
कानपुर। वह पढ़ाई में अव्वल थी और अपने क्लास में हर वर्ष टॉप करती थी। स्नातक के बाद दिल्ली से एमबीए पास किया और एक सरकारी बैंक में नौकरी मिल गई। ट्रेन से घर वापस आ रही थी, तभी उनकी नजर भीख मांग रहे दिब्यांग बच्चों पर पड़ी। महिला को यह नगुजरा दिखा और उसने इन्हें हुनरमंद बनाने की ठान ली और दिब्यांग बच्चों के लिए एक स्कूल की अधारशिला रख दी। सात साल से वह दिब्यांग बच्चों को निशुल्क में शिक्षा दे रही हैं और उन्हें स्थानीय लोग द्रोणाचार्य दीदी के नाम से पुकारते हैं। कानपुर के इस द्रोणाचार्य के कार्य की बात सीएम तक पहुंती तो उन्होंने इन्हें पुरूस्कार देने की घोषणा की। दर्शनपुरवा निवासी निवासी मनप्रीत कौर अपने दिग्यांग बच्चों को लेकर गुरूवार को लखनऊ के लिए निकल गई हैं, वहां सीएम योगी आदित्यनाथ रानी लक्ष्मी बाई पुरूस्कार देकर उनका सम्मानित करेंगे।
नजारा देख बदल लिए कदम
दर्शनपुरवा निवासी निवासी मनप्रीत कौर जो एमबीए पास हैं औरवह सात साल पहले नोएडा स्थित एक बैंक में नौकरी करती थीं। मनप्रती बैंक से घर आ रही थी। दो दिव्यांग बच्चे सड़क पर भीख मांग रहे थे, मनप्रीत की नजर बच्चों पर पड़ी और वह उनके पास गईं और उन्हें खाने के लिए फल दिए। एक बच्चा देख नहीं सकता था तो दूसरा बोल और सुन नहीं सकता था। मनप्रीत ने उन्हें पास बुलाया और उंगली पकड़कर उनके घर जा पहुंची। मनप्रीत ने बताया कि घर में सिर्फ दोनों बच्चों की बीमार मां मिली। उसकी पीड़ा सुन दिलभर आया और उसी दिन बेसहारा गरीब दिव्यांग और मूकबाधिर बच्चों को संवारने की ठान ली। मनप्रीत ने नोएडा सेक्टर 66 में एक एनजीओ से संपर्क साधा और ऐसे बच्चों को शिक्षा में जोड़ने के लिए आगे आने के लिए कहा। पांच माह नोएडा में दिव्यांगों को शिक्षा के क्षेत्र में जोड़ा और फिर 2011 में कानपुर आ गईं और फिर यहीं से दिव्यांगों की दीदी का सफर शुरु हो गया।
कान्वेंट की तरह दिब्यांग बच्चों के लिए स्कूल
मनप्रीत ने अपने हुनर से सात साल में 200 दिव्यांग बच्चों को घर में खोले स्कूल में फ्री में शिक्षा दे रही हैं। स्कूल में 5 से लेकर 15 तक के उम्र के बच्चों को कान्वेंट स्कूल की तरह शिक्षा सारी सुविधा मुहैया कराई हैं। खेलने के लिए मैदान और सारे साजो सामान दीदी बच्चों को मुहैया कराई हैं। मनप्रीत ने बताया कि मेरे इस काम में माता - पिता का बहुत योगदान रहा है। जब मैने स्कूल खोला था, तब मेरे पास जो पैसे थे सब लगा दिए । इस काम के लिए मैने रजनी को जोड़ा और फिर गली मोहल्ले के गरीब दिव्यांग बच्चों को लाकर स्कुल में लाकर रखा। मनप्रीत के मुताबिक स्कूल में अब चार कमरे हैं और हर कमरे में 20 - 20 बच्चों को बिठाया जाता है। हर कमरे में एसी के साथ ही खेलकूद के सामान मौजूद हैं । शाम को सभी बच्चे मेरे साथ खेलों का लुफ्त उठाते हैं।
इशारों सिखाती हैं डांस
मनप्रीत के मुताबिक उनके स्कूल में दो दर्जन मूकबाधिक बच्चियां हैं, जिन्हें हम डांस के गुर सिखा रही हैं। पहली बार तो बहुत परेशानी हुई,क्योंकि न तो ये बच्चे कुछ सुन सकते थे और न ही बोल सकते थे। मैंने इशारों को समझने के लिए बच्चों के साथ करीब एक महीने तक इशारों में ही बात की। इसके बाद शुरू के करीब छः महीने इस शिक्षिका को जमकर पसीना बहाना पड़ा। कथक डांस अन्य डांस फॉम से बहुत मुश्किल है। 6 महीने की मेहनत के बाद आज ये बच्चे काफी-कुछ सीख गए हैं। वह कहती हैं,इन छात्रों के लिए गाने तेज बजे या धीमा कोई मायने नहीं रखता। इनके लिए मेरे हाथों का डायरेक्शन और आंखों का इशारा ही महत्वपूर्ण है। पूरा डांस इशारों में ही कराना पड़ता है। छात्र हर भाव को बहुत जल्दी समझ जाते हैं। छात्राओं ने इशारों में बताया,इतने सालों में आज तक टीचर ने कभी गुस्सा नहीं किया। हम जब तक डांस के स्टेस्प सही ना करने लगे वो आगे के स्टेप नहीं बताती।
सीएम ने काम को सराहा
मनप्रीत कौर के पति एक दवा कारोबारी हैं और वह भी तन, मन और धन के साथ पत्नी के इस पुण्य के काम में समय निकाल कर सहयोग करते हैं। मनप्रीत ने बताया कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने में सात साल लग चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई सरकारी मदद नहीं मिली। लेकिन सीएम कार्यालय से हमारे पास फोन आया कि आपको लखनऊ आना है। सीएम योगी आदित्यनाथ आपको पुरूस्कार देने चाहते हैं। मनप्रीत कहती हैं कि सीएम के बुलावे पर वह राजधानी निकल गई हैं। मनप्रीत ने बताया कि असज मुझे सब कुछ मिल गया है। सीएम से मिलकर मैं दिब्यांग बच्चों के लिए स्कूल के निर्माण की मांग करूंगी, जिससे की गांव में रहने वाले बच्चे अपने आपको काबिल बना लें और खुद अपने पैरों में खड़े हो सकें।
Published on:
29 Mar 2018 12:34 pm
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