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ताइवान की तर्ज पर सीएसए खोलेगा सबसे बड़ा शाकभाजी रिसर्च केंद्र

बारीकियां जानने को कुलपति ने किया ताइवान का दौरा,कम लागत में ज्यादा उत्पादन की तकनीक सीखेंगे छात्र

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csa kanpur

ताइवान की तर्ज पर सीएसए खोलेगा सबसे बड़ा शाकभाजी रिसर्च केंद्र

कानपुर। सब्जियों की उन्नतशील खेती के लिए अब चंद्रशेखर आजार कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एक ऐसा रिसर्च केंद्र खोलेंगे, जिसमें सब्जियों को लेकर नए-नए शोध किए जाएंगे। इसके लिए ताइवान स्थित विश्व शाकभाजी केंद्र के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी। जिससे सब्जियों की गुणवत्ता सुधरेगी और उत्पादन बढऩे से किसानों को भी लाभ होगा।

दिनों दिन गिर रही क्वालिटी
रासायनिक खादों और केमिकल के प्रयोग से सब्जियों की गुणवत्ता दिनों दिन खराब होती जा रही है। खेत से मंडी तक आते-आते ज्यादातर सब्जियां सडऩे लगती हैं। जमीन की ताकत कम होने से कई बार पौधे में फल ही नहीं आता या फिर बहुत कम उत्पादन होता है। किसान ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए सब्जियों पर इंजेक्शन का भी प्रयोग करता है, जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैँ।

कम लागत में ज्यादा उत्पादन
सीएसए के वैज्ञानिकों का प्रयास है कि कम लागत और कम पानी में ज्यादा और बेहतर उत्पादन हो। जिससे किसानों का उत्साह बढ़े और वे मुनाफा कमाने के लिए किसी भी तरह की दवा या इंजेक्शन का प्रयोग न करें। इसके लिए कुलपति डॉ. सुशील सोलोमन की अगुवाई में तीन सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने ताइवान में विश्व शाकभाजी केंद्र का दौरा किया।

पॉलीहाउस पर दिया जाएगा जोर
सीएसए के उपनिदेशक शोध डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि सब्जियों की खेती के लिए पॉलीहाउस को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे उत्पादन बेहतर मिलता है साथ ही विपरीत मौसम की सब्जियां उगाने का विकल्प भी मौजूद होता है। अगर किसान खुले खेतों की जगह पॉलीहाउस का प्रयोग करता है तो दो गुना मुनाफा कमा सकता है।

सीएसए के छात्र जाएंगे ताइवान
डॉ. सिंह ने बताया कि जल्द ही सीएसए के छात्रों को रिसर्च व आधुनिक तकनीक सीखने के लिए विश्व शाकभाजी केंद्र ताइवान के दौरे पर भेजा जाएगा। जहां छात्रों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा।