
religious conversion in kanpur
कानपुर. दशहरे के पर्व के दिन कानपुर देहात के पुखरायां कस्बे में 25000 हजार दलित समाज के लोगों ने धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म अपनाया लिया। इस मौके पर लोगों ने पहले विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और बौद्ध बन गए। इसके पूरे कस्बे में जुलूस निकाला। राष्ट्रीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने बताया कि सम्राट अशोक ने विजयदशमी के दिन ही बौद्ध धर्म अपनाया था और डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने भी बौद्ध की दिक्षा गृहण कर ली थी। धर्म परिवर्तन करने के सवाल पर पैथर ने कहा कि हमारी जाती के लोगों को लोग गलत नजर से देखते हैं। इसी के चलते हमलोग धर्म परिवर्तन करने को मजबूर हो रहे हैं।
अपने को नहीं मानते हिंदू
कानपुर देहात के पुखरायां कस्बे में करीब 25 हजार दलितों ने दहशरे के दिन धर्म परिवर्तन कर बौद्ध बन गए। इस दौरान ढोल नगाड़े के साथ कस्बे में रैली निकाली गई और बौद्ध धर्मगुरु की मौजूदगी में धर्म परिवर्तन कर लिया। कानपुर नगर व देहात में अब तक ये सबसे बड़ी संख्या है, जिसने हिंदू धर्म को छोड़कर दूसरा धर्म अपनाया है। राष्ट्रीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने बताया कि हमारे पूर्वज हिंदु नहीं थे, हम पर जबरन इस धर्म को थोपा गया था। हम अपने पुराने घर में पुन: लौटकर आए हैं। बौद्ध धर्म गुरु ने इस मौके पर कहा कि हम रावण के पुतले का बहिष्कार करते हैं। उनका कहना है कि जितने भी चमार धानुक धोबी हम लोग तो हिंदु है ही नहीं न ही हम भगवान राम को मानते हैं।
मिलती हैं गाली, श्रीराम भगवान नहीं
राष्ट्रीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने इस मौके पर कहा कि हम लोग रावण के पुतले के दहन का विरोध करते आ रहे हैं। क्योंकि वो गलत इंसान नहीं था। साथ ही श्रीराम को भी हम भगवान नहीं मानते। वहीं छात्रा सुमन ने कहा कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी बड़े समाज के लोग हमें गाली देते हैं और गलत नजर से देखते हैं। हैंडपंप व कुएं में पानी भरने नहीं दिया जाता। स्कूलों में टीचर भेदभाव करते हैं, इन्हीं के चलते मैने धर्म परिवर्तन किया है।
किसी राजीतिक दल ने दलितों की नहीं ली सुधि
राष्ट्रीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने बताया ने कहा कि आजादी के बाद भी दलित गुलामी की जिंदगी जी रहा है। विकास के नाम पर हमारे समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कल्याणपुर के ईश्वरीगंज में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आए थे। योगी सरकार के अफसरों ने बड़ी जतियों के घरों में टॉयलेट बनवा दिए, लेकिन दलितों के घर के बाहर आज भी शौचालय नहीं हैं। पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी तक दलितों के साथ भेदभाव किया है। बसपा की नेता मायावती से दलितों को उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने भी हमारे साथ छल किया।
Published on:
01 Oct 2017 11:14 pm
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