17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Baneshwar Shiv Mandir: वो शिव मंदिर, जहां बिना जल चढ़ाए पूरी नहीं होती कांवड़ियों की मन्नतें, अदृश्य आत्मा रोज करती है पहली पूजा

Baneshwar Shiv Mandir: यूपी के कानपुर में एक ऐसा शिव मंदिर है। जहां सावन में बिना जल चढ़ाए कांवड़ियों की मनोकामनाएं पूरी नहीं होती। इस ‌शिव मंदिर में आज भी एक अदृश्य आत्मा पहली पूजा करती है।

3 min read
Google source verification
Baneshwar Shiv Mandir: वो शिव मंदिर, जहां बिना जल चढ़ाए पूरी नहीं होती कांवड़ियों की मन्नतें, अदृश्य आत्मा रोज करती है पहली पूजा

Baneshwar Shiv Mandir: वो शिव मंदिर, जहां बिना जल चढ़ाए पूरी नहीं होती कांवड़ियों की मन्नतें, अदृश्य आत्मा रोज करती है पहली पूजा

Baneshwar Shiv Mandir: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में एक ऐसा शिव मंदिर है। जहां का रहस्य आजतक किसी की समझ में नहीं आया। बताया जाता है कि यहां हर रोज सुबह मंदिर खुलने से पहले ही भगवान शिव की पूजा हो जाती है। हालांकि यह पूजा कौन करता है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। माना जाता है कि यहां एक अदृश्य आत्मा हर रोज सबसे पहले आकर भगवान शिव की पूजा करती है। इसके अलावा सावन मास में यहां बिना जल चढ़ाए कांवड़ियों की मन्नतें पूरी नहीं होती। यह मंदिर कानपुर शहर से दूर बनीपारा गांव में बाणेश्वर शिव मंदिर के नाम से स्थित है।

सावन (Sawan 2024) में जल चढ़ाने मात्र से पूरी हो जाती हैं सभी मनोकामनाएं

पौराणिक कथाओं और लोकोक्तियों की मानें तो बनीपारा के बाणेश्वर शिव मंदिर की स्‍थापना सतयुग में हुई थी। यहां राजा बाणेश्वर की बेटी सबसे पहले भगवान शिव की पूजा करती थी। तब से अब तक इस शिवलिंग पर सबसे पहले सुबह कौन पूजा करता है, इसका रहस्य आज तक लोगों की समझ से परे है। आस-पास के लोगों का कहना है कि हजारों साल से मंदिर में सुबह-सुबह शिवलिंग पूजा मिलता है। यहां के लोगों की आस्था है कि सावन के सोमवार उपवास रखने के बाद यहां जल चढ़ाने मात्र से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है।

दैत्यराज वाणासुर की राजधानी में स्‍थापित है (Baneshwar Shiv Mandir) बाणेश्वर शिव मंदिर

कानपुर के बनीपारा गांव में स्थित शिव मंदिर का अलग ही पौराणिक महत्व है। यह लोगों की अटूट आस्था का केंद्र तो है ही। इसके साथ ही सतयुग से इसका इतिहास जुड़ा है। कानपुर का इतिहास ग्रंथ के लेखक और वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी के अनुसार सिठऊपुरवा (श्रोणितपुर) दैत्यराज वाणासुर की राजधानी थी। दैत्यराज बलि के पुत्र वाणासुर ने मंदिर में विशाल शिवलिंग की स्थापना की थी। श्रीकृष्ण वाणासुर युद्ध के बाद स्थल ध्वस्त हो गया था। परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने इसका जीर्णोद्धार कराकर वाणपुरा जन्मेजय नाम रखा था। अपभ्रंश रूप में बनीपारा जिनई हो गया। मंदिर के पास शिव तालाब, टीला, ऊषा बुर्ज, विष्णु व रेवंत की मूर्तिया पौराणिकता को प्रमाणित करती हैं।

Baneshwar Shiv Mandir को नष्ट करने का मुगल शासकों ने किया था असफल प्रयास

कानपुर के बनीपारा शिव मंदिर की मान्यता है कि यहां गंगाजल चढ़ाए बिना कांवड़ियों की मन्नतें पूरी नहीं होती हैं। कहा जाता है कि मुगल शासकों ने इसे नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इस मंदिर के पुजारी किशन बाबू ने बताया कि मंदिर के संबंध में कथा है कि सतयुग में राजा बाणेश्वर थे वो सतयुग से द्वापरयुग तक राजा रहे हैं। बाणेश्वर ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने बाणेश्वर को दर्शन दिए और इच्छा वरदान के लिए कहा तो उन्होंने भगवान शिव को ही मांग लिया। इसपर भगवान शिव ने ये शिवलिंग दिया। बाणेश्वर ने ही इस शिवलिंग को यहां स्‍थापित कर मंदिर का निर्माण कराया।

यह भी पढ़ें : बांके बिहारी को मिला अनंत-राधिका की शादी का न्योता, मैरिज में जाएंगे प्रसादी और अंगवस्त्र

Baneshwar Shiv Mandir में नाग पंचमी पर लगता है कुश्ती मेला, कई जिलों से पहुंचते हैं पहलवान

मंदिर के पुजारी किशन बाबू ने बताया कि इस शिव मंदिर के प्रांगण में हर साल नाग पंचमी को कुश्ती दंगल का आयोजन होता है। इसमें कई जिलों के पहलवान हिस्सा लेते हैं। इस मंदिर की दूसरी खास बात ये है कि यहां बिना गंगा जल चढ़ाए कांवड़ियों की मन्नतें पूरी नहीं होती। इसके अलावा जो श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ यहां शिवलिंग पर जल चढ़ाता है। उसकी हर मनोकामना सहज में ही पूरी हो जाती हैं। इन्हीं मान्यताओं के चलते सावन माह में यहां कांवड़ियों की अच्छी खासी भीड़ रहती है।