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करोड़ों की लागत से बनी पीएम सड़क बह गई, गुणवत्ता की खुली पोल

प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ पहली ही बारिश में बह जाने से घटिया निर्माण की पोल खोल दी है।

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करोड़ों की लागत से बनी पीएम सड़क बह गई, गुणवत्ता की खुली पोल

कांकेर. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में करोड़ों की लागत से नरहरपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बांसपत्तर से रावस तक बनी आठ किमी प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ पहली ही बारिश में बह जाने से घटिया निर्माण की पोल खोल दी है। पहाड़ी क्षेत्र में बनी इस सडक़ में मानक की खुली अनदेखी का आरोप पहले भी लग चुका है। पहाड़ पर बिना बेस डाले सडक़ का निर्माण किया गया है जो पहली ही बारिश में विभागीय अफसरों की अनदेखी को स्पष्ट कर दिया है।

रावस गांव एवं आमापानी दुर्गम पहाडिय़ों के बीच में चोटी पर बसा दो गांव है। बांसपत्तर से रावस की दूरी करीब 8 किमी है। पहाड़ी बीच जगह-जगह खतरनाक नदी-नालों को पार करते हुए ग्रामीण डगर पूरी करते थे। पहाड़ की चोटी पर बसे दोनों गांवों तक सुगम सडक़ बनाने के लिए शासन ने प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत 6.27 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था। बांसपत्तर से रावस तक ६ किमी डामर सडक़ का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित था। शेष 2 किमी तक सीसी रोड बनाने की तकनीकी स्वीकृ़ति शासन से मिली है। इस सडक़ पर जगह-जगह कुल 14 पुल-पुलियों का निर्माण भी कराया जाना था, जो अभी तक पूरा नहीं होना बताया जा रहा है।

फॉरेस्ट हद में बन रही सडक़ में पहाड़ की तरफ मलबा को रोकने के लिए न तो बेस बनाया गया न ही पहाड़ी से गिरने वाले पानी को डायवर्ड करने के लिए नालियों का निर्माण कराया गया। बारिश का पानी जैसे से पहाड़ से नीचे उतर रहा वैसे ही सडक़ को बहा ले जा रहा है। जगह-जगह आधी सडक़ पहली ही बारिश में बह गई है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ की निगरानी करने वाले विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी से सडक़ नष्ट होने लगी है। जबकि पत्रिका ने अपने आंचलिक अंक में 2 अगस्त 2017 को ही घटिया सडक़ निर्माण की खबर प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से करोड़ों के बजट से बनी सडक़ एक साल में ही टूटने लगी है। पीएम सडक़ निर्माण एजेंसी के तौर पर निगरानी करने वाले अफसरों की सिर्फ एक दलील है कि सडक़ पांच साल की गारंटी में हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा कि गारंटी की आड़ में घटिया निर्माण पर पर्दा डाल रहे हैं।

करोड़ों के बजट से बनी इस सडक़ में जंगल से अवैध मुरुम और गिट्टी को डाला गया है। पहाड़ी क्षेत्र में बनने वाली सडक़ निर्माण में नियम निर्देशों की जमकर अनदेखी की गई है। पहाड़ से निकली मिट्टी को बाहर फेंकना था जिसे निर्माण एजेंसी ने सडक़ पर डाल दिया। उस मिट्टी पर पहाड़ी से खोदकर निकाली गिट्टी को डाला गया और उसी पर डामर का लेयर चढ़ा दिया गया है। बारिश से मिट्टी गिली होने से ढंसने लगी है। जबकि पहाड़ी सडक़ पर मिट्टी और रेत का उपयोग ही नहीं किया जाना है। समय रहते इस सडक़ को ठीक नहीं कराया गया तो एक दो साल में पूरी सडक़ चलने लायक नहीं रहेगी। जिम्मेदारों की अनदेखी और ठेकेदार की मनमानी से निर्माण कार्य में भर्राशाही की पोल बारिश ने अब खोल दिया है।

करोड़ों के बजट से बनी इस सडक़ में जंगल से अवैध मुरुम और गिट्टी को डाला गया है। पहाड़ी क्षेत्र में बनने वाली सडक़ निर्माण में नियम निर्देशों की जमकर अनदेखी की गई है।