
history sheetar satish kashyap
कानपुर. फीलखाना थाना क्षेत्र के कमला टॉवर के पीछे हनुमान मंदिर से कुछ दूरी पर बुधवार को दिनदहाड़े हिस्ट्रीशीटर व भाजपा नेता सतीश कश्यप उर्फ बब्बन छूरेबाज की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने मृतक के नौकर को भी नहीं बख्शा और उसके सीने में भी खंजर से वार कर मौत के घाट उतार दिया। दोहरे हत्याकांड के बाद शहर में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर देर रात मुख्य आरोपी शिव पर्वत को आलाकत्ल के साथ अरेस्ट कर लिया। आरोपी ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि मोहल्ले की एक महिला के साथ मेरा प्रेम-प्रसंग चल रहा था। बब्बन ने भी उससे संपर्क बना लिया दोनों के बीच दोस्ती हो गई। मैने उसे मना किया, पर वो नहीं माना। इसी के चलते मैने उसे रास्ते से हटाने का प्रण कर लिया। जब वो घर से बाहर जा रहा था तो साथियों समेत हमला कर उसका मर्डर कर दिया।
... नहीं माना तो घोपा चाकू
फीलखाना थाना क्षेत्र में प्रापर्टी का काम करने वाला हिस्ट्रीशीटर व भाजपा नेता सतीश कश्यप व उसके नौकर ऋषभ की धारदार हथियार से murder कर दी थी। दिन दहाड़े हुई हत्या के चलते पुलिस के काम-काज पर सवाल खड़े होने लगे। एसएसपी अखिलेश मीणा ने हत्याकांड का खुलाशा और आरोपियों को पकड़ने के लिए एसपी अनुराग आर्या को लगाया। एसपी ने मुखबिर की सूचना पर घंटाघर से शिव पर्वत को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में आरोपी शिव पर्वत ने बताया कि उसका पड़ोस की एक महिला से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। लेकिन कुछ माह पहले सतीश उर्फ बब्बन भी महिला के घर आने-जाने लगा। महिला के साथ बब्बन का प्रेम-प्रसंग हो गया। मैने उसे बहुत बार मना किया, लेकिन वो मुझे उल्टा जेल भिजवाने की धमकी देने लगे। इसी के चलते मैने उसे मौत के घाट उतार दिया।
ऋषभ पाण्डेय को दौड़ाकर घोपा खंजर
पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि बब्बन को बचाने के लिए उसका ऋषभ पाण्डेय आ गया। इसी के चलते उसको भी रास्ते से हटा दिया। आरोपी ने बताया कि मालिक की मौत होने के बाद ऋषभ गली बंद हो जाने के चलते छिप नहीं सकता और उस पर भी चाकू से वार कर दिया। ऋषभ के पिता ने बताया कि वो सतीश कश्यप के यहां नौकरी करता था। सुबह घर से सीधे वो सतीश के घर गया और करीब दस बजे हमें अपने इकलौते बेटे की हत्या की जानकारी मिली। मृतक के पिता ने कहा कि सतीश और शिव पवर्त के बीच विवाद था, जिसके चलते दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। शिप पर्वत भी नामी हिस्ट्रीशीटर है और बब्बन कभी इसके लिए ही काम करता था।
छूरेबाजों के नाम से जाना जाता था
शहर में 90 के दशक में कई छूरेबाज थे और उनके नाम से आम पब्लिक के साथ-साथ पुलिस भी डरती थी। श्यामबाबू, पहाड़ी, ज्वाला मुर्रा, भूरा सहित अनेक शातिरों ने छूरे की गूंज से कानपुर थर्राता था। इसके बाद यहां राजू इलाहाबादी ने सबसे पहले बम चलाया था। उसके बाद से यहां देसी बम बनने लबे। पुराने इलाकों में छूरेबाजी की घटना से क्षेत्रीय बुजुर्गों को छूरेबाज याद आ गए। महेश्वरी मोहाल निवासी लल्लू यादव कहते हैं कि पहले छोटे-छोटे लड़के छूरा रखा करते थे। जरा सी बात पर लोगों को छूरा ले दौड़ा लिया करते थे। छूरेबाज एक ही वार में जान लेने लिए कुख्यात थे।
90 के दशक में बब्बन छूरेबाज का था जलवा
फीलखाना क्षेत्र में रहने वाला बब्बन का जलवा 90 के दशक में था। इसके नाम की पूरे इलाके में दहशत थी। यहां पर कईबार फायरिंग और गैंगवार की घटनाओं में बब्बन का नाम आया। इस दौरान बब्बन के खिलाफ आर्धा दर्जन से ज्यादा अपराधिक मामले थानों में दर्ज हो गए। उसकी हिस्ट्रीशीट फीलखाने में तैयार हुई। मुकदमो से बचने के लिए बब्बन ने अपना चोला बदल लिया और बसपा ज्वाइन कर खादी धारण कर लिया। 2012 के चुनाव के वक्त इसने पार्टी बदली और सपा की सदस्यता ले ली। 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद बब्बन भाजपा में शामिल हो गया और निकाय चुनाव में प्रचार भी किया। राजनीति में आने के बाद इसकी क्षवि तो सुधर गई, लेकिन काम पहले की तरह से करता रहा।
Published on:
30 Nov 2017 08:14 pm
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