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इस आजादी के मतवाले ने ब्रिटिश दरोगा के सीने में दाग दी थी गोली!

स्वतंत्रता सेनानी 102 वर्षीय राम सनेही पांडेय आज भी आजादी की लड़ाई के दिनों को याद करते हैं तो उनके अंदर आजादी का वही सिपाही जाग जाता है।

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Freedom fighter Ram Sanehi Pandey

Freedom fighter Ram Sanehi Pandey

कन्नौज. कन्नौज के तिर्वा कस्बे के इंदिरा नगर निवासी व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 102 वर्षीय राम सनेही पांडेय आज भी आजादी की लड़ाई के दिनों को याद करते हैं तो उनके अंदर आजादी का वही सिपाही फिर जाग जाता है। उनकी मानें तो सर्किल के किसानों से लगान वसूल कर ब्रिटिश शासक मंडी बाजार मोहल्ले में स्थित चौकी पर अनाज को रखा जाता था। चौकी पर हथियारों से लैस सैनिक भी रहते थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने मिलकर चौकी को लूटने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। फरार होने के लिए रिवाल्वर छीनकर दरोगा के सीने पर निशाना लगा दिया, लेकिन गोली उसके हाथ में लग गई थी। आजादी की लड़ाई के मतवालों के साथ रहते-रहते उनके इरादे इतने मजबूत हो गए कि घर परिवार को छोड़कर आजादी के परवाने बन गए। सिर पर कफन बांधकर रोजाना अंग्रेजों से लडऩे की तमन्ना रखने लगे। घर के पास मंडी बाजार में पुलिस की चौकी थी। उस चौकी में किसानों से वसूल किया गया लगान का अनाज भरा हुआ था। किसानों में भूखमरी फैल रही थी।

किसानों ने अनाज लूटने की योजना बनाई। आधी रात को कुछ साथियों के साथ चौकी में राम सनेही पांडेय घुस गए। अनाज लूटने में कामयाब नहीं हो सके। पुलिस ने उनको पकडऩे की कोशिश की तो दरोगा की रिवाल्वर को छीन लिया और उसी के सीने पर गोली चला दी, लेकिन वह उसके हाथ में लगी। इसके बाद डेढ़ वर्ष तक घर से फरार रहे। पुलिस ने साथियों के साथ घर पर 1943 में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हथकड़ी डाली तो उसको तोड़ दिया था। इसके बाद पुलिस ने सभी को कालापानी की सजा सुनाकर फतेहगढ़ जिला जेल में डाल दिया था।

कोड वर्ड से पहुंचाते थे सेनानियों को खाना
डेढ़ वर्ष तक फरार रहने पर ईसन नदी के किनारे ठिकाना हो गया था। कुछ साथ रोजाना खाना लेकर जाते थे। खाना लेने के लिए कोड़ वर्ड भी हो गया था। सात नंबर बोलने पर ही सेनानी सामने आते थे और खाना लेकर फिर से जंगलों में छिप जाते थे।

कुश्ती लडऩे के थे शौकीन
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसेनही पांडेय को बचपन से कुश्ती लडऩे का शौक था। इस कारण सिर पर गुस्सा तेज रहता था और आए दिन अंग्रेजों को पीटकर फरार हो जाते थे। जेल में भी पांडेय ने दो सिपाहियों से मारपीट कर दी थी तो बेडिय़ों में बांधकर डाला गया था। अंधेरी कोठरी में ही रखा जाता था और करीब चार वर्ष की सजा पूरी होने के बाद 1947 में आजादी मिल गई थी।

साथियों को फांसी मिलने पर बढ़ाए थे उनके हौसले
आजादी की लड़ाई में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसनेही पांडेय के साथ में सेनानी कन्हैया लोहार व घासीराम भी शामिल थे। कन्हैया लोहार व घासीराम को फांसी की सजा मिली। इससे दोनों जेल में खूब रोए। इस पर रामसनेही पांडेय ने दोनों से ऊंचे सुर में श्देश पर मरते हो और मौत से डरते हो, कहकर उनके हौसले बढ़ाए थे। देश आजाद होने के बाद सभी को रिहाई मिल गई थी।

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