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बच्चों और परिवार की आड़ में बच निकलते बावरिया गैंग के लुटेरे

अब महंगी गाडिय़ों पर चलते और होटलों में ठहरते हैंपरिवार के साथ रहकर जहरखुरानी और लूट की करते वारदातें

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Bawariya gang, kanpur

बच्चों और परिवार की आड़ में बच निकलते बावरिया गैंग के लुटेरे

कानपुर। फतेहपुर बार्डर पर दो गाडिय़ों पर सवार बावरिया गैंग को दबोचकर पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। गैंग में महिलाओं और बच्चों को साथ लेकर ये प्रयागराज की ओर जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक बावरिया गिरोह अब महिलाओं और बच्चों की आड़ लेकर वारदातें करता है, और आसानी से बच निकलता है।

बच्चों को देखकर कोई शक नहीं करता
पकड़े गए लुटेरों ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के साथ होने से उन पर शक नहीं होता। भीड़भाड़ में चेन स्नेचिंग के बाद लूटा गया सामान ये लोग बच्चों के जरिए महिलाओं तक पहुंचा देते थे, अगर तलाशी ली जाती है तो इनके पास कुछ नहीं मिलता। अगर शक होने पर इन्हें पकड़ भी लिया जाए तो बच्चों और महिलाओं के चलते ये छोड़ दिए जाते हैं।

नई जगह पर नए नाम से जमाते डेरा
बावरिया गिरोह के लोग जगह बदलने के साथ नाम भी बदल लेते हैं। नई जगह पर नया नाम इन्हें शक के दायरे में नहीं आने देता। आबादी से दूर रहने के चलते इनके चेहरे भी जल्दी पहचाने नहीं जाते। दिन भर रेकी करके ये टारगेट तय करते और फिर रात में एक साथ कई जगह लूटपाट करते हैं।

महंगी गाडिय़ां, महंगे होटल
बावरिया गिरोह के लोग अब धर्मशालाओं में रुकने की बजाय महंगे होटल में ठहरते हैं। महंगी गाडिय़ां होने से भी ये बचकर निकल जाते हैं। होटलों में अलग-अलग रुककर ही ये लोग शिकार तय करते हैं। वारदात के बाद होटल में छिपे होने के कारण इन पर पुलिस का शक भी नहीं जाता।

ताला खोलने में माहिर
ये लुटेरे ताले खोलने में माहिर होते हैं। सफर के दौरान परिवार के साथ ये लोग भीड़ के बीच में आसानी से जगह बना लेते हैं और फिर लोगों के सूटकेस आदि का ताला खोलकर महंगी चीजें पार कर देते हैं।