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केवल भुगतान का चेक बाउंस होने पर ही हो सकता मुकदमा

- हर मामले में चेक बाउंस होने पर नहीं किया जा सकता कोर्ट केस,- चेक बाउंस होने के ३० दिन में पार्टी को देना होगा लीगल नोटिस

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केवल भुगतान का चेक बाउंस होने पर ही हो सकता मुकदमा

कानपुर। आए दिन चेक बांउस होने के नए-नए मामले सामने आते रहते हैं, ऐसे में चेक पाने वाली पार्टी अगर कोर्ट केस करना चाहती है तो उसे पहले इस मामले से जुड़े नियमों को जानना बहुत जरूरी है, वरना आपका पैसा और समय कोर्ट के चक्कर लगाने में नष्ट होगा। दरअसल चेक बाउंस के हर मामले में कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है। चेक बाउंस के बढ़ते मुकदमों की संख्या कम करने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के पूर्व चेयरमैन अंकुर श्रीवास्तव ने ये जानकारी दी।

चेक बाउंस कानून
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स ऐक्ट, 1881। इसके सेक्शन 138 के मुताबिक अगर कोई देनदार की ओर से भुगतान करने के लिए चेक दिया गया हो, और वह चेक बाउंस हो जाए तभी उसके खिलाफ कोर्ट केस किया जा सकता है। दूसरी शब्दों में अगर आपको किसी के रुपए लौटाने हैं या कोई पेमेंट करना है, जिसे आपने स्वीकार किया है, उस मामले में चेक बाउंस होने पर केस दर्ज किया जा सकता है।

भुगतान चेक बाउंस होने पर मुकदमा
अगर दो पार्टियों के बीच लेन-देनचेक से हुआ हो, तब उसके बाउंस होने पर सेक्शन 138 लागू होगा। किसी ने अपने दोस्त की मदद करने के लिए उसे पैसा दिया और दोस्त ने वह पैसा वापस करने के लिए चेक दिया। ऐसे में अगर वह चेक बाउंस हो जाता है, तो इस मामले में सेक्शन 138 के तहत मामला दर्ज होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मदद के लिए दिया गया पैसा लोन यानी उधार माना जाता है। लोन के लिए अगर कोई चेक दिया जाता है और वह बाउंस हो जाता है, तो सेक्शन 138 लगता है।

सिक्योरिटी चेक बाउंस पर कार्रवाई नहीं
आपने बिजनेस के लिए किसी से सामान खरीदा, तो आपको उसके पास सिक्योरिटी के तौर पर कुछ रखना होगा। अगर सिक्योरिटी के तहत दिए इस चेक को दूसरी पार्टी ने इनकैश कराने की कोशिश की और चेक बाउंस हो गया, तो इस पर चेक बाउंसिंग का केस नहीं बनेगा। इसी तरह अगर चेक एडवांस के तौर पर दिया गया है या अगर चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिया गया है और चेक में नंबर और शब्दों में लिखा गया अमाउंट अलग-अलग है या फिर चेक किसी चैरिटेबल संस्था को गिफ्ट या डोनेशन तौर पर दिया गया है तो कोर्ट केस नहीं हो सकेगा।