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लाखों का पैकेज ठुकराया, नौकरियां बांटने को रोजगार संवारा

बदलाव की बयार.....एक दिन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम की किताब पढऩे वक्त एक वाक्य मोहिनी के दिमाग में बस गया।

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कानपुर. मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जिंदगी को पढ़ते समय एक वाक्य उसके जेहन में बवंडर खड़ा कर दिया। जिंदगी में कुछ नया करने के लिए प्रेरित करने वाला वाक्य था - नौकरी मांगने के बजाय देने वाले बनो.....। कनाडा में बड़ी कंपनी में मैनेजर कानपुर की मोहिनी सक्सेना कई दिन तक सोचती रहीं कि किसी दूसरे की कंपनी में नौकरी करने के बजाय अपना कारोबार खड़ा करेंगे और इतनी ही मेहनत करेंगे तो कुछ वर्षों में मौजूदा तनख्वाह के मुकाबले कई गुना ज्यादा कमाई होगी। इसके साथ ही तमाम लोगों को नौकरी देने की इच्छा भी पूरी होगी। इस उधेड़बुन में मोहिनी ने एक दिन अपने वतन लौटने का इरादा बना लिया। कानपुर लौटने के बाद मोहिनी ने स्टार्टअप के लिए तमाम आइडिया रचे, लेकिन अंतिम निर्णय अपने पुस्तैनी पोल्ट्री फार्म को आधुनिक रूप से विकसित करने का लिया। मेहनत रंग लाई। फार्म में अंडों का उत्पादन बढ़ा और कई लोगों को रोजगार भी मुहैया हुआ। अब मोहिनी जल्द ही दूसरा पोल्ट्री फार्म खोलने की तैयारी में जुटी हैं।


पांच साल कनाडा में, फिर हिंदुस्तान लौटीं

मोहिनी के पिता आनंद सक्सेना कानपुर में चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं, जबकि मां कविता घर संभालती हैं। शीलिंग हाउस पब्लिक स्कूल से वर्ष 2012 में इंटरमीडियट करने के बाद मोहिनी आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा चली गईं। वहां उन्होंने नॉर्दन एल्बर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स किया। वर्ष 2016 में पढ़ाई पूरी होते ही मोहिनी को कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव के जरिए बड़ी कंपनी में लाखों रुपए के वेतन पर नौकरी मिल गई। नई नौकरी मिलने के बाद मोहिनी चहक रही थी। ऊंचे ओहदे पर पहुंचने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया था। रोजाना दस-दस घंटे दफ्तर में गुजारने वाली मोहिनी ने टॉप मैनेजमेंट की नजरों में अपनी पहचान को पुख्ता कर लिया था। इसी दरम्यान एक दिन मोहिनी ने हिंदुस्तान लौटने का फैसला कर लिया।


कलाम के नजरिए ने मोहिनी को प्रेरित किया

हिंदुस्तान लौटने का फैसला अचानक नहीं लिया, बल्कि एक दिन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम की किताब पढऩे वक्त एक वाक्य मोहिनी के दिमाग में बस गया। नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने पर फोकस करना चाहिए, इसी वाक्य ने मोहिनी को अपनी कंपनी - अपना रोजगार खड़ा करने के लिए प्रेरित किया। अगले दिन पापा से संवाद किया। पापा ने सोच-विचार कर फैसला लेने के लिए कहा। इसके बाद अगले सप्ताह मोहिनी अपने वतन की माटी पर कुछ नया करने के लिए पहुंच गई थी।


तमाम स्टार्टअप देखे, फिर पोल्ट्री फार्म को संवारा

क्या किया जाए ? इस सवाल के जवाब में मोहिनी ने तमाम स्टार्टअप पर गौर किया। तमाम आइडिया दिमाग में कौंधे, लेकिन कुछ जमा नहीं। इसी दरम्यान एक दिन पापा के साथ पुश्तैनी पोल्ट्री फार्म देखने गईं और जिंदगी का मकसद मिल गया। मोहिनी ने पोल्ट्री फार्म को आधुनिक करने का इरादा बना लिया था। बिधनू के शंभुआ गांव में पोल्ट्री फार्म को वर्ष 2017 में अपग्रेड किया। ब्रायलर पैरेंटिंग फार्मिंग तकनीक को अपनाया। इस तकनीकी में मुर्गियों-मुर्गों को 70 सप्ताह तक पाला जाता है। जटिल होने के बावजूद इस तकनीकी में फायदा ज्यादा है। नतीजा यह हुआ कि पोल्ट्री फार्म का टर्न-ओवर बढ़ गया। मोहिनी ने 35 लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया। अब मोहिनी का इरादा एक और पोल्ट्री फार्म स्थापित करने का है, जहां 50 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।