
CM योगी के गुरू ने खोले रहस्य, गणित के हेडमास्टर है अजेय
कानपुर। संस्कार, स्वभाव या आदतें व्यक्ति को भीड़ से अलग पहचान दिलाते हैं। संस्कार या आदतें सिर्फ इसी जन्म की नहीं होती बल्कि पिछले जन्मों से भी साथ में आती हैं। इसीलिये तो कुछ लोग बहुत छोटी उम्र यानी बचपन से ही अपनी अलग पहचान बनाने लगते हैं। जो बच्चा अच्छे संस्कारों को साथ में लेकर जन्म लेता है वह छोटी उम्र से ही श्रेष्ठ और महान कामों को करने लगता है। शायद इसीलिये समाज में यह कहावत प्रसिद्ध हुई कि ..पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। इस कहावत को जमीन पर उतारने वाले और कई नहीं, बल्कि युपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। सीएम को जिस गुरू ने क्षिशा-दिक्षा दी वो आज भी अपने शिष्य को अजेय के नाम से पुकारते हैं। ’महराजपुर थानाक्षेत्र स्थित खुजउपुर गांव निवासी नागेंद्र नाथ बाजपेयी ने सीएम योगी को कक्षा 9 और 10 में गणित का ज्ञान देकर कॉलेज का श्रृष्ठ विद्यार्थी बनाया था और आर्शीवाद के तौर उन्हें नया नाम अजेय दिया। मंगलवार को अपने गांव आए सीएम के गुरू ने बताया कि योगी आदित्यनाथ का लगाव पचपन से गणित पर था और बड़े से बड़ा सवाल वो एक बार में हल कर देते थे। कहते हैं कि योगी कभी झूठ नहीं बोलते थे और इसी के चलते स्कूल के अन्य छात्रों से वो बिलुकल अगल थे।
योगी के घर से आता था भोजन
मुलरूप से महाराजपुर थानाक्षेत्र के खुजऊपुर रूमा निवासी नागेंद्र नाथ वाजपेयी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज गजा टिहरी में बतौर गणित विषय के टीचर थे। बाजपेयी के पड़ोस में रहने आन्नद विष्ट जो की वन विभाग में नौकरी करते थे उनकी मित्रता हो गई। आन्नद विष्ट ने अपने दो बेटे अजय मोहन विष्ट (योगी आदित्यनाथ) और मानवेंद्र विष्ट को इनके स्कूल में कक्षा नौ में दाखिला करवाया। बाजेपयी कानपुर के रहने वाले थे तो उन्हें पहाड़ी क्षेत्रों के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी। तब वो आन्नद विष्ट से अक्सर जानकारी लेते। बाजपेयी बताते हैं कि जब भी हम कानपुर आते तो यहां के ठग्गू के लड्डू और मुन्ना की नमकीन जरूर लेकर जाते। कभी-कभी हमें आगरा का पेठा भी लेकर जाना होता था। बाजपेयी बताते हैं कि शुरूआत में हम परिवार को नहीं ले गए तो आन्नद जी के घर से भोजन पक कर आ जाया करता था।
1987-88 में लिया था दाखिला
नागेंद्र नाथ वाजपेयी ने बताया कि योगी आदित्यनाथ ने 1987 में स्कूल में दाखिला लिया। कक्षा नौवीं में वो स्क्ूल कॉपर रहे और 100 में से 95 नंबर उन्हें गणित में मिले। दसवीं की परीक्षा भी उन्होंन अच्छे अंकों के साथ पास की। नागेंद्र नाथ वाजपेयी ने बताया कि योगी आदित्यनाथ समय के बुहत पक्के थे। अगर उन्हें हमने सुबह छह बजे घर ट्यूशन के लिए बुलाया तो वह एक मिनट भी लेट नहीं होते थे। बताते हैं कि कक्षा दसवीं के एग्जाम से पहले कुछ दिनों के लिए स्कूल बंद हो गए थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरू जी हमें गणित में अच्छे अंक लाना है इसलिए ट्यूशन पढ़ा दें। हमने उन्हें सुबह छह बजे का समय दिया।
फिर भी नहीं रूके कदम
नागेंद्र नाथ वाजपेयी ने बताया कि रविवार का दिन था। पहाड़ों से बर्फीले हवाएं चल रही थीं। तापमान माइनस शून्य के नीचे थे। हम घर के अंदर दरवाजे खिड़कियां बंद किए हुए थे। तभी सुबह के 6 बजे योगी आदित्यनाथ हमारे घर पर आ गए और कुंडी खटखटाई। सर्दी के चलते हम रजाई को ओड़ दरवाजा खोला तो नन्हा बालक योगी बाहर कॉपी-किताबों के साथ खड़ा था। यह देख हमने तत्काल उसे घर के अंदर किया और कहा कि बर्फीले हवाएं चल रही हैं और तुम भोर पहर बिना गर्म कपड़े के आ गए। तो योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरू जी अजय सर्द भरी हवाओं से नहीं डरता, पढ़ लिखकर अपने पिता का नाम रोशन करना चाहता है। आप हमारी चिंता न करें। रजाई ओड़कर चारपाई में आप बैठें और जमीन पर हम । यह कह योगी आदित्यनाथ जमीन पर बैठ गए और गुणाभाग के सवालों में उलझे और हमें भी उलझाया। यह देख हमने योगी आदित्यनाथ के पिता से कहा था कि विष्ट जी आपका लड़का देश में अपनी अलग पहचान बनाएगा।
सीएम बनने के बाद बुलावाया सीएसए
बाजपेयी बताते हैं कि 2017 में सीएम पद की शपथ लेने के बाद वह 7 सितंबर 2017 को कानपुर आए। आने से पहले उन्होंने डीएम सुरेद्र सिंह को हमें लाने को कहा था। वह सीएसए के कई कार्यक्रमों में भाग लिया और मंत्री, विधायकों के साथ चर्चा कर रहे थे, तभी उनकी नजर हम पर पड़ गई तो सबको छोड़ सीधे हमारे पास आए और प्रणाम किया। योगी ने चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय में गुरुजी से मुलाकात की। उनके साथ कुलपति के दफ्तर में बैठकर खाना खाया। अपने साथ लखनऊ से लेकर आए दो पुस्तकें और शॉल उनको भेंट की। बाजपेयी कहते हैं कि वो जब भी कानपुर आते हैं तो हमें जरूर बुलाते हैं और अपने बचपन की यादें हम दोनों बैठकर एक-दूसरे को सुनाते हैं।
पांच मिनट पहले पहुंच जाते थे क्लास
नागेंद्र नाथ वाजपेयी बताते हैं कि योगी आदित्य नाथ पढ़ने में बहुत तेज थे। वह गणित की किताब लेकर उनके घर आकर सवाल पूछा करते थे। स्कूल भी पांच मिनट पहले ही पहुंच जाया करते थे। बताते हैं, योगी आदित्यनाथ हमें दूर से देख प्रणाम करते थे। योगी आदित्य नाथ स्कूल में भी सफाई पसंद थे। जरा सी गदंगी देखकर तुरंत खुद ही झाड़ू लगाने लगते थे। वह जींस और टी शर्ट पंसद नहीं करते थे। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू के विरोधी थे। अगर स्कूल के बाहर या घर के आसपास कोई गंदगी करता तो उसे रोकते और खुद सफाई करने में जुट जाया करते थे। योगी आदित्यनाथ जब गोरखपुर आए और संत बन गए। इसके बाद वो हमसे मिलने अक्सर टेहरी आया करते थे।
गणित के मास्टर है सीएम योगी आदित्यनाथ
बाजपेयी बताते हैं कि वो बचपन से झूठ और भ्रष्टाचार के खिलाफ अक्सर कॉलेज में टीचरों और छात्रों के साथ चचा किया करते थे। इसलिए यूपी के सीएम चुने जाने के बाद मैं सौ फीसदी कह सकता हूं कि अब कोई भी जनप्रतिनिधि, ब्यूरोकेट्स, सरकारी बाबू करप्शन नहीं कर सकता। क्योंकि योगी आदित्यनाथ गणित के मास्टर है और जोड़ घटाना में उन्हें कोई मात नहीं दे सकता। चोरी की तो देर से ही सही वह पकडद्य जरूर लेंगे। बाजपेयी कहते हैं कि सीएसए में हमारी पहली मुलाकात हुई तो उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए जींस और टी शर्ट की बात चलाते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षकों के स्कूल में जींस और टी शर्ट पहनकर आने पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री ने अपने गुरु को गीता रास की दो किताबें और शॉल भेंट किया।
गुरू ने शिष्य से मांगी सड़क
बाजपेयी ने बताया कि उनके गांव से हाईवे की दूरी दो किमी के आसपास है। कई मंत्री, विधायक आए और सड़क के निर्माण की बात कही, लेकिन वो कभी पूरी नहीं हुई। गांव के सोमेंद्र प्रताप सिंह ने हमसे सड़क के निर्माण कराए जाने की मांग की। रिटायर्डमेंट के बाद जो पैसा मिला उससे बर्रा में घर बनवा लिया। हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम गांववालों को एक सड़क बनावा कर दे सकें। तभी हमनें सीएम योगी आदित्यनाथ को फोन लगाया और मिलने का समय मांगा। उन्होंने कहा गुरू जी जब चाहे तब आ जाएं। आपके लिए योगी के घर के दरवाजे 24 घंटे खुले हैं। हम उनसे मिलने के लिए पहुंचे तो दूर से प्रणाम करते हुए भागते-भागते पास आ गए। हमें कमरे में ले गए और हालचाल पूछा। इसी दौरान हमने उनसे एक मदद करने की बात कही। तत्काल बोले गुरू जी कहिए क्या समस्या है। हमने उनसे कहा कि गांव से हाईवे तक सड़क नहीं है। गांववालों ने कईबार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने उसी वक्त डीएम कानपुर को फोन कर सड़क के निर्माण के आदेश दे दिए। सड़क आज बन कर तैयार हो गई तो उसका उद्घाटन करने के लिए सोमेंद्र प्रताप ने हमें बुलाया। हमने सड़क का शुभारंभ कर गांववालों को सौंप दी।
Published on:
10 Jul 2018 11:52 pm
