
इस सीट पर चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए जुटी प्रियंका गांधी
कानपुर। लोकसभा चुनाव का शंखदान हो चुका है। अधिकतर राजनीतिक दलों के पार्टी प्रमुख सीटों में उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के गढ़ कानपुर में अभी भी दो गुटों में चल रही रार बरकरार है। खुद पार्टी के महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतित्यराजे सिंधिया ने अब यहां की कमान संभाल ली है। आब्जर्वर के रूप में पिछले दिनों यहां भेजे गए पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला और पंकज उपाध्याय की रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों नेताओं ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के साथ बैठक कर कैंडीडेट के नाम पर मंथन किया है।
अभी भी फंसा पेंच
लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद अब राजनीतिक दलों में सगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टी के बड़े नेता जहां 2019 फतह करने के लिए रणनीति बना रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें प्रत्याशियों के मयन में माथा-पच्ची करनी पड़ रही है। हालात ये हो गए हैं कि वर्तमान सांसदों के अलावा अन्य नेता टिकट पानें के लिए अपने-अपने करीबियों से जुगाड़ लगा रहे हैं। साथ ही दावेदार टिकट नहीं मिलने पर पार्टी हाईकमान को चेतावनी भी दे रहे हैं। कांग्रेस ने पहली सूची जारी कर दी। जिसमें अकबरपुर-रनिया से पूर्व सांसद राजाराम पाल को टिकट देकर चुनाव के मैदान में उतार दिया है, लेकिन कानपुर नगर में अभी भी पेंच फंसा हुआ है।
श्रीप्रकाश लगा रहे एड़ी चोटी का जोर
पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और पूर्व विधायक अजय कपूर अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। सोमवार इस मसले पर मनमोहन सिंह की तरफ से भी अपनी बात रखी गई है। कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी के प्रत्याशियों के चयन प्रक्रिया की मेन स्ट्रीम से अलग होने से श्रीप्रकाश जायसवाल ने कई और माध्यमों से अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। अजय कपूर भी दिल्ली में ही रहकर अपनी दावेदारी पक्की कराने में लगे हैं। महानगर में कांग्रेस और उनके समर्थक भी अब दो धड़ों में बंटते जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी कानपुर सीट से युवा प्रत्याशी को टिकट देना चाहती हैं, वहीं कुछ बड़े नेता पूर्व मंत्री के पक्ष की पैरोकारी कर रहे हैं।
युवा को टिकट दिए जाने पर चल रहा मंथन
1999 से कानपुर की सीट पर लगातार तीन बार काबिज रही कांर्ग्रेस को 2014 के पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल यहां से तीन बार सांसद चुने गए हैं और उनके संबंध गांधी परिवार से अच्छे बताए जा रहे हैं। पर आब्जर्वर पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला और पंकज उपाध्याय ने कानपुर में कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान उनकी नब्ज टटोली और जो रिपोर्ट बनाकर प्रियंका गांधी को सौंपी हैं, उसमें युवा पर दांव लगाए जाने की बात लिखी है। इसी के चलते यहां खेमेबाजी भी खूब चल रही है। अपने-अपने वर्ग को मजबूत बताने के लिए सभी चालें चली जा रही हैं।
6 लाख ब्राम्हण मतदाता निभाते हैं रोल
कानपुर नगर सीट में जहां 33 लाख 97 हजार 5 सौ 40 मतदाता हैं। इनमें आधी आबादी की संख्या 15 लाख 38 हजार 5 सौ 46 है। यहां पर करीब 6 लाख से ज्यादा ब्राम्हण मतदाता हैं, जो हार-जीत मे ंअहम रोल निभाते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर ने कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को भारी अंतर से हरा कर सांसद चुने गए थे। गोविंद नगर, सीसामऊ, आर्यनगर, किदवई नगर और कैंट विधानसभा क्षेत्र के मतदाता कानपुर लोकसभा क्षेत्र के लिए वोट डालेंगे। बिठूर, कल्याणपुर, महाराजपुर और घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता अकबरपुर लोकसभा के लिए मतदान करेंगे। बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के लिए वोट करेंगे।
Published on:
13 Mar 2019 02:37 pm
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