
कानपुर . दुराचारी संत आसाराम बापू को सजा दिलाने में अहम किरदार राहुल सचान लापता है। उसके माता-पिता बेटे का चेहरा देखने की उम्मीद के साथ गांव को आने वाली सडक़ को निहारते रहते हैं। किसी समय आसाराम के आश्रम की बड़ी जिम्मेदारियां देखने वाले राहुल के माता-पिता को बेटे की हत्या की आशंका है। गौरतलब है कि कानपुर के घाटमपुर निवासी राहुल की मुख्य गवाही पर ही आसाराम बापू उर्फ असुमल हरपलानी को आश्रम की बच्ची के साथ यौनाचार करने के मामले में उम्रकैद की सजा मिली है।
माता-पिता ने आखिरी बार 2004 में देखा था चेहरा
कानपुर शहर के सजेती थानाक्षेत्र के निमधा गांव के रामकुमार सचान और उनकी पत्नी पुष्पा सचान पिछले तीन दिन से हाई-वे से गांव की ओर आने वाले काली सडक़ पर टकटकी लगाए बैठे रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि दुराचारी संत को सजा मिलने के बाद उनका बेटा जिंदा होगा तो घर जरूर लौटेगा। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय में इंजीनियर रह चुके रामकुमार बताते हैं कि वर्ष 1973 में मुंबई में तैनाती के दौरान स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद जर्मनी और इराक चले गए। नब्बे के दशक में बारत लौटे तो छोटा बेटा राहुल सचान आसाराम के साथ अहमदाबाद स्थित आश्रम में रहने लगा, जबकि बड़े बेटे पंकज की वर्ष 1999 में किडनी की बीमारी के कारण मौत हो गई।
जोधपुर में चाकुओं से हमला, तीन साल से खबर नहीं
अतीत के पन्नों को पलटते हुए रामकुमार सचान ने बताया कि उन्हें आसाराम का किरदार अच्छा नहीं लगता था, इसी नाते वर्ष 2003 में राहुल को मुंबई बुलाकर ऑडियो एडिटिंग की ट्रेनिंग दिलाकर फिल्म निर्माण क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए समझाया, लेकिन राहुल के सिर पर आसाराम की भक्ति का भूत सवार था। राहुल की मां पुष्पा बताती हैं कि वर्ष 2004 में गांव के पैतृक मंदिर के जीर्णोद्वार के समय राहुल को आखिरी बार भंडारे के समय देखा था, इसके बाद सिर्फ टेलीफोनिक संवाद हुआ। पिता बताते हैं कि राहुल ने कुछ साल बाद टेलीफोन पर बताया था कि आसाराम के आश्रम में लड़कियों के साथ दुराचार होता है। इसी दरम्यान वर्ष 2013 में यूपी के शाहजहांपुर की एक लडक़ी ने आसाराम पर दुराचार का मामला दर्ज करा दिया तो राहुल की गवाही पर पुलिस ने उसे मुख्य गवाह बनाकर मामले को आगे बढ़ाया। वर्ष 2015 की फरवरी में जोधपुर कोर्ट के परिसर में राहुल पर चाकुओं से हमला किया गया। इसके बाद वह लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में पुलिस के पहरे में रहता रहा, लेकिन नवंबर 2015 को कैसरबाग बसअड्डे से गायब हो गया। बस में सवार होते समय राहुल ने अपनी सुरक्षा में तैनात सिपाही अमित सिंह से एक दिन बाद लौटने का वादा किया था, लेकिन लौटे नहीं।
पांच साल से कोई खबर नहीं, मौत की आशंका
आसाराम को आजीवन कैद की सजा के बाद राहुल के पिता रामकुमार से चेहरे पर सुकुन है। उन्हें उम्मीद है कि राहुल जिंदा होगा तो जल्द वापस आएगा। अलबत्ता उन्हें किसी अनहोनी की आशंका भी रहती है। उनका कहना है कि आसाराम ने ही उसके पुत्र को अगवा कराने के बाद अप्रिय घटना कराई होगी। राहुल की खोजबीन के दौरान उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन हरदोई जनपद में मिली थी, लेकिन उसके बाद से फोन स्विच-ऑफ हो गया। लखनऊ में बालागंज मोहल्ले में राहुल सचान के पड़ोसी रहे इस्माइल बताते हैं कि राहुल किसी से मतलब नहीं रखता था, वह घर आने के बाद सिर्फ छत पर टहला करता था। गौरतलब है कि राहुल आसाराम तथा उनके पुत्र नारायण साईं के खिलाफ दो मामलों में गवाह थे। आसाराम का असली नाम असुमल हरपलानी है। 17 अप्रैल, 1941 को मौजूदा समय में पाकिस्तान के हिस्से बिरानी नाम में जन्मे असुमल ने पिता की मौत के बाद मजिस्ट्रेट ऑफिस के सामने कुछ समय तक चाय भी बेची। बताते हैं कि आसाराम 15 साल की उम्र में ही घर से भागकर आश्रम चला गया था। बाद में किसी तरह उसके घरवाले उसे वापस लाए और उसकी शादी लक्ष्मीदेवी से कराई गई। लक्ष्मी देवी से आसाराम के दो बच्चे हुए नारायण साईं और भारती देवी।
Published on:
27 Apr 2018 02:47 pm
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