कैप्टन रवींद्र सिंह यादव की सोच है कि राष्ट्र के सम्मान के लिए हर युवा को आगे बढ़कर सोचना होगा। राष्ट्रहित में युवा सेना में शामिल हों, तभी हमारा देश शक्तिशाली बनेगा और बदलाव की बयार आएगी । कैप्टन की मानें तो 23 जुलाई को कारगिल युद्ध के दौरान वह बटालिक सेक्टर में फौज के साथ वहां पहुंचे ही थे कि अचानक गोली उनकी जांघ पर लगी। बाएं पैर का पंजा भी चोटिल हो गया। ऊंचाई अधिक होने से कोई मदद नहीं मिल पाई। सामने दुश्मन की गोलियां चल रही थीं, इसलिए जान की परवाह किए बिना ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते रहे।