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कानपुर में बन रहा ‘कैराना’, 5 साल में पूरा मुहल्ला खाली

बजरिया थाना अंतर्गत आने वाले शिवसहाय मोहल्ले में 1990 के पहले करीब चार सौ परिवार रहा करते थे। लेकिन अगल-बगल में मुस्लिम आबादी बढ़ रही थी, तभी बाबरी कांड के बाद यहां पर दंगा हो गया।

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Akansha Singh

Aug 30, 2016

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कानपुर। पिछले दिनों कैराना में हिन्दुओं के पलायन को लेकर जबरदस्त राजनीति हुई थी, लेकिन कानपुर शहर के शिवसहाय मोहल्ले में 1990 के दंगे के बाद एकाएक 400 हिन्दू परिवार यहां घर, जमीन और दुकान कम कीमत पर बेचकर चले गए। हालात यह हैं कि शिवसहाय मोहल्ले में मात्र एक हिन्दू परिवार ही बचा है।

बजरिया थाना अंतर्गत आने वाले शिवसहाय मोहल्ले में 1990 के पहले करीब चार सौ परिवार रहा करते थे। लेकिन अगल-बगल में मुस्लिम आबादी बढ़ रही थी, तभी बाबरी कांड के बाद यहां पर दंगा हो गया। दंगे के दौरान कई दर्जन हिन्दू समुदाय के लोग मारे गए। इसके बाद कुछ मुस्लिम नेताओं की नजर हिन्दुओं के मकानों पर पड़ गई और फिर यहीं से इनको भगाने की प्लानिंग शुरू हो गई।

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मंदिर को किया क्षतिग्रस्त, 5 साल में पूरा मुहल्ला खाली

शिवसहाय मोहल्ले में 10 अप्रेल 1990 को एक समुदाय विशेष के लोगों ने हिन्दुओं के धर्म स्थल को क्षतिग्रस्त कर उसमें रखीं भगवान की मूर्तियों को ले गए थे। इसके विरोध में हिन्दू संगठन खुलकर सड़क पर उतरे और दोनों तरफ से जमकर पत्थरबाजी हुई थी। इसी दौरान एक समुदाय के लोगों ने 20 साल की युवती के साथ रेप के बाद हत्या कर दी। जानकारी होने पर उस समाज के लोग दूसरे समुदाय के घरों में घुसकर रेप और हत्या कर शवों को जला दिया था। कुछ दिनों के बाद दंगा तो शांत हो गए, लेकिन दोनों समुदायों के बीच दिलों में दूरियां बन गई। 1995 आते-आते हिन्दू परिवार डर के चलते अपने-अपने घरों को मुस्लिम समुदाय को बेचकर चले गए।


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88/41 में रहता है हिन्दू परिवार

शिवसहाय गली के मकान नंबर 88/41 में सिर्फ 2016 में एक हिन्दू परिवार रह रहा है। शिवसहाय के रहने वाले शंकर निगम ने बताया कि पूरे मोहल्ले से हिन्दू परिवार पलायन कर गए हैं। लेकिन वह अपनी जन्मभूमि में आज भी डटे हुए हैं। बेटी और दो बेटे इलाहाबाद में रहते हैं, यहां पर हम, पत्नी और माता व पिता जी ही रहते हैं। बताया, शाम ढलते ही हम घर के अंदर दुबक जाते हैं। अराजकतत्व शाम होते ही घर के बाहर हुड़दंग व धार्मिक गालियां देते हैं। नाते रिश्तेदारों के आने पर छतों से गोस्त के टुकड़े फेंकते हैं।

खुद के मकान पर खुलवाई पुलिस चौकी

शंकर निगम ने बताया कि बसपा सरकार के दौरान हमने तत्कालीन आईजी से मिलकर चौकी खोलने की मांग की थी, लेकिन मुस्लिम समुदाय के चलते पुलिस चौकी नहीं खुल सकी। फिर हम हाईकोर्ट में की शरण में गए। कोर्ट ने अखिलेश सरकार को आदेश दिया कि शिवसहाय मोहल्ले में तत्काल प्रभाव से पुलिस चौकी खुलवाएं। कोर्ट के आदेश के बाद आईजी ने मोहल्ले में पुलिस चौकी के लिए स्थानीय विधायक से जमीन की व्यवस्था करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने अपने हाथ खड़े कर लिए। इसके बाद हम आईजी से मिलकर अपने घर में पुलिस चौकी खोलने की जगह दी, तब कहीं जाकर पुलिस चौकी खुल सकी।


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बसाएंगे फिर से अपने लोगों को

शंकर निगम ने कहा कि अभी भी करीब तीन दर्जन लोगों ने डर के चलते मकानों में ताले डालकर किराए के मकान में रह रहे हैं, उन्हें लाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। शंकर का मानना है कि अगर हम अपने देश में ही बेघर कर दिए गए तो हमारे लिए इससे शर्मनाक बात क्या होगी। शंकर की पत्नी रंजनी ने बताया कि डर के साए में जी रहे हैं । वह चाहते हैं कि यह परिवार भी यहां से चला जाए, फिर हमारा इकतरफा यहां राज चले।


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तो राजनीति के चलते भगाया गया

समाजसेवी स्वदेश कुमार ने बताया कि 1990 के बाद राजनेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए हिन्दुओं के पलायन में अहम रोल निभाया। कभी भाजपा की सीट रही सीसामऊ विधानसभा में 70 फीसदी हिन्दू और 30 प्रतिशत मुस्लिम थे, लेकिन 2012 की जनगणना के बाद आज स्थित यह है कि यहां पर सिर्फ 20 फीसदी हिन्दू बचे हैं। स्वदेश कुमार के मुताबिक हाजी मुश्ताक सोलंकी यहां से कईबार विधायक चुने गए। उनकी मौत के बाद बेटा दो बार से विधायक है। स्वदेश कुमार का आरोप है कि विधायक इरफान और उसका खास रहीस कुरैशी के चलते शिवसहाय मोहल्ले से हिन्दुओं का पलायन हुआ है।