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मुरली मनोहर जोशी का टिकट कटा, तीन अन्य सांसद भी बेटिकट होंगे

लोकसभा चुनाव में कानपुर क्षेत्र के चार सांसदों के टिकट कटना तय, चर्चा है कि जोशी को उम्र के कारण तो अन्य को आचरण के कारण नहीं मिलेगा टिकट

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bjp may cut murli manohar joshi's candidature from kanpur

मुरली मनोहर जोशी का टिकट कटा, तीन अन्य सांसद भी बेटिकट होंगे

कानपुर. मिशन 2019 के लिए भाजपा ने संभावित उम्मीदवारों में जीत की संभावनाओं को टटोलना शुरू कर दिया है। इसी के साथ पार्टी ने मौजूदा सांसदों के कार्यकाल की समीक्षा के लिए निजी एजेंसी को काम सौंपा है। एजेंसी ने पहले चरण का सर्वे पूरा कर लिया है। सर्वे के मुताबिक चार क्षेत्रों में मौजूदा सांसदों के दोबारा निर्वाचित होने की संभावना शून्य है। ऐसे में पार्टी ने चारोंं स्थानों पर नए चेहरे उतारने का इरादा बना लिया है। बीते दिनों भाजपा क्षेत्रीय संगठन की प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठक में चारों सांसदों के टिकट काटने पर रजामंदी भी बन गई है। चर्चा है कि टिकट गंवाने वाले कानपुर परिक्षेत्र के सांसदों में सबसे बड़ा और चर्चित चेहरा मुरली मनोहर जोशी का है। पार्टी ने कानपुर नगर की सीट से जोशी के बजाय किसी स्थानीय नेता को उतारने का मूड बनाया है। टिकट गंवाने वाले अन्य चेहरों में दो बुंदेलखंड क्षेत्र के सांसद हैं, जबकि एक आलू बेल्ट से निर्वाचित हैं।


कभी पार्टी का आधार थे, अब नेपथ्य में हैं जोशी

याद कीजिए, एक वक्त भाजपा का नारा था - मां भारत की तीन धरोहर, अटल आडवाणी और मुरली मनोहर... उस दौर से शुरू हुआ डॉ. मुरली मनोहर जोशी का राजनीतिक सफर अब ठहराव पर है। वर्ष 1977 में अलमोड़ा से सांसद बनने के बाद जोशी तीन मर्तबा इलाहाबाद से सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 2004 में हार के बाद उन्होंने अगले चुनाव क्षेत्र में वाराणसी को कर्मभूमि बनाया, लेकिन वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के कारण उन्हें वाराणसी सीट छोडक़र कानपुर का रुख करना पड़ा। सदैव गंगा किनारे के संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. मुरली मनोहर जोशी को अब टिकट नहीं मिलेगा। पार्टी ने जोशी को टिकट नहीं देने की संभावनाओं को उनकी उम्र का कारण बताया है, लेकिन निजी एजेंसी के सर्वे में बताया गया है कि चार साल के कार्यकाल में जोशी ने कानपुर के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। लोगों के बीच मौजूद भी नहीं रहे हैं। इस कारण जोशी को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर वोटरों के बीच जबरदस्त नाराजगी है। सर्वे में कहा गया है कि भाजपा को कानपुर की सीट बचानी है तो जोशी अथवा किसी बाहरी नेता के बजाय स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारना होगा।


फीजिक्स के टीचर की केमिस्ट्री के समीकरण बिगड़े

अब भाजपा में मोदी-शाह का युग है। अटल-आडवाणी नेपथ्य में हैं, ऐसे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीजिक्स के अध्यापक रहे डॉ. मुरली मनोहर जोशी की राजनीतिक केमिस्ट्री के फार्मूले आउट डेटेड हो चुके हैं। उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी कानपुर के मैदान में किसी महिला चेहरे को सामने करेगी। बहरहाल, एजेंसी के सर्वे और पार्टी के आंतरिक समीक्षा के अनुसार इटावा के सांसद अशोक दोहरे को बगावती तेवर के कारण दोबारा टिकट नहीं मिलेगा। चर्चा है कि दोहरे भी इस मर्तबा बसपा के टिकट पर भाग्य आजमाना चाहते हैं। जोशी और दोहरे के अतिरिक्त अन्य दो सांसदों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं, अलबत्ता यह इशारा किया गया है कि शेष दोनों नाम बुंदेलखंड के हैं। ऐसे में झांसी से सांसद उमा भारती का टिकट कटने की संभावना नहीं है, जबकि जालौन के सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा का रिकार्ड और जातिगत समीकरण दुरुस्त है। इस आधार पर हमीरपुर से सांसद पुष्पेंद्र चंदेल और बांदा के चर्चित सांसद भैरोंप्रसाद मिश्र का नाम सामने आता है।