28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के काष्ठ कलाकार अजय मंडावी को पद्मश्री से किया सम्मानित, 40 साल की मेहनत लाई रंग

Ajay Mandavi Kanker: अपनी काष्ठ कला से जेल में बंद करीब 400 नक्सली और कैदियों की विचारधारा बदलने वाले अजय मंडावी को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में वर्ष 2023 के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

3 min read
Google source verification
राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के काष्ठ कलाकार अजय मंडावी को पद्मश्री से किया सम्मानित

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के काष्ठ कलाकार अजय मंडावी को पद्मश्री से किया सम्मानित

Ajay Mandavi Kanker: अपनी काष्ठ कला से जेल में बंद करीब 400 नक्सली और कैदियों की विचारधारा बदलने वाले अजय मंडावी(Wood Artist Ajay Mandavi) को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में वर्ष 2023 के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। 40 साल की कड़ी मेहनत के बाद उनके कला को सम्मान मिला है। कांकेर और छत्तीसगढ़ राज्य गौरवान्वित हुआ है। अजय मंडावी इस समय दिल्ली में हैं। वे 8 अप्रैल को कांकेर पहुंचेंगे।

पद्श्री अवार्ड से सम्मानित अजय मंडावी(Wood Artist Ajay Mandavi) ने बताया कि उनके पिता आरपी मंडावी गणेश भगवान की प्रतिमा बनाते थे। माता सरोज मंडावी पिता का सहयोग करती थीं। बचपन में माता पिता को गणेश प्रतिमा बनाते देख उनके मन में भी कला के प्रति प्रेम जागा तो वह लकड़ी या काष्ठ से खिलौना बनाना शुरू कर दिया। इस बीच स्नातक की शिक्षा भी पूरी कर ली और जनपद पंचायत में नौकरी मिली तो लकड़ी की कला को गति देना शुरू कर दिया।

यह भी पढ़ें: #DrugAddiction: नशे में सही-गलत का फर्क भूल रहे युवा, हर माह पहुंच रहे हैं अस्पताल

काष्ठ कला में सबसे पहले उन्हें प्रदेश स्तर का पुरस्कार वर्ष 2006 में मिला। वर्ष 2007 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाया। वर्ष 2008 में चित्रकूट में पुरस्कार मिला। अजय मंडावी(Wood Artist Ajay Mandavi) ने कहा कि वर्ष 2010 से जेल में बंद कैदियों को काष्ठ कला का प्रशिक्षण दे रहे हैं। जेल में बंद 250 नक्सली और 150 अन्य कैदियों को वह लकड़ी की कला में अब तक प्रशिक्षण दे चुके हैं। हर दिन वह कैदियों को प्रशिक्षण देने के बाद जनपद पंचायत में ड्यूटी करते हैं।

प्रशिक्षण लेने वाले लगभग सभी कैदी जेल से छूट गए हैं और काष्ठ काल में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 40 साल की कड़ी मेहनत के बाद अब उन्हें उनकी कला को सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने के बाद जो लोग अपने घर नहीं गए वह उनके घर पर कला केंद्र में आज भी लकड़ी की कला से अलग अलग आकृति बना रहे हैं। परिवार की तरह रहते हैं।

यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ में कोरोना ने पकड़ी रफ़्तार: एक ही दिन में मिले 102 मरीज, सबसे ज्यादा इस जिले में

उन्होंने कहा कि उनकी एक छोटी से काष्ठ शिल्प कला से 400 लोगों के जीवन में बदलाव आया है। लकड़ी की अद्भुत कला से वह युवाओं को आज भी लगातार जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले जिन युवाओं के हाथों में बंदूक थी आज वह काष्ठ कला में काम कर रहे हैं। लकड़ी की कलाकारी करते हुए बाइबल, भगवत गीता, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान प्रसिद्ध कवियों की रचनाएं को वह लकड़ी पर उकेरने का काम किया है। वैसे तो अजय कुमार मंडावी का पूरा परिवार किसी न किसी कला से जुड़ा है। कहीं न कहीं उन्हें यह कला विरासत में मिली है। चार सौ बंदी काष्ठ कला में पारंगत हो चुके हैं। मंडावी ने कहा कि काष्ठ कला ने बंदी नक्सलियों के विचारों को बदल दिया है।

कुपोषित बच्चों के लिए 65 हजार किया दान
अजय कुमार मंडावी(Wood Artist Ajay Mandavi) ने कहा कि काष्ठ कलाकृतियों के विक्रय से कुछ आमदनी होती है। उक्त आमदनी में से 10 प्रतिशत राशि वह कुपोषित बच्चों के लिए दान करते हैं। उन्होंने बताया कि अंतागढ़ में जीवन दीप समिति को वह 45 हजार 750 रुपए और भानुप्रतापपुर ब्लॉक के हाटकर्रा में वह 21 हजार रुपए दान के रूप में दिया है। उन्होंने कहा कि जहां उनका निवास स्थान है। कुछ दूरी पर पहाड़ी है। पास में उनका फार्म हाउस है। उस फार्म हाउस में एक छोटी सी जगह में वह लकड़ी से न्यू कलाकृतियों को नया रूप देते हैं। यहां पक्षियों का कलवर उन्हें अच्छा लगता है।