लिखे तख्तियां लेकर जुलूस में मौजूद थी।


गौरतलब है की 23 सितम्बर को बस्तर थाना बुरगुम अन्र्तगत सांगवेल में दो छात्र सोनलूराम और सोमडू को कथित रूप से नक्सली करार देते हुए गोली मार दी गई, रैली में शामिल युवकों का कहना था की दोनों युवक एक शोक संदेश लेकर अपने बुआ के घर सांगवेल गए हुए थे। रैली के शक्ल में ज्ञापन देने निकले छात्रों में शहर के पीएमटी छात्रावास के अन्त:वासियों के अलावा कन्या पीएमटी, आदिवासी छात्र संगठन, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के युवा कार्यकर्ता शामिल थे। आदिवासी छात्र संगठन से लोकेश कुजांम, योसीन कुरेटी, अनमोल मंडावी, सुबोध ध्रुव, अंकित पोटाई के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष हेमलाल मरकाम आदि मौजूद थे।


आदिवासी युवाओं की प्रमुख मांग

1. छात्र को मारने की घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग।

2. पुलिस से सुरक्षा की लगाई गुहार।

3. जबरन जेल भेजने की घटना पर रोक लगाने की मांग।

4. बस्तर आई पर हत्या का मामला दर्ज कराई जाय।

6. छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम को वापस लेते हुए जेलों में बंद लोगों को तत्काल रिहा करने की मंाग।

7. नक्सलियों की सूची जिलेवार प्रकाशित करने की मांग प्रशासन से की गई है।

ये भी पढ़ें

image