
शासन के पास पहुंचा 3 करोड़ का प्रोजेक्ट, गंगा में गिर रहे 16 नालों में से 10 होंगे टैप
कानपुर। खबर मिली है कि कुंभ से पहले गंगा में गिर रहे नालों को टैप किया जाना है, लेकिन कानपुर में 16 नालों में सिर्फ 10 ही टैप किए जा सकेंगे, जबकि शेष 6 नालों पर बायो रेमिडिएशन तकनीक का प्रयोग कर गंगा में गंदगी को गिरने से रोकने की कोशिश की जाएगी. हाल ही में सीएसए में नमामि गंगे के कार्यक्रम में सीएम योगी भी 15 दिसंबर तक सभी नालों को टैप करने का फरमान सुना चुके हैं. ऐसे में जिन नालों को टैप नहीं किया जा सकता, उनमें बायो रेमिडिएशन तकनीक का प्रयोग करने के निर्देश दिए थे. इस पर जल निगम ने 15 दिन पहले ही कार्य योजना बनाकर 6 नालों की बायो रेमिडिएशन तकनीक से साफ करने का प्रस्ताव शासन को भेज चुका है.
अभी भी अधूरा पड़ा है प्रोजेक्ट
जल निगम का प्रोजेक्ट अभी तक पास नहीं हुआ. जबकि मंच पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने भाषण में कहा था कि प्रोजेक्ट बनाकर दो और 8 दिन में पैसा ले जाओ. लेकिन अभी तक यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका है. वहीं जल निगम के जीएम आरके अग्रवाल ने बताया कि कुंभ के 1 महीने पहले इस कार्य को शुरू किया जाना है और कुंभ के 1 महीने बाद तक कार्य किया जाएगा.
सूत्रों के हवाले से मालूम पड़ा है ये
बायो रेमिडिएशन तकनीक कोई नई नहीं है. सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के आधार पर पहले भी सीसामऊ नाले पर इस तकनीक का प्रयोग किया जा चुका है. लेकिन इसका कोई प्रभाव देखने को मिला था. इस कारण से इस तकनीक का प्रयोग बंद कर दिया गया था.
जानिए रेमिडिएशन तकनीक को
रेमिडिएशन तकनीक से नाले में मौजूद सिल्ट में एंजाइम की डोजिंग कर रिएक्शन कराई जाती है. इससे सिल्ट में मौजूद गंदगी में बीओडी की मात्रा बढ़ जाती है. गंगा में गिरने से पहले नालों में स्लज को रोकने के लिए कई पॉन्ड बनाए जाएंगे और इसमें लिक्विड फॉर्म में मौजूद एंजाइम डाले जाएंगे. एंजाइम रिएक्शन से स्लज में बैक्टीरिया ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ा देता है. नाला जितना लंबा होगा, उससे रिएक्शन ज्यादा तेज होगी. इसका फायदा यह है कि गंगा में गिर रहे ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाया जा सकेगा, गंगा में मौजूदा मछलियों और अन्य जीव जंतुओं को इसका लाभ मिलेगा.
Published on:
24 Aug 2018 11:39 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
