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नहीं मिली एंबुलेंस बीमार पत्नी को नौ किमी दूर अस्पताल लेकर ठेली से गया पति

एम्बुलेंस सेवा 108 के ड्राइवर ने दो टूक जबाव दिया कि गांव नहीं आ पाएंगे।  
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कन्नौज

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Ashish Kumar Pandey

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Updated: 4 May 2018, 1:19 PM IST

No ambulance for wife

कन्नौज. जिले में एक फोन कॉल पर घर के दरवाजे पर एम्बुलेंस पहुंचने के दावे की पोल उस समय खुल गई जब एक युवक अपनी बीमार पत्नी को नौ किलोमीटर ठेले पर बीमार पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचा। अचानक बीमार हुई महिला का पति घंटों एंबुलेंस का इंतजार करता रहा। आखिर में पत्नी को बचाने के लिए वह उसे ठेलिया पर लेकर गांव से नौ किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचा। यह हालात देख लोग हतप्रभ रह गए।

कई बार नंबर किया डायल
कन्नौज सदर कोतवाली क्षेत्र के हैबतपुर कटरा निवासी अनुज कुमार दोहरे की छब्बीस बर्षीय पत्नी सोनी की तबियत अचानक बिगड़ गई। इस पर उसके पति ने निजी डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि किडनी में कोई समस्या होने के कारण दिक्कत है। उसने जिला अस्पताल जाने को 108 एंबुलेंस सेवा की मदद लेने के लिए फोन मिलाया। कई बार नंबर डायल करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। काफी देर बाद में एक एंबुलेंस के चालक से जबाव मिला कि विनोद दीक्षित चिकित्सालय मकरंदनगर ले आओ तब ले चलेंगे।

हर शख्स हतप्रभ

मजबूरी में पति ने हाथ ठेलिया पर पत्नी को लिटाया। इसके बाद घर से नौ किलोमीटर ठेलिया खींचकर जिला अस्पताल पहुंचा। उसके अस्पताल पहुंचने पर हर शख्स हतप्रभ रह गया। सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि मामला अभी संज्ञान में नहीं है। 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन सीधे लखनऊ से होता है। नोडल एजेंसी इसे देखती है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

जब पत्नी की हालत बिगड़ी
पति अनुज कुमार ने बताया गर्भवती पत्नी सोनी की 30 मार्च को अचानक तबियत बिगड़ गई। बताया कि पत्नी को मकरंदनगर स्थित विनोद दीक्षित अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डाक्टरों ने गंभीर हालत देख उसे निजी चिकित्सालय में भर्ती कराने की सलाह दी। तो उसने पत्नी को अंधा मोड़ स्थित अर्शी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां आपरेशन के दौरान बच्चे की मौत हो गई। संक्रमण फैलने से चिकित्सकों ने पत्नी को भर्ती करने को कहा। बताया कि कई हफ्ता भर्ती रहने के बाद भी पत्नी की हालत में सुधार नहीं हुआ।

70 हजार रुपये खर्च हुए

अनुज कुमार ने बताया कि वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। उसके तीन बच्चे हो चुके हैं, लेकिन एक भी नहीं बचे हैं। इस वजह से वह परेशान है। बताया कि एक लड़का व एक लड़की प्रसव के दौरान मर चुकी थीं। इस बार बच्चे से बहुत आस थी। इसलिए निजी नर्सिग होम में पत्नी को भर्ती कराया था। इसके बाद भी बच्चे को नहीं बचा सके। वहीं, इलाज में 70 हजार रुपये खर्च होने के बाद भी पत्नी को आराम नहीं मिला। संक्रमण की वजह से डाक्टरों ने पत्नी की बच्चेदानी भी निकाल दी। अब वह कभी पिता नहीं बन पाएगा। पीडि़त ने प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की गुहार लगाई।

जब ड्राइवर ने कहा, नहीं आ पाएंगे गांव

एक मजबूर अपनी बीमार पत्नी को करीब 9 किलोमीटर तक पैदल खींचकर ले गया। आरोप है वह घंटों 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल करता रहा, लेकिन पहले तो फोन नहीं लगा जब लगा तो डीजल ना होने और गाड़ी पंचर होने का बहाना बनाया गया। पीडि़त के कई बार फोन करने के बावजूद एम्बुलेंस जब नहीं आयी तो पीडि़त ने मजबूरी में अपनी पत्नी को ठेलिया पर लादा और पैदल खींचकर 9 किलोमीटर दूर अस्पताल लेकर गया। एम्बुलेंस सेवा 108 के ड्राइवर ने दो टूक जबाव दिया कि गांव नहीं आ पाएंगे। ऐसे में एम्बुलेंस सेवा योगी सरकार के दावों की पोल खोल रही है।

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