
Adm CP Pathak Case 2001: पुलिस की कहानी फेल, 20 साल के बाद चारों आरोपी बरी
Adm CP Pathak Case : कानपुर में साल 2001 में हुए दंगे के दौरान एडीएम सीपी पाठक की हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद पुलिस ने 2003 में आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। मंगलवार देर शाम सुबूतों के अभाव में 20 साल बाद सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।
हालांकि एडीएम सीपी पाठक हत्याकांड में सभी आरोपी पहले ही सुप्रीम से कोर्ट बरी किए जा चुके थे।
सुबूत के अभाव में हुए बरी
एडीएम सीपी पाठक हत्याकांड में सैय्यद वासिफ, मो.जुबैर, मुमताज, गुलाम निजाली को भी 2001 में हत्या का आरोपी बनाया गया था।
जिसके बाद पुलिस ने 2003 में चमनगंज थाने में चारों आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
मंगलवार को विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट ने दोनों ही पक्षों को सुनने के बाद सुबूतों के अभाव में चारों आरोपियों को 20 साल बाद बरी कर दिया।
पुलिस की कहानी हुई फेल
अधिवक्ता शकील ने बताया कि पुलिस की बनाई कहानी कोर्ट में फेल हो गई है। हत्या के मुकदमों में पुलिस द्वारा बनाए गए आरोपी सुप्रीम कोर्ट से पहले ही बरी किए जा चुके थे।
सिर्फ गैंगस्टर का मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन था। इस मामले में पुलिस कोर्ट में मजबूत साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। जिसके चलते कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में दर्ज मुकदमे से भी बरी कर दिया है।
क्या था सीपी पाठक हत्याकांड
16 मार्च 2001 को परेड स्थित यतीमखाना चैराहा से दंगे की शुरुआत हुई थी। इस दौरान नई सड़क पर उपद्रव को नियंत्रित करने के लिए तत्कालीन एडीएम वित्त सीपी पाठक को मौके पर भेजा गया।
यतीमखाना चैराहा पर प्रदर्शन करते हुए हुजूम चल रहा था। अचानक भीड़ उग्र हो गई और नवीन मार्केट, परेड मुर्गा मार्केट व सोमदत्त प्लाजा समेत कई स्थानों पर पथराव होने लगा।
यतीमखाना पर कई वाहन फूंक दिए गए। इस दौरान बवालियों से सीधा मोर्चा लेते हुए एडीएम सीपी पाठक शहीद हो गए थे।
Published on:
21 Feb 2023 11:20 pm
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