
अंग्रेजों ने कराई थी इस शिवलिंग की खुदाई, फिर अचानक चमत्कार देख उड़ गए थे होश
अरविंद वर्मा
कानपुर देहात-सावन माह के अंतिम सोमवार के चलते कानपुर देहात के जगह जगह शिव मंदिरों में श्रद्धालु जलाभिषेक व पूजा अर्चना कर रहे हैं। वहीं जिले के रनियां कस्बा क्षेत्र में स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर की अपनी अलग विशेषता है। करीब 2 शताब्दी पुराने अंग्रेजों के जमाने के इस मंदिर को सावन के अंतिम सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग के अंत का पता लगाने के लिए अंग्रेजों ने इसकी खुदाई कराई थी। महीनों चली खुदाई के बाद भी शिवलिंग का गहराई में जाकर भी छोर नही मिला था और अंत मे मजदूर पाताल के निकट पहुंच गए थे। थक हारकर अंग्रेजों ने खुदाई का कार्य बंद कर दिया था। तभी से इस मंदिर का नाम पातालेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया।
धीरे धीरे मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ गयी और यह शिव मंदिर दूर दराज तक विख्यात हो गया। सावन के अंतिम सोमवार को यहां विशाल संगीतमय रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में मंदिर में आज 31 ब्राम्हणों के द्वारा रुद्राभिषेक का कार्यक्रम सम्पन्न कराया गया, जिसमें रनिया कस्बा क्षेत्र के तमाम श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। आपको बता दे प्राचीन काल से रनियां कस्बा स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
श्रद्धालु बताते हैं कि बाबा भोलेनाथ के दरबार से जिस भक्त ने जो भी मांगा है, बाबा भोलेनाथ ने उस भक्त की हर मनोकामना पूर्ण की है। मंदिर के पुजारी श्यामजी तिवारी ने बताया कि बाबा भोलेनाथ के दरबार में जो भक्त सच्ची आस्था को लेकर आते हैं तो बाबा पातालेश्वर उन भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। हर साल सावन माह के आखिरी सोमवार को बाबा पातालेश्वर महादेव मंदिर में अनेकों वर्षो से रुद्राभिषेक का कार्यक्रम विधि विधान से सम्पन्न कराया जाता है।
Published on:
12 Aug 2019 03:45 pm

बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
