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Kannauj News: 5 दिन से लापता था विजय, ऐसी हाल में मिला परिवार वाले देखकर रह गए दंग

कन्नौज में एक घर में कई दिनों से एक लड़का मरा हुआ पड़ा था। जब बदबू आई तो परिवार ने पुलिस को बुलाया।

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विजय के शव को उठाती पुलिस

कन्नौज में तीन मंजिला मकान में परिवार के साथ रह रहा विजय घर में मृत पाया गया। उसकी बॉडी इतनी सड़ चुकी थी कि दूर-दूर तक बदबू आने लगी थी। उसका शरीर गलने लगा था वहीं, उसके शरीर में किड़े भी पड़ने लगे थे।

विजय अपनी दो बहनों और 1 भाई के साथ तीन फ्लोर के घर में अकेला रहता था। वह अपने कमरे में अकेला रहता था उसकी जिंदगी उसी कमरे में सिमट कर रह गई थी। घर में रहने वाले सदस्यों को उससे कोई मतलब नहीं था। यही वजह रही कि 5 दिन तक उसकी मौत की भनक किसी को नहीं लगी।

पेट के बल पड़ा मिला शव
शव सड़ जाने के बाद दुर्गंध फैली,तो अनहोनी की आशंका हुई। परिवार ने पुलिस बुलाकर दरवाजा खुलवाया, तो विजय दुनिया छोड़ चुका था। मकान के जिस कमरे को विजय ने दुनिया बना रखा था, उसी में उसका शव पड़ा मिला। वह बिस्तर पर पेट के बल लेटा हुआ था। शरीर पर कंबल पड़ा था। पास ही रखे स्टूल पर मोबाइल थे। बेड के नीचे पैर की साइड में फर्श पर खून पड़ा था। नीचे टीवी का रिमोट कंट्रोल भी गिरा था।

कुछ लोग कलाई की नस काटने को मौत की वजह बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि उसने कोई दवा खा ली होगी। हाथ की नस कटी होती, तो खून बेड के पास सिर वाले हिस्से के आसपास होता। कंबल पड़ा होने से मालूम हो रहा था कि वह सो रहा है। कंबल हटाते ही उसका गला हुआ शव मिला, जिसमें कीड़े रेंग रहे थे।

विजय ने कमरे को बना लिया था अपनी दुनिया
विजय का कमरा ही उसकी दुनिया थी। वह पूरे-पूरे दिन उसी कमरे में रहता था। कई बार तो कई-कई दिन तक कमरे से बाहर नहीं निकलता था। ऐसे में इस बार भी जब वह कई दिन तक बाहर नहीं निकला, तो किसी का ध्यान नहीं गया। यहां तक की उसके पास किसी को फोन भी नहीं आया।

काले बोरे में बंद विजय का शव IMAGE CREDIT:

ताज्जुब की बात यह भी है कि मोबाइल के दौर में किसी रिश्तेदार ने भी उसे फोन नहीं किया। विजय के पिता रामप्रकाश व्यास शहर की गैस एजेंसी में काम करते थे वह शहर के नामचीन लोगों में से एक थे। उनका शहर में काफी रसूख था।

शिवम अकेले तीसरी मंजिर पर रहता था
रामप्रकाश व्यास का परिवार भी संपन्न है। जब रामप्रकाश का निधन हुआ तो पूरा परिवार सदमे में आ गया। उनकी चार बेटियां और दो बेटे हैं। एक बेटी की शादी उन्होंने अपने हाथों से की, जबकि दूसरी बेटी की शादी उनकी मौत के बाद हुई। दो बेटों विजय, शिवम और दो बेटियों अलीशा और पूजा की शादी अभी नहीं हुई।

विजय, शिवम, अलीशा और पूजा अब इसी घर में रहते हैं। तीन मंजिला मकान के ग्राउंड फ्लोर की दुकानें किराए पर उठी हुई हैं। पहली मंजिल पर बहनें रहती हैं। विजय दूसरी मंजिल पर रहता था। ऊपरी मंजिल पर घर का सामान है। एक कमरे में कसरत करने का सामान रखा हुआ है।

छोटा भाई शिवम एक दुर्घटना में हो गया था दिव्यांग
पिता की गैस एजेंसी का सारा काम दोनों बेटियां ही करती हैं। विजय अपने पिता के काम से कोई मतलब नहीं रखता था। छोटा भाई शिवम एक हादसे में चोट लगने से दिव्यांग हो गया है। कारोबार में दखल न होने से वह घर में दूसरे भाई-बहन से अलग ही रहता था।

इसी तीन मंजिला घर में रहता था विजय IMAGE CREDIT:

सड़क पर टहलने की थी आदत
आसपास के लोग बताते हैं कि पिता के निधन के बाद से ही विजय अकेला रहने लगा था। वह अक्सर अपने कमरे में ही रहता था। किसी से उसका कोई बात नहीं करता था। कभी कभार बाहर निकलता ,तो शाम को सड़क किनारे टहलता था। इस दौरान भी किसी से बात नहीं करता था।

पांच साल पहले पिता की हुई थी संदिग्ध मौत
यह भी संयोग है कि विजय के पिता और गैस एजेंसी संचालक रामप्रकाश व्यास की भी मौत संदिग्ध हालात में हुई थी। साढ़े पांच साल पहले 2017 के अक्टूबर महीने में उनका शव उनकी गैस एजेंसी के कमरे में खून से लथपथ मिला था। चर्चा थी कि उन्होंने अपने रिवाल्वर से खुदकुशी कर ली।

फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
युवक का शव उसके कमरे में पड़ा होने की जानकारी पर सीओ सिटी डॉ. प्रियंका वाजपेयी पहुंची। सदर कोतवाल राजकुमार सिंह भी अधिकारियों के साथ पहुंच चुके थे। दोनों ने शुरुआती तफ्तीश की। घर में मौजूद बहनों से जानकारी की। बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उसके बाद फोरेंसिक टीम पहुंची और जरूरी साक्ष्य इकट्ठा किए। आगे की जांच चल रही है।

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