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आईआईटी में साइकिल के बाद अब सोलर रिक्शा दौड़ेंगे, जल्द दिखेगा नया अवतार

आईआईटी IIT kanpur को सोलर रिक्शा solar e rickshaw की तकनीक विकसित करने का जिम्मा- सोलर एनर्जी solar energy के साथ-साथ पैडल और बैटरी से भी चलेगा रिक्शा- वजन में हल्के और कीमत में काफी कम होंगे सोलर रिक्शा- कैंपस में संचालन के लिए आईआईटी प्रशासन तय करेगा न्यूनतम किराया- मौजूदा ई रिक्शा से आधी कीमत पर बाजार में मिलेंगे सोलर रिक्शा- सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड central electronic limited ने ईजाद किया है सोलर रिक्शा  

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आईआईटी में साइकिल के बाद अब सोलर रिक्शा दौड़ेंगे, जल्द दिखेगा नया अवतार

आईआईटी में साइकिल के बाद अब सोलर रिक्शा दौड़ेंगे, जल्द दिखेगा नया अवतार

कानपुर. पर्यावरण के पहरेदार आईआईटी-कानपुर IIT kanpur में नई पहल। अब तकनीकी संस्थान में सोलर ई-रिक्शा दौड़ते नजर आएंगे। पहली खेप में पांच सोलर ई-रिक्शा मुहैया कराए गए हैं, जल्द ही पांच और सोलर रिक्शा आएंगे। इसके साथ ही आईआईटी के इंजीनियर सोलर रिक्शा को तकनीकी रूप से ज्यादा बेहतर भी बनाएंगे। उन्नत किस्म का सोलर ई-रिक्शा जल्द ही बाजार में देखने को मिलेगा। वजन में हल्के और कम ऊर्जा खपत वाले सोलर ई-रिक्शा की कीमत मौजूदा ई-रिक्शा से आधी बताई गई है। यह रिक्शा सौर ऊर्जा के साथ-साथ पैडल और बैटरी ऊर्जा से भी दौड़ेगा। गौरतलब है कि प्रदूषण मुक्त कैंपस के लिए संस्थान के छात्र-छात्राएं सिर्फ साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। अब कैंपस में रहने वाले परिवार भी पर्यावरण संरक्षण के लिए सोलर रिक्शा solar e rickshaw में सफर करेंगे। विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय की अधीनस्थ सेंट्रल इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड central electronic limited ने संस्थान को सोलर ई-रिक्शा सीएसआर के तहत मुहैया कराए हैं।


कैंपस में संचालन के लिए आईआईटी प्रशासन तय करेगा न्यूनतम किराया

कैंपस में सोलर ई-रिक्शा की शुरुआत के मौके पर आईआईटी-कानपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर अभय करंदीकर ने बताया कि जल्द ही सोलर रिक्शा के लिए न्यूनतम किराया तय किया जाएगा। सोलर रिक्शा मुख्य प्रवेश द्वार के अतिरिक्त शॉपिंग काम्प्लेक्स, रेजीडेंशियल एरिया में निर्धारित स्थान पर खड़े रहेंगे। प्रोफेसर करंदीकर ने कहाकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सोलर रिक्शा बड़ी उपलब्धि है। भविष्य में सोलर रिक्शा को तकनीकी रूप से और बेहतर बनाने की दिशा में संस्थान के इंजीनियर काम करेंगे। सोलर रिक्शा ईजाद करने वाली सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड के सीएमडी बी.एन. सरकार ने बताया कि ऊर्जा खपत कम करने के लिए सोलर रिक्शा का वजन काफी कम रखा गया है। इसके साथ ही सोलर पैनल चार्ज नहीं होने की स्थिति में इस रिक्शे को पैडल अथवा बैटरी ऊर्जा से चलाना मुमकिन है।

लो-फ्लोर हैं सोलर रिक्शा, मरीजों-वृद्धों को नहीं होगी दिक्कत

सोलर रिक्शा का प्लेटफार्म काफी नीचे है, इस कारण मरीजों तथा वृद्धों को चढऩे-उतरने में दिक्कत नहीं होगी। सुरक्षा के नजरिए से बड़ों पहियों और डबल चेसिस के कारण सोलर रिक्शा के पलटने का खतरा काफी कम है। बी.एन. सरकार ने कहाकि सीईएल ने आईआईटी-दिल्ली को भी सीएसआर के तहत दस सोलर रिक्शा मुहैया कराए हैं। उम्मीद है कि तकनीकी संस्थान जल्द ही सोलर रिक्शा को तकनीकी रूप से और बेहतर बनाएंगे। उन्होंने कहाकि बाजार में मौजूद ई-रिक्शा की कीमत करीब सवा लाख रुपए है, जबकि सोलर ई-रिक्शा लगभग पैंसठ हजार रुपए में बाजार में जल्द ही उपलब्ध होगा।

300 वॉट का सोलर पैनल, 48 वोल्ट की बैटरी की ताकत

सोलर ई-रिक्शा में छत के ऊपर 300 वॉट का पैनल लगाया गया है, जबकि 12-12 वोल्ट की चार बैटरियां सीट के लिए फिट हैं। रिक्शे का कुल वजन 180 किलोग्राम है तथा 250 किलोग्राम वजन ढोने में सक्षम है। जानकारी के मुताबिक सोलर रिक्शा में पांच सौ वॉट की मोटर लगाई गई है। बताया गया है कि दिन में सोलर पैनल केे फुल चार्ज होने की स्थिति में रात के वक्त भी तीन-चार घंटे सोलर रिक्शा को दौड़ा सकते हैं।