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अखिलेश के पत्र ने सपाईयों में मचा दी खलबली, नौ माह के कार्यों का लेखा-जोखा लेकर जाएंगे राजधानी

उत्तर प्रदेश के विधानसभा, निकाय और सिकंदरा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद अखिलेश यादव खासे नाराज हैं।

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कानपुर. उत्तर प्रदेश के विधानसभा, निकाय और सिकंदरा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद अखिलेश यादव खासे नाराज हैं। इसी के चलते उन्होंने कानपुर मंडल के सभी सांसद, विधायक, हारे उम्मीदवारों के साथ संगठन के पदाधिकारियों को नौ माह के कार्यों का लेखा-जोखा लेकर आठ जनवरी को लखनऊ तलब कर लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पत्र ने स्थानीय सपाईयों के अंदर खलबली मचा दी है। सभी चुनाव हार के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में कितने कार्यकर्ता बनाए, जनता के लिए कितनी बार सड़क पर उतरे सहित अन्य ब्योरे एकत्र करने में जुटे हैं। कानपुर से कैंट से परवेज अंसारी को नहीं बुलाया गया है, उनकी जगह यहां से डॉक्टर इमरान अखिलेश यादव की चौपाल में भाग लेंगे।


8 जनवरी को प्रदेश कार्यालय में होगी बैठक
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के एक पत्र ने कानपुर नगर व ग्रामीण के सपाईयों के बीच हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिले के सभी सांसद, विधायक, विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार और सगंठन से जुड़े पदाधिकारियों को दावतनामा भेजकर लखनऊ तलब किया है। नगर महासचिव अम्मबर त्रिवेदी ने बताया कि सभी नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की तरफ से पत्र के जरिए आठ जनवरी को प्रदेश कार्यालय बुलाया गया है। बैठक के एजेंडे के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई। हां सभी को अपने-अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की सूची व बूथ एजेंटों के नाम ले जाने को कहा गया है। जानकारों की मानें तो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लगातार तीन चुनाव हारने के कारण पर चर्चा करने के साथ ही भीतरघात करने वालों की जानकारी लेकर उन पर कार्रवाई कर सकते हैं।


निकाय के बाद सिकंदरा हार की होगी समीक्षा
समाजवादी पार्टी ने 2012 के चुनाव में कानपुर नगर की दस में पांच विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। पर 2017 में पार्टी महज दो सीट पर सिमट गई। आर्यनगर से अमिताभ बाजेपयी तो सीसामऊ से इरफान सोलंकी जीते। जबकि पूर्व मंत्री अरूणा कोरी, और शिवकुमार बेरिया जैसे दिग्गज नेता चुनाव हार गए। निकाय में भी पार्टी का यही हश्र रहा। 2011 के मुकाबले 2017 में महज 12 पार्षद ही जीते। वहीं नगर पालिका बिल्हौर में भी हार झेलनी पढ़ी। सिकंदरा सीट में हुए उपचुनाव में पार्टी को उम्मीद थी कि यहां साइकिल दौड़ेगी, लेकिन लाख कोशिशों के बाद सीमा सचान चूनाव हार गई। इसी के बाद समाजवादी पार्टी के नगर और ग्रामीण अध्यक्ष हटा दिए गए। जानकारों का मानना है कि बैठक में हार पर चर्चा के साथ संगठन को नई धार पर मंथन होगा और कई सपा नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।


डॉक्टर इमरान करेंगे कैंट का प्रतिनिधित्व
आठ जनवरी को होने वाली बैठक में पार्टी विधायकों के साथ-साथ हारे या भविष्य के उम्मीदवारों को बुलाया गया है। 2017 विधानसभा के सभी उम्मीदवार के नाम सूची में हैं, पर कैंट से मोहम्मद हसन रूमी और हाजी परवेज अंसारी का पत्ता साफ है। इनकी जगह युवा इमरान को बैठक में शामिल होने के लिए दावतनामा भेजा गया है। वहीं गोविंदनगर की उम्मीदवार रहे सुनील शुक्ला को भी आंमत्रित नहीं किया गया। जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले कैंट से मोहम्म्द हसन रूमी को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन अतीक अहमद का नाम आने के बाद इनका दावेदारों की सूची से नाम काट दिया गया। लेकिन अखिलेश यादव ने अतीक की जगह परवेज अंसारी को टिकट दे दिया। पर कांग्रेस के साथ गठबंधन हो जाने के चलते यह सीट पंजा के खाते में चली गई। जिसके चलते मोहम्मद हसन रूमी और परवेज अंसारी ने अंदरखाने बगावत की और इसी के चलते उन्हें बैठक से नजरअंदाज कर नया चेहरा डॉक्टर इमरान को इनवाइट किया गया है।


2019 के साथ 2022 की तैयारी
जिस तरह से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने गोविंद नगर से सुनील शुक्ला और कैंट से मोहम्मद हसन रूमी को बैठक में नहीं बुलाया, इससे यह बात निकलकर आ रही है कि पार्टी 2019 के साथ ही 2022 की तैयारी और भावी उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्र में प्रचार-प्रसार करने का आदेश दे सकती है। अगर जानकारों की मानें तो बैठक के दौरान सपा नेताओं से बूथ एजेंड के साथ जातीय समीकरणों पर विस्तार से चचा हो सकती है। सिकंदरा में पार्टी काटे का चुनाव लड़ा, लेकिन दूसरे गुट के भीतरघात करने के चलते हार का सामना उठाना पड़ा। बैठक में शामिल होने वाले सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र के भीतरघात करने वाले सपाईयों का ब्योरा लेकर जाएंगे और तत्वों के साथ अपनी बात राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखेंगे।