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करवाचौथ पूजन के पूर्व यहां महिलाएं करती हैं ये काम, मनोकामना होती है पूर्ण, बहुत प्राचीन है परंपरा

करवाचौथ पर्व पर इस देवयानी सरोवर का बडा ही महत्व है, जहाँ बडी तादात में व्रत रखने वालि महिलायें करवाचौथ पूजन के पूर्व दीपदान कर पति की लम्बी उम्र की कामना करती हैं।

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devyani

करवाचौथ पूजन के पूर्व यहां महिलाएं करती हैं ये काम, मनोकामना होती है पूर्ण, बहुत प्राचीन है परंपरा

कानपुर देहात-करवाचौथ पर महिला के लिए जितना महत्व अपने पति का होता है। उतना ही महत्व मूसानगर कस्बे में ऐतिहासिक देवयानी सरोवर का भी है, जहां करवाचौथ के मौके पर बड़ी तादात में महिलाएं दीपदान करती हैं और पति के खुशहाल व दीपक की रोशनी की तरह पति के रोशन जीवन की कामना करती है। दरअसल जिले के दक्षिण में स्थित देवयानी सरोवर का अलग महत्व है। यहां यमुना नदी इसके तट से होते हुए उत्तर दिशा की ओर बहती हैं, इसलिए इसे उत्तरगामिनी भी कहते हैं। प्राचीन समय से इसे छोटी गया भी कहा जाता है। इसलिए पितृपक्ष में भी यहां बड़ी संख्या में लोग पूर्वजों को पिंडदान देते हैं। करवाचौथ पर आज यहां सायं बेला में दीपदान का समारोह सम्पन्न होगा, जो जिले के आकर्षण का केंद्र बनता है। इसके बाद रामलीला कार्यक्रम का शुभारंभ होता है। समारोह आकर्षण का केंद्र बनेगा।

करवाचौथ पर महिलाओं की मान्यता

कस्बे के ऐतिहासिक देवयानी सरोवर के पीछे एक पौराणिक कहानी भी बताई जाती है। इस मान्यता के चलते करवाचौथ पर व्रत रखने वाली महिलाएं सरोवर मे असंख्य दीपों को प्रज्वलित कर दीपदान करती हैं और सांध्य बेला में चंद्रदेव का दीदार करने के बाद पूजन कर पतियों की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह प्रथा कई वर्षों से यहां चली आ रही है। जबकि सरोवर परिसर के नजदीक करवाचौथ की रात में परंपरागत धनुष यज्ञ का आयोजन भी होता है।

देवयानी सरोवर की दास्तां

बताया जाता है कि प्राचीनकाल में देवयानी सरोवर के पास घना जंगल था। उस समय दैत्यराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा व दैत्यगुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी जंगल में घूमने आई थीं। जंगल में सरोवर देखकर दोनों स्नान करने लगीं। वहां से गुजर रहे भगवान शंकर को आते देख देवयानी ने जल्दबाजी में शर्मिष्ठा के कपड़े पहन लिए। इससे गुस्से में आकर शर्मिष्ठा ने देवयानी को कुएं में धक्का दे दिया। कुएं के पास से गुजरे जाजमऊ के राजा यायाति ने पुकार सुनकर देवयानी को बाहर निकाला। इसके बाद शुक्राचार्य ने राजा यायाति से देवयानी का विवाह कर दिया। गुस्साए दैत्यराज वृषपर्वा ने शर्मिष्ठा से निकल जाने को कहा लेकिन राजा यायाति के आग्रह पर शर्मिष्ठा को देवयानी की दासी बनाने की शर्त पर वह राजी हो गए। विवाह के बाद राजा यायाति ने सरोवर को भव्य रूप प्रदान किया।

अरविंद वर्मा की रिपोर्ट