
सेना से सीनाजोरी : फौज को थमा दिए घटिया पैराशूट
कानपुर. पड़ोसी मुल्क में नई सरकार बनने के बाद आतंकी हरकतों का खतरा बढ़ा है। दूसरे छोर पर डोकलाम के मसले को लेकर चीन से तनातनी कायम है। मांद में दुबके आतंकी भी मौका तलाश रहे हैं। ऐसी स्थितियों में सेना की तैयारियों के साथ खिलवाड़ का पर्दाफाश हुआ है। कानपुर स्थित आर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री ने भारतीय फौज के लिए घटिया क्वालिटी के पैराशूट तैयार कर दिए। युद्ध अभ्यास के दौरान दिक्कत आने पर सेना ने शिकायत दर्ज कराई, बावजूद कमियों को दूर नहीं किया गया। अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
तीन साल में 730 खराब पैराशूट की आपूर्ति
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर की आर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री ने वर्ष 2014 से 2017 के बीच जल सेना के साथ-साथ एयरफोर्स और नेवी को कुल 730 खराब किस्म के पैराशूट सप्लाई किए थे। खराब क्वालिटी वाले पैराशूट की कीमत 11 करोड़ रुपये बताई गई है। सेना की शिकायत है कि इस्तेमाल के दौरान इबीपीएसयू-30 पैराशूट में दोनों कैनोपी पर व्हिपिंग ढीली होकर पुली के सिरे पर चढ़ जाती है। इसी प्रकार पीपी चेस्ट टाइप पैराशूट के सहायक पैराशूट में छेद पाया गया। पीपी मिराज 2000 पैराशूट में हारनेस असेंबली का लैप स्ट्रैप समायोजन के लिए बहुत कड़ा था। छोटे कद, छोटी लंबाई इत्यादि से जंप करने में असुविधा होती है। सेना के निरीक्षण के दौरान पैराशूट में इस्तेमाल किए गए कपड़ों में भी दोष पाए गए। कई जगह कपड़ों में छेद पाए गए, जो पैराशूट की उड़ान के लिए घातक होता है। सेनाओं की तरफ से चिंता जताई गई कि इन पैराशूट से मानवों को उतारना खतरनाक साबित हो सकता है।
वक्त पर आपूर्ति नहीं करने की तोहमत भी
कानपुर की आयुध पैराशूट फैक्टरी (ओपीएफ) पर वक्त पर आपूर्ति नहीं करने का दोष भी लगाया गया है। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई किस्म के पैराशूट की जरूरत सेनाओं को होती है। कुछ पैराशूट देश में बनते हैं लेकिन जो नहीं बन पाते, उन्हें विदेशों से खरीदा जाता है। देश में पैराशूट बनाने का जिम्मा ओपीएफ-कानपुर के पास है, लेकिन पैराशूट फैक्ट्री वर्ष 2012-17 के दौरान सिर्फ पांच मौकों पर ही पैराशूट उत्पादन लक्ष्य को हासिल कर पाई, जबकि मर्तबा जरूरत के मुताबिक पैराशूट वक्त पर नहीं मिले।
देश की रक्षा तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव
खराब गुणवत्ता के पैराशूटों के कारण सेनाओं की तैयारियां प्रभावित हुईं। सेनाओं की तरफ से शिकायत के बावजूद आयुध फैक्टरी पैराशूट की कमियों को दूर नहीं कर पाई। कैग के मुताबिक, कानपुर पैराशूट फैक्ट्री की मनमानी के कारण नए विकसित सीएफएफ एवं एचडी पैराशूटों के बड़े पैमाने पर निर्माण का काम भी शुरू नहीं हुआ। नतीजे में रक्षा अनुसंधान संस्थान द्वारा 11 साल पहले विकसित उच्च तकनीकी के पैराशूट के लिए अभी तक सेना को इंतजार है। कैग ने इस बात पर भी नाराजगी दिखाई है कि ओर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने इस मुद्दे पर मंत्रालय के प्रश्नों का जवाब भी नहीं दिया।
Published on:
11 Aug 2018 04:21 pm
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