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आदिकाल के इस देवी मंदिर में है प्राचीन परम्परा, दूसरे साम्राज्य पर विजयी होने के लिए राजा ने कराए थे 99 यज्ञ

इस प्राचीन धर्म स्थल को देवलोक का दर्जा दिया जाता था।

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आदिकाल के इस देवी मंदिर में है प्राचीन परम्परा, दूसरे साम्राज्य पर विजयी होने के लिए राजा ने कराए थे 99 यज्ञ

आदिकाल के इस देवी मंदिर में है प्राचीन परम्परा, दूसरे साम्राज्य पर विजयी होने के लिए राजा ने कराए थे 99 यज्ञ

कानपुर देहात-देवताओं के धर्मस्थलो के साथ साथ देवी मंदिरों की भी अपनी अलग मान्यता है। एक ऐसा ही प्रख्यात मंदिर कानपुर देहात के मूसानगर में स्थित है। स प्राचीन मंदिर में मां मुक्तादेवी विराजमान है, इसलिए इसे मुक्ता देवी का मंदिर कहा जाता है। यहां दूर दराज से लोग दर्शन के लिए आते है। इस स्थल पर मुंडन कराने की प्रथा वर्षों से चली आ रही है। इसकी प्राचीन कहानी है। कहा जाता है कि देव यक्ष व राजाओ का निवास होने के कारण इस स्थान को देवलोक का दर्जा दिया जाता था। दूसरे साम्राज्य पर विजय हासिल करने के लिये दैत्यराज बलि ने यहां आकर विधि विधान से 99 यज्ञो के साथ एक अश्वमेघ कराया था। तब से इस मंदिर परिसर के उत्तरगामिनी मे हवन पूजन व यज्ञ करने की परम्परा है।

इस प्रथा के चलते दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु उस स्थान पर आकर हवन व यज्ञ कर अपनी मनोकामना पूरी करते है। नवरात्रि के समय मे मनौती पूर्ण होने पर यहाँ आकर लोग चढ़ौती चढ़ाते हैं। लोगों की मान्यता है कि दिन में तीन बार माता की प्रतिमा अपना रूप बदलती है, जो एक चमत्कार के रूप मे लोगों को आश्चर्य में डालती है, जिसे देखने के लिये लोगों की भीड़ उमडती है। तमाम भक्त जवारों का जुलूस निकाल अपनी मां को मनाते है। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इस मंदिर मे भक्तो के लिये सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाती है।

मंदिर के महंत का कहना है कि इस मंदिर की विशेषता है कि यहां आकर कोई कोई खाली हांथ नही जाता है। सुहागिनें आकर माता का सोलह श्रृंगार कर चुनरी चढ़ाकर मंगल गीत गाती हैं। नवरात्रि में जवारे चढ़ाने का प्रचलन प्रमुखता से है। इस सिद्ध स्थान पर बच्चों के मुंडन कराने की परम्परा है।