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बरसों बाद सुधरी थी रियल एस्टेेट सेक्टर की हालत, फिर मिल गया एक करारा झटका

बरसों बाद रीयल एस्‍टेट सेक्‍टर की हालत कुछ सुधरी तो बैंकों ने लोन प्रक्रिया रोक कर हालत खराब कर दी. रही सही कसर गैर बैंकिंग वित्‍तिय कंपनियों (एनबीएफसी) की ओर से लोन पर प्रतिबंध ने पूरी कर दी है.

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Kanpur

बरसों बाद सुधरी थी रियल एस्टेेट सेक्टर की हालत, फिर मिल गया एक करारा झटका

कानपुर। बरसों बाद रीयल एस्‍टेट सेक्‍टर की हालत कुछ सुधरी तो बैंकों ने लोन प्रक्रिया रोक कर हालत खराब कर दी. रही सही कसर गैर बैंकिंग वित्‍तिय कंपनियों (एनबीएफसी) की ओर से लोन पर प्रतिबंध ने पूरी कर दी है. ये रोक आरबीआई ने निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी फाइनेंस कंपनी आईएलएंडएफएस के डिफॉल्‍टर होने के बाद लगाई है. इससे 300 करोड़ रुपये के निजी निर्माण और छोटे रियल एस्‍टेट प्रोजेक्‍ट अटक गए हैं. इससे पूरे रियल एस्‍टेट सेक्‍टर को एक और जबरदस्‍त झटका लगा है.

खड़ा हो गया बड़ा संकट
आईएलएंडएफएस व उसकी सहयोगी कंपनियों की ओर से कर्ज के भुगतान में चूक के बाद एनबीएफसी के समक्ष नगदी संकट खड़ा हो गया है. होम लोन देने वाली कंपनियों की रकम आईएलएंडएफएस में लगी थी. 90 हजार करोड़ रुपए डूबने से पूंजी पूरी तरह से खत्‍म हो गई. ये कंपनियां बाजार से पैसा उठाती थीं. इनमें आईएलएंडएफएस ही लीडर थी. वहीं से पैसा बाजार में आता था, जिसे अन्‍य कंपनियां ब्‍याज पर लेती थीं.

पूरी तरह से रुक गया कारोबार
इस कंपनी के डूबने से इससे जुड़ी अन्‍य फाइनेंस कंपनियों की जेब भी खाली हो गई और कारोबार फिलहाल पूरी तरह से रुक गया. एसबीआई ने आईएलएंडएफएस के लिए 45 हजार करोड़ के रिवाइवल प्‍लान का ऐलान किया है. इसमें भी 3 से 6 महीने लग जाएंगे. इससे लंबे समय तक लोन पर रोक रही तो पूरा सिस्‍टम भरभरा कर बैठ जाएगा.

जमीन ली लोन पर, अब घर बनवाएं कैसे
कानपुर में करीब 4600 से ज्‍यादा ग्राहक ऐसे हैं, जिन्‍होंने एनबीएफसी से लोन लेकर जमीन ले ली. अब निर्माण के लिए उन्‍हें लोन नहीं मिल रहा है. सोसाइटी, अराजी जमीनों पर लोन लेकर निर्माण करने वाले करीब 1900 लोगों की पहली किस्‍त जारी हुई और फिर रोक लग गई. ऐसे लोग सबसे ज्‍यादा परेशान हैं क्‍योंकि पिछले लोन की किस्‍तें उन्‍हें चुकानी ही होंगी और अगली किस्‍त रुकने से निर्माण बाधित हो गया है. सिविल मामलों के अधिवक्‍ता यजुवेंद्र सिंह ने कहा कि रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में पसरा सन्‍नाटा तूफान से पहले का संकेत है. हालात जल्‍द न सुधरे तो अर्थव्‍यवस्‍था का गहरा झटका लग सकता है.