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शहर की सरकार की कैबिनेट में 12 चेहरे

नई कैबिनेट का चयन कार्यक्षमता और मिशन 2019 के मद्देनजर किया गया है।

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कानपुर. मिशन 2019 फतेह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कैबिनेट के नए चेहरे तय कर लिए हैं। नए शहरी क्षेत्र और ग्रामीण अंचलों से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को कैबिनेट में प्राथमिकता मिली है। खास बात यह रहकि कैबिनेट के गठन में दिग्गजों को निराश होना पड़ा, बावजूद प्रक्रिया निर्विरोध संपन्न हुई। नई कैबिनेट में सपा और कांग्रेस के दो-दो नेताओं को भी जगह मिली है। दरअसल, कानपुर की स्थानीय सरकार की कैबिनेट यानी नगर निगम कार्यकारिणी के गठन को कई दिनों से माथापच्ची जारी थी, जोकि अंतत: नई कार्यकारिणी के गठन के साथ खत्म हो गई।

कैबिनेट में दिग्गजों को नहीं मिला मौका

शहर की सरकार में 12 सदस्यीय कैबिनेट में दिग्गज चेहरों को नहीं चुना गया। निर्विरोध चुनी गई नई कार्यकारिणी में भाजपा के 8 और कांग्रेस व सपा के 2-2 सदस्य बने हैं। इतिहास में यह दूसरा अवसर था जब दलीय राजनीति से ऊपर उठकर सभी पार्टियों के साथ ही निर्दलियों के बीच भी एक राय बनी। ऐसे में कानपुर से लखनऊ तक यही संदेश गया कि सभी जनप्रतिनिधि मिल-जुलकर शहर को संवारना चाहते हैं। चुनाव के पहले नगर निगम के पहले सदन की बैठक महापौर प्रमिला पाण्डेय की अध्यक्षता में सुबह 11.16 बजे शुरू हुई। उन्होंने नगर आयुक्त अविनाश सिंह को निर्देश दिया कि सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए एजेंडा पढ़ा जाए। नगर आयुक्त ने कहा कि सिर्फ एक ही एजेंडा है कार्यकारिणी के गठन के लिए चुनाव कराने का। इस पर महापौर ने पार्षदों से आग्रह किया कि पार्टी लाइन से ऊपर उठकर निर्विरोध निर्वाचन पर वार्ता करें ताकि कानपुर के सदन में शांति और सौहार्द की महक ऊपर तक जाए। महापौर ने यह कहते हुए बैठक एक घंटे के लिए स्थगित कर दी कि सभी दल आपस में बात करके निर्विरोध कार्यकारिणी का गठन करने के मुद्दे पर मंथन करें।

ऐन मौके पर तीन लोग हट गए पीछे

सदन की पहली कार्यवाही लगभग 15 मिनट तक चली। 12.40 बजे दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन 3 मिनट बाद ही महापौर ने आधा घंटा के लिए सदन को स्थगित करते हुए निर्दलियों के बैठने की अलग व्यवस्था करने को कहा। आधा घंटा बाद जब तीसरी बार सदन की कार्यवाही हुई तो निर्विरोध कार्यकारिणी का गठन हो गया। इससे पहले महापौर के निर्देश पर नगर आयुक्त ने तीसरी बार निर्वाचन की घोषणा और अपर नगर आयुक्त अमृत लाल ङ्क्षबद को चुनाव अधिकारी व विनोद कुमार गुप्ता को सह प्रभारी नियुक्त कर दिया। चुनाव के लिए नामांकन पत्र लेने और भरने का काम चल रहा था। पहला घंटा इसीलिए निर्धारित था। 12 लोगों ने नामांकन भरा, लेकिन ऐन मौके पर महापौर ने कीर्ति अग्निहोत्री व मनोज पाण्डेय को समझाया तो तीन लोग पीछे हट गए। महापौर का कहना था कि एक साल बाद जब दोबारा कार्यकारिणी गठित होगी तो निर्दलीय को मौका मिलेगा। बाद में अपर नगर आयुक्त ने सदन में बताया कि सिर्फ 12 नाम ही आए हैं तो पार्षदों की तालियों की गडग़ड़ाहट हुई और कुछ ही देर बाद सभी 12 नए सदस्यों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।


चुनाव लडऩे पर अड़े रहे निर्दलीय

कार्यकारिणी के गठन में सबसे बड़ी बाधा निर्दलीय थे। उनका कहना था कि कार्यकारिणी में उनका भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए। हालांकि उनके बीच ही एक राय नहीं थी कि उनकी तरफ से अगुवाई कौन करेगा। कई निर्दलीय चुनाव लडऩे के लिए आवेदन करना चाहते थे। मनोज पाण्डेय और कीर्ति अग्निहोत्री का नाम सबसे ऊपर था। इनका दावा था कि 18 निर्दलियों में अधिकांश उन्हें ही वोट देंगे। इधर सपा के एमएलसी दिलीप सिंह व विधायक अमिताभ बाजपेई पहुंच चुके थे, लेकिन भाजपा के विधायकों में सिर्फ नीलिमा कटियार मौजूद थीं। कुछ निर्दलीय की सीटें भी खाली दिख रहीं थीं जिसमें भाजपा, कांग्रेस और सपा तीनों के समर्थक थे। ऐसे में वोटिंग होती तो भाजपा को भी नुकसान होता।


यह लोग शहर की कैबिनेट में हुए शामिल

भाजपा से महेंद्र पाण्डेय, विजय यादव, गुरु नरायण गुप्ता, रीता पासवान, संतोष साहू, गोपाल गुप्ता, जितेंद्र गांधी, नवीन पंडित को कैबिनेट में शामिल किया गया है, जबकि सपा के कोटे से लिकायत अली और अभिषेक गुप्ता को जगह मिली है। कांग्रेस के अमीन खान और जेपी पाल भी कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी के सदस्य निर्वाचित हुए हैं।