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गोबर और कचरे से तैयार होगी बॉयो सीएनजी

आने वाले दिनों में चीनी मिल के कचरे और गोबर से बड़े पैमाने पर बॉयो सीएनजी बनाने की तैयारी है।

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kanpur news

कानपुर. आने वाले दिनों में चीनी मिल के कचरे और गोबर से बड़े पैमाने पर बॉयो सीएनजी बनाने की तैयारी है। पहले चरण में प्रायोगिक रूप से सफलता मिलने के बाद वैज्ञानिकों ने इस कदम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान को एक साल के शोध के बाद इस प्रयोग में प्रारंभिक रूप से सफलता मिली है। शर्करा संस्थान अब इस प्रयोग को पॉयलट प्रोजेक्ट के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कचरे और गोबर से तैयार इस बॉयो सीएनजी का उपयोग वाहन चलाने के साथ ही रसोई में खाना पकाने में भी हो सकेगा।

चीनी मिल के कचरे और गोबर का होगा उपयोग

दरअसल चीनी मिलों में गन्ने से चीनी बनाने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में कचरा निकलता है जिसे प्रेसमड कहते हैं। यह कचरा किसी काम का नहीं होता है लेकिन वैज्ञानिक इसके उपयोग को लेकर कई तरह के प्रयोग लम्बे समय से करते रहे हैं। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की रिसर्च फेलो डॉक्टर शिखा सिंह ने डॉक्टर सीमा परोहा और डॉक्टर संतोष कुमार के निर्देश में इस कचरे की उपयोगिता पर शोध किया। प्रेसमड के साथ गोबर, सीवेज, सीवेज-गोबर, सीवेज-गोबर-हरी पत्तियां जैसे कई मिश्रणों के प्रयोग किये गए। लगभग एक साल तक चले शोध के दौरान गोबर और प्रेसमड के मिश्रण से बॉयो सीएनजी बनाने में सफलता मिली।

15 रूपये में तैयार होगा एक किलो बॉयो सीएनजी

इस प्रयोग में एक किलो बॉयो सीएनजी तैयार करने में 90 फीसदी प्रेसमड और 10 फीसदी गोबर का उपयोग किया गया। दोनों के मिश्रण को एक विशेष तरह की मशीन में डालते हैं जिसके बाद बॉयो गैस का निर्माण होता है। बॉयो गैस की स्क्रीनिंग से हाइड्रोजन सल्फाइड गैस को अलग कर लेते हैं। इसके बाद जो गैस प्राप्त होती है उसमें 95 फीसदी से अधिक मीथेन होती है। इससे बॉयो सीएनजी तैयार की जाती है। एक किलो बॉयो सीएनजी गैस के निर्माण पर इस प्रक्रिया में पंद्रह रूपये खर्च होंगे।

शर्करा संस्थान में लगाई जाएगी मशीन

बताया जा रहा है कि संस्थान ने इस इस प्रोजेक्ट के लिए तीन लाख रूपये की मशीन तैयार कराई है। बहुत जल्द इस मशीन से बॉयो सीएनजी तैयार करने का काम शुरू हो जाएगा। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के निदेशक प्रोफ़ेसर नरेंद्र मोहन कहते हैं कि इस बॉयो सीएनजी का उपयोग संस्थान में प्रयोग हो रहे सीएनजी के स्थान पर किया जाएगा। इसके लिए पॉयलट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है और मशीने भी आ चुकी हैं।