
सबसे बड़ा संकट, प्रदेश का यह महत्वपूर्ण महकमा बंद होगा, कंगाली के दौर में नीलामी तय
कानपुर। कर्ज में डूबा उत्तरप्रदेश वित्तीय निगम (यूपीएफसी) नीलाम होने की कगार पर आ गया। इस पर भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) का ६६१ करोड़ रुपया बकाया है। जिसके चलते अब इसकी संपत्तियां नीलाम कराई जाएंगी। नीलामी के पैसे से सिडबी अपने नुकसान की भरपाई करेगा। सिडबी ने यूपीएफसी के कानपुर स्थित राज्य मुख्यालय पर नीलामी का नोटिस भी चस्पा कर दिया है।
पहले चरण में होगी इनकी नीलामी
नीलामी के पहले चरण में मुख्यालय भवन और परिसर के साथ लखनपुर की आवासीय संपत्तियों की भी नीलामी की जाएगी। इसके लिए २८ और २९ नवम्बर को ऑनलाइन बोली लगाई जाएगी। सिडबी अगस्त २०१७ में ही सिविल लाइंस स्थित राज्य मुख्यालय को अपने कब्जे में ले चुका है।
यूपीएफसी ने मांगी थी मोहलत
ऋण वसूली अधिकरण के आदेश पर जब सिडबी ने राज्य मुख्यालय को अपने कब्जे में लिया तो यूपीएफसी ने कहा कि वह २५ फीसदी रकम का एकमुश्त भुगतान करने के बाद शेष राशि किस्तों में जमा कर देगा। इस पर ऋण वसूली अधिकरण ने दो वर्ष की मोहलत दी पर इसके बावजूद जब यूपीएफसी की ओर से पैसा जमा नहीं हुआ तो २३ अक्टूबर को अधिकरण ने संपत्तियां नीलाम कर बकाया राशि वसूलने का फैसला दिया।
ब्याज न चुकाने से दोगुना हुआ कर्ज
यूपीएफसी पर २५ वर्षों से सिडबी का कर्जा है। २००२ में यह राशि ३७२ करोड़ थी। यूपीएफसी के अफसर कर्ज चुकाना ही नहीं चाहते थे, इस वजह से कर्ज का ब्याज देना भी बंद कर दिया गया और कर्ज की राशि बढक़र ६६१ रुपए हो गई।
अफसरों की लापरवाही से बर्बाद हुआ यूपीएफसी
यूपीएफसी के अफसरों ने दिए गए कर्ज की वसूली में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसके चलते यूपीएफसी की यह हालत हुई। यूपीएफसी ने ३२०० करोड़ रुपए का कर्ज औद्योगिक इकाइयों को दिया। इसमें २९०० करोड़ की वसूली ही की गई। ३०० करोड़ न वसूले जाने और ब्याज चढ़ते रहने से यह स्थिति पैदा हो गई।
Published on:
24 Oct 2019 01:02 pm
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