
कानुपर. एक सप्ताह पहले पूरे देश ने होली का त्योहार ने धार्मिक तौर पर मनाया था लेकिन क्रान्ति के शहर कानपुर में आज भी होली मनायी जा रही है लेकिन एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में। यहॉ भारत माता की चूनर को धानी रंगने के लिये अबीर गुलाल उड़ाये जा रहे हैं और स्वतन्त्रता संग्राम की एक खास घटना का जश्न मनाने के लिये पूरा शहर रंगो से सराबोर है। गंगा के किनारे लगे होली मेले की निराली परंपरा में आज गंगा जमुनी तहजीब का रंग झमाझम बारसा। गंगा मेला में आज मजहबी, ऊंच, जाति व गोत्र के बंधन से मुक्त लाखों की संख्या में कनपुरिया रंगों की धार में तार - तार हो गए। कोई धर्म, जाति या अन्य धार्मिक संगठन नहीं होगा दो आज इस गंगा मेला में भागीदार न बना हो। हटिया बाजार से आज कई आकर्षण ठेले निकले, जिसमें बैलों का ठेला मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। सरसैया घाट पर गंगा मेले का आयोजन था, जहां कनपुरियों ने क्रांतिकारियों की याद में जमकर होली खेली।
हर धर्म-मजहब के लोग शामिल
हटिया का गंगा मेला रंग ठेला अबकी ज्यादा खास था। अंग्रेज अफसर के रूप में क्रांतिकारियों पर हंटर चलाते बच्चों की झांकियां, ऊंट, घोड़े और भगवान भोलेनाथ की सवारी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। रंग से भरे बड़े बड़े ड्रम रखने के लिए तीन भैंसा ठेला, तीन ट्रैक्टर और छह टेंपो ट्राली होरियारों के साथ थे। सुबह 9ः30 बजे डीएम ने हटिया के रज्जन पार्क में लगे होली मेले के इतिहास के शिलालेख का अनावरण किया। इस मौके पर पुलिस का बैंड ने सलामी दी । डीएम रंग ठेले को हरी झंडी.दिखाकर रवाना किया। बिरहाना रोड काहूकोठी सहित कई जगह मटकी फोड़ का आयोजन किया गया। रंग ठेले में सैकड़ों व्यापारी और क्षेत्रीय लोग शामिल रहे। रंग ठेला हटिया के रज्जन बाबू पार्क से सुबह 10 बजे उठा और यहां से जनरलगंज बाजार, मनीराम बगिया, मेस्टन रोड, चौक, टोपी बाजार, कोतवालेश्वर मंदिर चौक, चौक सराफा, कोतवाली चौराहा, संगमलाल मंदिर, कमला टावर, फीलखाना, बिरहाना रोड, नयागंज चौराहा, मारवाड़ी कालेज, हुलागंज, नयागंज डाकखाना, लाठी मोहाल, जनरलगंज से हटिया रज्जन लाल पार्क में 2ः30,पर लौटेगा। गंगा घाटों पर गोताखोरों के साथ जल पुलिस की तैनाती रहेगी। एसएसपी अखिलेश कुमार ने बताया गंगा मेले के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है। पुलिसकर्मी डंडे, हेलमेट, बाडी प्रोटेक्टर के साथ ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। सरसैया घाट के मुख्य मेला आयोजन स्थल पर सुबह ही बम निरोधक दस्ते चेकिंग करेंगे।
यह रहा गंगा मेले का इतिहास
क्रान्तिकारियों के इस शहर में एक सप्ताह तक होली मनाने की परम्परा स्वाधीनता संग्राम की एक घटना से जुड़ी हुई जो अंग्रेजी हुकूमत की हार का प्रतीक है। बात 1942 के आसपास की है। उस समय कुछ देशभक्त नौजवानों की एक टोली ने हटिया इलाके से निकल रहे अंग्रेज पुलिस अधिकारियों पर रंग डालकर ’’ टोडी बच्चा हाय हाय ‘‘ के नारे लगाये थे। इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत का कहर बरपा हुआ। घुड़सवार पुलिस ने डण्डे बरसाते हुए कई जियाले नौजवानों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। तब स्वतन्त्रता सेनानी बाबू गुलाब चन्द्र सेठ की अगुवाई में ऐसा जन आन्दोलन खड़ा हुआ कि ब्रिटानिया हुकूमत थर्रा उठी। सात दिनों तक चले संघर्ष के बाद सभी गिरफ्तार देशभक्त जियाले अंग्रेजी कैद से छुड़ा लिये गये। तब देशभक्तों ने अपनी जीत का जश्न मनाने के लिये होली का मेला लगाया और जमकर अबीर गुलाल उड़ाया। इस ऐतिहासिक घटना के दिन अनुराधा नक्षत्र था और तब से हर साल होली के बाद अनुराधा नक्षत्र पर होली मेला लगाने की परम्परा पड़ गयी।
नहीं बदला रंग और स्वरूप
जमाना बदला है , दौर बदले हैं लेकिन कानपुर के होली मेला का स्वरूप भी वैसा ही है। आज भी यहॉ फाग में देशभक्ति के गीत गाये जाते हैं और फागुनी मस्ती भी देशभक्ति की अलख जगाने का जरिया बनती है। ऐतिहासिक हटिया इलाके से होली मेले का ठेला निकलता है , उसमें बृज की रासलीला के स्वॉग रचाये जाते हैं। सतरंगी पिचकारी के रंगों की बौछार इतने तेज होते हैं कि तिमंजिले पर खड़ी बालाऐं भी भीग जायें। और गुलाल के ऐसे बादल छाते हैं कि आसमान नीला नहीं सप्तरंगी नजर आता है। गंगा मेले के आयोजक ज्ञानेंद्र विश्नोई बताते हैं कि 70 सालों से हटिया से रंगबाजों की टोली भैंसों पर सवार होकर निकलती है जो पूरे शहर में घूमती है और शाम कसे सरसैया घाट पर भीड़ जमा होती है। सभी मिलकर रंग-गुलाल आपस में लगाते हैं और अगले वर्ष का इंतजार कर अपने-अपने घरों को चले जाते हैं।
1958 में कलेक्टर को माफी पड़ी थी मांगनी
ज्ञानेंद्र विश्नोई बताते हैं कि गंगा मेला की परंपरा तोड़ने के लिए कईबार प्रयास किए गए, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। कहते हैं, 1958 में कानपुर के कलेक्टर दलजीत सिंह राठौर थे। कलेक्टर ने गंगा मेले का आयोजन होली के दूसरे दिन कराए जाने का आदेश दिया। पर हटिया के होरियारे नहीं मानें। मूलगंज से लेकर हटिया तक रंगों से भरे ड्रम रख दिए गए। इस दौरान यहां से पुलिस-प्रशासन के जो भी अफसर निकले उन्हें पकड़ कर रंगा गया। डीएम डर गए और उन्होंने गंगा मेला तय समयनुसार कराए जाने का आदेश देने के साथ ही माफी मांगी।
Updated on:
08 Mar 2018 01:48 pm
Published on:
08 Mar 2018 12:22 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
