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Kargil Vijay Diwas : कन्नौज के इस लाल ने तीन दिन तक लिया था कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना से मोर्चा 

Kargil Vijay Diwas- सेना मेडल सम्मान से नवाजे जा चुके पूर्व कैप्टन रवीन्द्र सिंह यादव का मानना है कि आतंकियों के माध्यम से छद्म युद्ध करने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की जरूरत है। 

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Shatrudhan Gupta

Jul 26, 2017

cap ravindra yadav

cap ravindra yadav

कन्नौज. आज भी देश सेवा के लिए दिल में हसरत लिए और दुश्मन से दो-दो हाथ कर धूल चटाने के लिए तैयार हैं कारगिल युद्ध का हिस्सा रहे जिले के तालग्राम ब्लॉक के ग्राम बिराहिमपुर निवासी पूर्व कैप्टन रवीन्द्र सिंह यादव। सेना मेडल सम्मान से नवाजे जा चुके पूर्व कैप्टन रवीन्द्र सिंह यादव का मानना है कि आतंकियों के माध्यम से छद्म युद्ध करने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की जरूरत है।

सामने दुश्मन की गोलियां चल रही थीं...
कैप्टन रवींद्र सिंह यादव की सोच है कि राष्ट्र के सम्मान के लिए हर युवा को आगे बढ़कर सोचना होगा। राष्ट्रहित में युवा सेना में शामिल हों, तभी हमारा देश शक्तिशाली बनेगा और बदलाव की बयार आएगी । कैप्टन की मानें तो 23 जुलाई को कारगिल युद्ध के दौरान वह बटालिक सेक्टर में फौज के साथ वहां पहुंचे ही थे कि अचानक गोली उनकी जांघ पर लगी। बाएं पैर का पंजा भी चोटिल हो गया। ऊंचाई अधिक होने से कोई मदद नहीं मिल पाई। सामने दुश्मन की गोलियां चल रही थीं, इसलिए जान की परवाह किए बिना ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते रहे।

मां से वादा कर गए थे कि गोली सीने में खाएंगे, पीठ पर नहीं
जंग में आगे बढ़ने की ललक कम नहीं हुई। मां से वादा कर गए थे कि गोली सीने में खाएंगे, पीठ पर नहीं। आखिरकार 26 जुलाई 1999 को हमारे साथियों ने कारगिल पर झंडा गाड़ ही दिया। अभी तक युद्ध की यादें उनके जेहन में ताजा हैं। कैप्टन रवीन्द्र सिंह यादव श्रीलंका में दो साल तक विशेष अभियान के तहत वहां तैनात रहे। एक साल तक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगों में सेवाएं दी। इसके साथ सियाचिन ग्लेशियर, जम्मू कश्मीर समेत अन्य इलाकों में भी देश की रक्षा की।

युवा के अंदर देशहित की सोच के साथ देश प्रेम होना चाहिए
उनका मानना हैं कि बार्डर पर जवान हर वक्त जान हथेली पर लिए रहता है। उनका कहना है कि अपने जीवन के 30 साल तक सेना में रहकर हमने देश सेवा की और हर युवा के अंदर देशहित की सोच के साथ देश प्रेम होना चाहिए, तभी हमारा देश निरन्तर शिखर की तरफ बढ़ता रहेगा। उनके मन में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण सेना के खुले मन से काम न कर पाने की टीस भी दिखाई दी।
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