
कोरोना पीडि़तों पर असरदार साबित हुई एजीथ्रोमाइसिन दवा
कानपुर। कोरोना वायरस का अभी तक सटीक इलाज नहीं मिल पाया है। दुनिया भर में इसकी दवा बनाने को लेकर अलग-अलग परीक्षण चल रहे हैं। कई बार दवा बनाने के दावे हुए पर क्लीनिकल परीक्षण तो कभी मानवीय परीक्षण में दवा फेल होती रही। इस बीच कानपुर के डॉक्टरों ने एक दवा से कोरोना वायरस के बेअसर होने का दावा किया है। यह दावा अचानक नहीं बल्कि एक माह से ज्यादा समय तक मरीजों पर किए गए प्रयोग के बाद किया गया है। हैलट के कोविड-१९ अस्पताल में इलाज करा रहे कोरोना संक्रमित रोगियों को दिए जाने वाले दवा के डोज में इस दवा का प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह है दवा का डोज
शहर के हैलट और सरसौल सीएचसी पर कोरोना संक्रमित रोगियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का दावा है कि कोरोना रोगियों का संक्रमण रोकने में एजीथ्रोमाइसिन दवा बहुत असरदार साबित हो रही है। कई मरीजों पर मिले सकारात्मक नतीजों के बाद डॉक्टरों का मानना है कि एजीथ्रोमाइसिन की खुराक के साथ प्रतिदिन दो टेबलेट पैरासिटामाल और मल्टी विटामिन की खुराक दी गई। इसके अलावा उन्हें पौष्टिक भोजन भी दिया गया। इससे रोगी १४ दिनों में ठीक हो रहे हैं। एनआरआई सिटी में मिला कानपुर का पहला मरीज भी इसी खुराक से ठीक हुआ था।
नहीं पड़ रही वेंटीलेटर की जरूरत
हैलट और सरसौल सीएचसी से अब तक आधा सैकड़ा कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। खास बात यह रही इनमें से किसी भी मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत नहीं पड़ी। दवा का असर ही इतना था कि उसने कोरोना वायरस को शरीर में ज्यादा नहीं पनपने दिया। नियमित तौर पर दवा खाने वालों में कोरोना वायरस का प्रमुख लक्षण तक उभर नहीं सका।
इस तरह मिल रहा फायदा
डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना वायरस से पीडि़त रोगी के फेफड़ों में निमोनिया हो जाता है। इसके बाद बैक्टीरिया इसे और श्वसनतंत्र को डैमेज करने लगता है। जबकि एंटीबायोटिक के असर से बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। जिससे श्वसन तंत्र सुरक्षित रहता है और रोगी गंभीर स्थिति तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा एजीथ्रोमाइसिन दवा भी फेफड़ों को संक्रमण से बचाती है।
Published on:
07 May 2020 03:10 pm
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