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कानपुर के गोले विदेशी धरती पर करेंगे धमाका, कई देशों को आए पसंद

यूएई, सऊदी अरब, ओमान, मस्कट, नाइजीरिया, थाईलैंड और म्यांम्यार ने दिखाई दिलचस्पी आयुध निर्माणी कानपुर अब विदेशी तोपों की बैरल को करेंगी अपग्रेड, हुआ समझौता

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कानपुर के गोले विदेशी धरती पर करेंगे धमाका, कई देशों को आए पसंद

कानपुर के गोले विदेशी धरती पर करेंगे धमाका, कई देशों को आए पसंद

कानपुर। अब कानपुर में तैयार होने वाले तोप के गोले विदेशी जमीन पर धमाका करेंगे। आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) में बनने वाले तोपों के गोले कई देशों को पसंद आए। कुछ समय पहले लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो में आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) के माध्यम से इन तोपों के गोलों को प्रदर्शित किया गया था। एक्सपो में कई देशों के प्रतिनिधिमंडल ने भी शिरकत की थी। जिन्हें ये उत्पाद काफी पसंद आए थे। एक्सपो खत्म होने के बाद कई देशों के प्रतिनिधिमंडल आयुध निर्माणी बोर्ड आए। जिसके बाद बोर्ड का प्रतिनिधिमंडल इन देशों में गया। जल्द ही बड़े स्तर पर गोलों के आर्डर मिलने की संभावना है।

इन देशों से मिलेगा आर्डर
आयुध निर्माणी कानपुर में बने तोप के गोले मिडिल ईस्ट देशों यूएई, सऊदी अरब, ओमान, मस्कट के अलावा फिलीपींस, नाइजीरिया, थाईलैंड और म्यांम्यार समेत कई देशों को पसंद आए हैं। जल्द ही खरीद प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। आयुध निर्माणी बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने इन देशों का दौरा पूरा कर लिया है। वहीं इनमें से कई देशों का प्रतिनिधिमंडल भी आयुध निर्माणी बोर्ड आ चुका है।

गोले और तोप भी निर्यात होंगे
निर्माणी में मुख्य रूप से 105-155 एमएम तोप के गोले बनाए जाते हैं। अभी ये गोले सेना ही इस्तेमाल करती है। लेकिन सरकार की मंशा के अनुरूप अब इन गोलों के निर्यात पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। मिडिल ईस्ट देशों में 105-155 कैलीबर की तोपों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं निर्माणी में बनने वाली धनुष और शारंग तोप भी इन देशों को पसंद आई है। सूत्रों ने बताया कि निर्माणी के अफसर या कर्मचारी इन देशों की तोपों को वहां जाकर या फिर समझौते के आधार पर बैरलों को मंगाकर अपग्रेड भी कर सकेंगे। इस पर भी समझौता की बात चल रही है।

निर्माण क्षेत्र में ओएफसी होगी आत्मनिर्भर
ओएफसी दो सालों में सभी प्रकार की तोपों व टैंकों में इस्तेमाल (105एमएम-155एमएम कैलीबर) में आने वाले गोलों (एम्युनिशन हार्डवेयर शेल) को बनाने में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन जाएगी। इसके अलावा गोला निर्माण की क्षमता भी दो गुने से अधिक हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने निर्माणी में 100 करोड़ की लागत से फार्जिंग प्रेस प्लांट बनाने की अनुमति कुछ समय पहले ही दी है। अभी कई निर्माणियों के सहयोग से गोला बनाया जाता था।