
बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते, सीएम को पाकर रो पड़े तात्या टोपे
कानपुर. गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी भारत माता को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए यहीं से स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका गया। इतिहास तो सभी जानते हैं, पर नाना की कर्मभूमि पर सूबे का मुखिया कभी नहीं आया। 1857 से लेकर 1947 तक यहां हजारों लोगों ने अपनी जान देकर भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराया। यूपी में कई सीएम हुए और उन्होंने अपने-अपने घरों और क्षेत्रों को चमकाया, लेकिन गंगा के किनारे बसे कस्बे की तरफ किसी ने नहीं देखा। 2017 में सीएम पद की शपथ लेने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अपने एक कार्यक्रम के दौरान नाना और लव-कुश की नगरी का दीदार करने का ऐलान किया और इसी दौरान सात साल से बंद पड़े महोत्सव की शुरूआत करने के साथ खुद शामिल होने की घोषणा कर दी। बुधवार को वह दिन, तारीख और समय आ गया, जब सीएम को अपने बीच पाकर तात्या टोपे के परिजनों के आंख से खुशी के आंसू टपक पड़े।
पहले सीएम बने योगी जो पहुंचे बिठूर
आजादी के सत्तर साल के बाद पहली बार बिठूर का रंग कुछ अगल दिखा। जब नाना और तात्या ने अंग्रेजों के खिलाफ तलवार म्यान से निकालीं तो यहां की गली-मोहल्ले और गंगा के घाट गोरों के खून से लाल होते थे, लेकिन आजादी के सत्तर साल बाद बिठूर बुधवार को बदला-बदला नजर आया। पूरा कस्बा भगवा रंग में रंगा था और नाना-तात्या के साथ जसश्रीराम के उ़द्धघोष से पूरा नगर सरोबोर था। सीएम बिठूर महोत्सव का शुभारंभ कर तात्या टोपे के परिजनों से मिले और उन्हें पुरूस्कार देकर सम्मानित किया। सीएम को अपने बीच पाकर तत्या टोप के नाती विनायक राव की आंख से आंसू छलक पड़े। राव कहते हैं कि आजादी के बाद पहली बार प्रदेश का सीएम बिठूर आया और आरती कर गंगा को स्वच्छ करने का संकल्प लिया और लोगों को दिलवाया। राव को अब उम्मीद है कि क्रांतिकारियों की भूमि में विकास के पंख लगेंगे और यहां पर यूवा आएंगे और शहीदों के बारे में जानकारी पा सकेंगे।
बिठूर में रहते हैं तात्या टोपे के वंशज
विनायक राव ने बताया कि वह तात्या टोपे के वंशज हैं। बताया तात्या टोपे उनके चचेरे बाबा लगते थे। तात्या टोपे और लक्ष्मण राव टोपे सगे भाई थे। तात्या बड़े भाई थे। तात्या टोपे की एक लड़की मनोरमा और लड़का समर टोपे थे, मगर 1857 के ग़दर के बाद से उनका कोई पता नहीं चला। राव ने बताया कि, लक्ष्मण राव टोपे हमारे पिता नारायण राव के पिता थे। अंग्रेजों ने उस दौरान उन्हें जेल में बंद कर दिया था, मगर साल 1959 में उनको बरी कर दिया गया। राव कहते हैं कि उनके बाबा तात्या टोपे का जन्म सन 1814 ई. में नासिक के निकट पटौदा ज़िले में येवला नामक ग्राम में हुआ था। राव बताते हैं कि 1857 में विदेशियों के विरुद्ध जो युद्ध आरम्भ हुआ उसमे तात्या टोपे ने बड़ी वीरता का परिचय दिया। क्रान्तिकारियो ने कानपुर पर अधिकार कर लिया। तात्या ने 20 हजार सैनिको की सेना का नेतृत्व करके कानपुर में अंग्रेज सेनापति विन्धम को तथा कैम्पवेल को परास्त करके भागने के लिए मजबूर किया। राव ने बताया कि बाबा तात्या को 1859 में सिंधिया के सामंत मानसिंह ने विश्वासघात करके उसे पकडवा दिया और अंत में उन्हें 18 अप्रैल 1859 को फांसी पर चढ़ा दिया गया।
तो बहुरेंगे नाना की नगरी के दिन
नाना के परिवार से जुड़े मोगे कहते हैं कि कस्बे के आधा दर्जन नाले पतित पावनी गंगा में गिरते हैं। यहां की टूटी सड़कों पर चलते समय कई बार लोग गिर जाते हैं। जिस टीले पर धु्रव ने कठोर तप किया था, वह उपेक्षा का शिकार है। बबूल के पेड़ और झाड़ झंखाड़ टीले की खूबसूरती पर किसी बदनुमा दाग से कम नहीं हैं। एक अदद होटल भी यहां नहीं है, जिसमें कोई दूर देश से आया श्रद्धालु या पर्यटक रात गुजार सके। आवागमन के साधन की बात करना भी बेमानी है। वर्षो तक सेंट्रल स्टेशन से यहां तक ट्रेन आती थी, लेकिन दस वर्ष पहले उसका संचालन रोक दिया गया। तब ट्रैक का आमान परिवर्तन कर एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन चलाने का दावा किया गया, लेकिन वो सिर्फ कागजों में दिख रहा है। मोगे कहते हैं कि गंगा में गिरते नालों को टेप करने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के दावे तो खूब हुए, लेकिन किया कुछ नहीं गया। पर सीएम ने बिठूर के साथ ही गंगा को स्वच्छ करने की बात कही है, जिससे अब उम्मीद दिख रही है की नाना की नगरी के दिन बहुरेंगे।
सीएम से आने से महल में लगे दाग धूले
नान राव पेशवा का महल पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गया था। सीएम के आने की भनक लगते ही पुरातत्व विभाग के साथ जिला प्रशासन ने उसका जीर्णोद्धार किया। महज सात दिनों में उसे रंग-पोत कर साफ कर दिया गया। जहां सरकारी सिस्टम के लगे सैकड़ों दाग चंद घंटों में धूल गए। जिस महल के अंदर तात्या टोपे ने लक्ष्मी बाई और मैना को तलवार चलाना सिखाया उसके अंदर का नजारा भी बदल दिया गया। सीएम ने भी यहां आकर क्रांतिकारियों की याज ताजा कर सभी का नाम लिया। लोगों को अब उम्मीद है कि बिठूर का पर्यटन की दृष्टि से विकास और उद्धार होगा। मोगे कहते हैं कि यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए अतिथि गृह या होटल बने। पर्यटकों के लिए गाइड रखे जाएं। पेशवा स्मारक में लाइट एंड साउंड की व्यवस्था की जाए। बिठूर को रेलवे के जरिए जल्द बड़े शहरों से जोड़ा जाए। धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर बिठूर की ब्रांडिंग की जाए। धु्रव टीले का जीर्णोद्धार कराया जाए।
Published on:
21 Dec 2017 10:03 am

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