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भीमराव अम्बेडकर विवि का डंका फिर से बजेगा, जल्द लौटेगा गौरव: अरविन्द दीक्षित

कभी आगरा विश्वविद्यालय का परिक्षेत्र उत्तर भारत में पंजाब तक हुआ करता था। यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता का कोई सानी नहीं रहा।

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Ruchi Sharma

Dec 14, 2016

Arvind Dikshit

Arvind Dikshit

कानपुर. कभी आगरा विश्वविद्यालय का परिक्षेत्र उत्तर भारत में पंजाब तक हुआ करता था। यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता का कोई सानी नहीं रहा। साक्षात्कारों में यहां के पढ़े हुए छात्रों को स्वतः वरीयता मिल जाती थी। ऐसा गौरव लाना मेरी पहली प्राथमिकता है। यह बात पत्रिका से बातचीत के दौरान डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के नवनियुक्ति कुलपति डॉक्टर अरविन्द दीक्षित ने कही। डॉक्टर दीक्षित ने मंगलवार को आगरा पहुंच कर कार्यभार संभाला है।
उन्होंने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय वर्तमान में डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना एक जुलाई 1927 को हुई थी। जिसके बाद से इस विश्वविद्यालय ने शैक्षिक क्षेत्र में बहुत तरक्की की और उत्तर भारत में यूपी के बड़े क्षेत्र के साथ पंजाब तक इसका परिक्षेत्र फैल गया था। परिक्षेत्र के साथ ही यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता ने भी कई दशकों तक पूरे उत्तर भारत में अपना स्थान बनाए रखा। लेकिन किन्हीं कारणों से शैक्षणिक स्तर में गिरावट आई है। जिसको रोका जाएगा और हर संभव प्रयास किया जाएगा जिससे विश्वविद्यालय का पुराना गौरव वापस लौट सके।

दीक्षित ने कहा कि इसके लिए भले ही मुझे कार्यालय में बैठने का समय न मिले पर इसके गौरव के लिए दिन-रात एक करने का काम किया जाएगा। उम्मीद है कि कर्मचारी भी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के लिए बराबर सहयोग करेंगें। बतातें चलें कि डॉक्टर दीक्षित विक्रमाजीत सिंह सनानत धर्म कॉलेज में रसायन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं जो भीमराव विश्वविद्यालय में अगले तीन साल के लिए कुलपति पद के लिए नियुक्ति हुए हैं।

आयोग का अनुभव आएगा काम

डॉक्टर अरविन्द दीक्षित ने बताया कि चार साल इलाहाबाद में माध्यमिक शिक्षा चयण आयोग में बतौर सदस्य चार साल काम किया है। आयोग का अनुभव विश्वविद्यालय में काम आएगा और उसके पुराने गौरव को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।