
हवा से बिजली बनाएगा आईआईटी, कम होंगे दाम
कानपुर। अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो बिजली के बढ़ते दामों से जल्द निजात मिल सकती है। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने हवा से बिजली बनाने में सफलता हासिल कर ली है। ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोतो से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में नए तरीके को विकसित कर लिया है। इस स्रोत से बिजली उत्पादन पर बिजली के दाम कम होंगे और जनता को महंगी बिजली से राहत मिलेगी।
नवीन स्रोतों पर हुई चर्चा
प्राकृतिक नवीन स्रोतों से बिजली उत्पादन पर चर्चा के लिए आईआईटी में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में देश विदेश के विशेषज्ञ एकत्र हुए। जिसमें कोयले और तेल की बजाय हवा, बायो फ्यूल, सौर ऊर्जा से आने वाले समय में उत्पादन ज्यादा बढ़ाने पर चर्चा हुई।
२०३० तक स्रोत बदलने का लक्ष्य
आईआईटी में क्लाइमेट जस्टिस रिसर्च सेंटर और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी के सहयोग से हुई कार्यशाला में आईआईटी कानपुर के सहयोग से हुई कार्यशाला में कानपुर के डॉ. प्रदीप स्वर्णकार ने बताया कि कोयले और तेल से अगर बिजली उत्पादन ऐसे ही होता रहा तो जल्द ही इनका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसलिए चीन, यूएसए और भारतने २०३० तक हवा, सौर ऊर्जा और बायो फ्यूल से पूरी तरह बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
नवीन स्रोतों से देश में हो रहा उत्पादन
देश में प्राकृतिक ऊर्जा के नवीन स्रोतों से २०२२ तक १७५ गीगा टन बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जो २०१९ तक ८० गीगा टन तक पहुंच गया है। कार्यशाला में ऑस्ट्रेलिया क े६ और जर्मनी के तीन विशेषज्ञों ने जानकारियां दीं। विंड पॉवर के जरूरी इंतजाम, प्लांट के लिए जमीन, तेज हवा वाले क्षेत्रों की पहचान और संसाधन जुटाने में आने वाली समस्याओं पर चर्चा की गई।
तमिलनाडु में सबसे सस्ती बिजली
चेन्नई से आई आईटी इंजीनियर और पर्यावरण प्रचारक सुंदरराजन ने बताया कि प्राकृतिक स्रोतों से बिजली उत्पादन में तमिलनाडु सबसे बेहतर है। यहंा पर सोलर एनर्जी और हवा से हर साल ९५०० मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जाता है। जिसके चलते यहंा पर बिजली केवल २.९० रुपए प्रति यूनिट है।
Published on:
13 Nov 2019 04:10 pm
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