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समाज में बदलाव के बाद ही एड्स को रोक सकते हैं – डा. जीके मिश्रा

उत्तर प्रदेश में विश्व एड्स दिवस के दिन कानपुर में बड़े स्तर पर सामाजिक बदलाव को लेकर परिचर्चा हुई। इस दौरान डॉक्टर और एक्सपर्ट्स ने कहा कि एड्स को रोकने के लिए समाज को खुद की ज़िम्मेदारी समझनी होगी। हर युवा को इसे गंभीरता से लेते हुए समझना होगा।

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पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

कानपुर. समाज के सकारात्मक प्रयासों से समाज में एड्स को लेकर भेदभाव और गलतफहमियां काफी हद तक खत्म हो चुकी हैं। लेकिन अब भी एड्स को नियंत्रित करने की बहुत आवश्यकता है। हम सभी मिलकर एड्स से पीड़ित लोगों को एक बेहतर जीवन देने की ओर बढ़ रहे हैं। इससे जल्द ही वह समय आएगा जब एड्स से निजात मिल जाएगी। यह बातें विश्व एड्स दिवस पर अपर निदेशक स्वास्थ्य चिकित्सा डा. जीके मिश्रा ने कही।

विश्व एड्स दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के कार्यालय में संगोष्ठी और हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया और जागरूकता रैली निकाली गई। संगोष्ठी में जिले के विभिन्न चिकित्सा केन्द्रों से एड्स काउंसलर व एन.जी.ओ. के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस वर्ष की थीम “असमानताओं को समाप्त करें. एड्स खत्म करें'” पर चर्चा करते हुए अपर निदेशक डॉ. जी.के. मिश्रा ने सभी को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग अनजाने में एच.आई.वी. संक्रमित हो जाते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता इसलिए जांच आवश्यक है, ताकि संक्रमण की जल्द पहचान की जा सके।

उत्तर प्रदेश स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी, लखनऊ से प्रोग्राम ऑफिसर पवन सिंह चंदेल ने कहा कि एड्स किसी भी आयु वर्ग में हो सकता है इसलिए जागरूकता बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने सभी को वर्तमान में विश्व में एड्स की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि वर्ष 2025 तक सभी एड्स पीड़ितों को ए.आर.टी. से लिंक करने और वर्ष 2030 तक एड्स को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य है ।

मेडिकल कॉलेज के ए.आर.टी. सेंटर के सीनियर काउंसलर डॉ. सत्यम लाल बाजपेई ने कहा कि हमें संक्रमित व्यक्ति के एच.आई.वी. संक्रमित होने के बाद ही संक्रमण का पता चल जाये तो व्यक्ति को एड्स की गंभीर स्थिति से बहुत हद तक बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को रक्तदान करते रहना चाहिए, इससे अन्य लोगों की सहायता तो होती ही है साथ ही रक्तदान के बाद रक्त की जांच होने पर यदि रक्तदाता को कोई संक्रमण होता है तो उसका भी पता चल जाता है। वहीं, विश्व एड्स दिवस पर डफरिन आई.सी.टी.सी. काउंसलर ममता श्रीवास्तव व एस.टी.आई. काउंसलर कंचन पाण्डेय और उर्सला हॉस्पिटल में आई.सी.टी.सी. काउंसलर शोभा पाण्डेय ने विशेष परामर्श सेवाएं दी गई और लोगों को एड्स के प्रति जागरूक किया गया।

एच.आई.वी. प्रभारी नीरज शुक्ला के नेतृत्व में कार्यक्रम संपन्न हुआ, सह प्रभारी रूचि यादव, टी.आई. एन.जी.ओ. प्रतिनिधि, आई.सी.टी.सी., पी.पी.टी.सी.टी., ए.आर.टी. के सभी काउंसलर व डी.टी.ओ. कार्यालय से कौस्तुभ व अन्य सदस्य मौजूद रहें।