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Atal Bihari Vajpayee : 6 दिन पहले गुजार गए करीबी दोस्त पन्नालाल, अटल जी के लिए जारी है दुआवों का दौर

Atal Bihari Vajpayee Health Condition : पूर्व प्रधानमंत्री के करीबी मित्र थे पन्नालाल, पिछले सप्ताह हुआ था देहान्त, बीमारी की खबर से परेशान परिवार

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कानपुर के जय और वीरू की टूट गई जोडी, ताम्बे के बाद अटल जी की तबियत गिबड़ी

कानपुर। पूर्व प्रधानमीं अटल बिहारी वाजपेयी की तबियत खराब होने की खबर जैसे कानपुर पहुंची, वैसे पूरा शहर सावन के माह के शिवमंदिरों में जाकर उनके जल्द से जल्द ठीक होने के लिए पूजा-पाठ की। वहीं भाजपा के कद्दावर नेता और अटल जी करीबी मित्रों में से एक पन्नालाल तांबे के परिजन भी रो पड़े। बेटे, कृष्णालाल तांबे ने बताया कि पिता जी का निधान एक सप्ताह पहले उर्सला अस्पताल में हुआ था। वो और पूर्व प्रधानमंत्री अटली जी गहरे मित्र थे। अटल जी कानपुर में पढते थे तब पिता जी से उनकी मुलाकात हुई और दोनों दोस्त बन गए। ताम्बे पिछले तीन साल से बीमार चल रहे थे और बावजूद वो टीवी बीजेपी नेताओं के जरिए अपने मित्र की तबियत की जानकारी लेते रहते थे।

बीजेपी-संघ के वटवृक्ष अटल और ताम्बे
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की तबियत बिगडने की खबर जैसे ही कानपुर आई, यहां उनके समर्थकों ने पूजा-पाठ शुरू कर दी। परमठ मंदिर के अजय पुजारी ने सबह उनके स्वस्थ्य होने के लिए भगवान आन्देश्वर से मन्नत मांगी तो बीजपी नेता भी दिल्ली में अपने करीबियों के जरिए उनकी हालत के बारे में जानकारी ले रहे हैं। जबकि अटल जी के मित्र पन्नालाल ताम्बे के परिजनों ने सूबह से पूजा-पाठ कर जल्द से जल्द स्वस्थ्य होने के लिए भगवान शिव से मन्नत मांगी। स्व पन्नालाल ताम्बे की बहू प्रमलता ताम्बे ने कहा कि अटल जी जैसे नेता न कभी हुआ है और न कभी होगा। जब वो देश के प्रधानमीं थे तब अक्सर फोन कर हमारे ससुर को दिल्ली बुलाते थे। वो दिल्ली जाते और कई-कई माह वहीं रहते और बीजेपी के लिए काम करते थे। हमारी भगवान से प्रार्थना है कि उनकी तबियत जल्द से जल्द ठीक हो जाए।

डीएबी कॉलेज में हुई मुलाकात
भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी मित्रों में से एक पन्नालाल तांबे का बीते शुक्रवार की देर शाम निधन हो गया था। वह 85 वर्ष के थे। बृहस्पतिवार को उन्हें उर्सला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पिछले तीन वर्षो से वह बीमार चले रहे थे। पन्नालाल तांबे के बेटे कृष्णालाल तांबे ने बताया कि उनका जन्म रायपुरवा में हुआ था। जहां उनका जन्म हुआ उस जगह को पन्नालाल का हाथा कहा जाता है। उनकी शुरुआती शिक्षा आगनबाड़ी में हुई थी। इसके बाद उन्होंने आचार्य नगर स्थित भारतीय विद्यालय महेशचंद्र चौधरी से इंटर की पढ़ाई की थी। उन्होंने डीएवी डिग्री कॉलेज से बीएड किया। यहीं पर पन्नालाल की मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हुई। पन्नालाल स्वभाव से मृदुभाषी थे तो जल्द ही उनकी अटल जी के साथ पटरी खाने लगी। दोनों के राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से हुई थी।

एक साथ दोनों गए जेल
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपात काल लागू किया उस समय पन्नालाल तांबे और अटल जी साथ में ही जेल गए थे। जब दोनों जेल से छूटे तो जनसंघ से जुड़ गए। उस समय भाजपा का चुनावचिन्ह दीपक हुआ करता था। जेल से छूटने के बाद दलित समाज में पन्नालाल की छवि और निखर कर सामने आई। भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने बताया कि ताम्बे 1977 में वो एमएलसी रहे। जब 1998 में पूर्ण बहुमत से अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बली तो ताम्बे को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह सफाई आयोग के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे। मैथानी बताते हैं कि ताम्बे संघ के कट्टर समर्थक थे। मोहन भागवत जब शहर आए थे तो वो उन्हें देखने के लिए उनके घर गए थे। मोहन भागवत ने उनसे अकेले में आधे घंटे तक बातचीत की थी।

दलितों के बड़े नेता थे तांबे
पन्नालाल तांबे दलितों के बड़े नेता थे। जब अटल बिहारी बाजपेई ने इन्हें राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष बनाया तो वाल्मीकि समाज में इनकी छवि उभर कर सामने आई। दलित नेता होने के चलते हमेशा से इन्हें पार्टी में अच्छे पद मिले। पन्नालाल तांबे की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है। बतौर संघ प्रचारक के रूप में प्रधातमंत्री नरेंद्र मोदी जब-जब कानपुर आए, तब-तब वो ताम्बे के घर जाकर बीजेपी के लिए जमीन तैयार करते थे। ताम्बे के बेटे ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिता जी के साथ निकल जाते और कानपुर की गलि-मोहल्लों में जाकर संघ व बीजेपी के लिए जमीन तैयार करते थे। 2013 में बतौर सीएम नरेंद्र मोदी कानपुर शंखदान रैली के लिए आए तो उन्होंने कार भिजवा कर पिता जी को बुलवाया और अपने साथ मंच पर बैठाया।

कानपुर में पढ़े थे अटल जी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर के गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। स्नातक तक की शिक्षा उन्होने ग्वालियर से ही पूरी की। इसके बाद राजनीति शास्त्र की डिग्री के कानपुर का रूख किया पर रूपया हाथो आड़े आ गया। यह बात वहां के तत्कालीन राजा जीवाजीराव सिंधिया के पास जब पंहुची तो उन्होंने बाजपेयी को छात्रवृत्ति देने का फैसला कर दिया। जिसके मुताबिक उन्हे हर माह 75 रूपए मिल जाते थे और इन्ही रूपयों के बदौलत बाजपेयी कानपुर के डीएवी कॉलेज से लगभग चार साल तक शिक्षा ग्रहण किया। कॉलेज के प्रोफेसर अनूप सिंह के मुताबिक अटल बिहारी जी ने 1945-46, 1946-47 के सत्रों में यहां से राजनीति शास्त्र में एमए किया। जिसके बाद 1948 में एलएलबी में प्रवेश लिया लेकिन 1949 में संघ के काम के चलते लखनऊ जाना पड़ा और एलएलबी की पढ़ाई बीच में ही छूट गई और फिर वो संघ के जुड़ गए।