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कानपुर में बनेगा एयरक्राफ्ट की लोकेशन देने वाला ब्लैक बॉक्स, जर्मनी से होता था आयात

डिफेंस मटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपेमेंट इस्टेब्लिसमेंट ने एयरक्राफ्ट की लोकेशन देने वाला 'ब्लैक बाक्स' को विकसित किया है जो जल्द ही कानपुर में बनेगा

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Ruchi Sharma

Oct 17, 2016

Aircraft Black box

Aircraft Black box

कानपुर. (डीएमएसआरडीई) डिफेंस मटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपेमेंट इस्टेब्लिसमेंट ने एयरक्राफ्ट की लोकेशन देने वाला 'ब्लैक बाक्स' को विकसित किया है जो जल्द ही कानपुर में बनेगा। अभी तक यह जर्मनी से आयात कर एयरक्राफ्ट में लगाया जाता है। इसका ट्रायल अलग-अलग एयरक्राफ्ट में किया जा रहा है। अमूमन एयरक्राफ्ट के अंदर हर गतिविधि को रिकार्ड करने की क्षमता ब्लैक बाक्स में होती है। इसलिए हादसे के बाद इसी ब्लैक बाक्स की तलाश होती है, इससे ही जाना जा सकता है कि आखिर हादसे के क्या कारण थे। अभी तक इस यंत्र की आपूर्ति जर्मनी करता है, अब डीएमएसआरडीई ने काम्पैक्ट प्रोटेक्टेड मेमोरी मॉड्यूल आफ फ्लाइट डाटा रिकार्डर के नाम से विकसित किया है। इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है। अभी डेढ़ साल तक विभिन्न एयरक्राफ्ट में परीक्षण से गुजरने के बाद रक्षा मंत्रालय बल्ब प्रोडक्शन की ओर कदम बढ़ाएगा।


इस ब्लैक बॉक्स का के निर्माण के लिए देश की एचएएल कोरवा, आरसीएमए कोरवा, डीजीएक्यूए कोरवा, एनएसटीएल, एचएएल कानपुर, वीसीबी इलेक्ट्रानिक पुणे, गुडरिच इंडस्ट्रीज पनकी और एचएल इनफोटेक बंगलुरू की कंपनियों का भी अहम योगदान रहेगा। डीएमएसआरडीई के महाप्रबंधक ने बताया कि ब्लैक बॉक्स को बनाने के लिए दो माह पहले डिफेंस मंत्रालय की ओर से पत्र मिला था। जिस पर हमने इस ब्लैक बॉक्स का निर्माण करने के लिए काम शुरू कर दिया था। अप्रैल 2017 तक हम मेक इन इंडिया के तहत इस बॉक्स को बना लेंगे फिर इसका परीक्षण किया जाएगा। बताया, फ्लाइट डाटा रिकार्डर बेहद मजबूत होगा, अगर तीन मीटर ऊंचाई से 230 किलोग्राम वजन की वस्तु इस यंत्र पर गिरेगी तो भी यह नहीं टूटेगा।

DMSRDE ने तैयार किए यह उपकरण

1- डीएमएसआरडीई ने लड़ाकू हेलीकॉप्टर के पायलट की सुरक्षा के लिए आर्मर पैनल विकसित किया है।

2- बोराइन कार्बाइड से तैयार इस यंत्र को लगाने से हेलीकाप्टर पर किसी तरह का हमले का असर नहीं पड़ेगा, गोली हेलीकॉप्टर को भेद कर पायलट को नहीं लगेगी।

3- इस उपकरण का ट्रायल आयुध निर्माणी बरनगांव में हो चुका है, वहां इसे सफलता भी मिली है।

4- डीएमएसआरडीई द्वारा तैयार बुलेट प्रूफ जैकेट में कई बदलाव किए गए हैं। इसे 'एक 47' के 14 बुलेट के ट्रायल से गुजारा भी गया है, जिसमें इसे सफलता भी मिली है। अब इसे और अधिक मारक बनाने की दिशा में प्रतिरक्षा संस्थान काम कर रहा है।

5- डीएमएसआरडीई ने कैमोफ्लेग नेट तैयार की है, इससे जंगल की शेप में बनाया गया है।

6 सेना इसे अोढ़कर दुश्मन पर प्रहार भी कर सकती है और सामने वाले को पता भी नहीं चलेगा कि आखिर फायरिंग कर कौन कर रहा है।

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7- यह बेहद हल्का बनाया गया है ताकि इसे सही इस्तेमाल में लाया जा सके।

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